अदालती आदेश ना मानने से भड़का हाईकोर्ट, कहा- अफसरों पर अवमानना का ऐक्शन ले सरकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि राज्य आदेशों का पालन नहीं करता है और न ही उन्हें स्थगित कराने के लिए कोई कदम उठाता है तो यह घोर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में राज्य के अधिकारियों को अवमानना के लिए दंडित किया जाना चाहिए।

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक आदेश में कहा है कि राज्य को यह समझना चाहिए और ध्यान में रखना चाहिए कि एक बार न्यायालय ने कोई न्यायिक आदेश कर दिया है तो उसका पालन किया जाना अनिवार्य है, या फिर उसे किसी उच्च अदालत के आदेश से स्थगित किया जाना चाहिए। राज्य आदेशों का पालन नहीं करता है और न ही उन्हें स्थगित कराने के लिए कोई कदम उठाता है तो यह घोर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में राज्य के अधिकारियों को अवमानना के लिए दंडित किया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने आशा त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट ऐसे मामलों से परेशान है, जिनमें याचियों ने वैकल्पिक उपाय का लाभ उठाया जो, जो दीवानी अदालतों से मिला था और अवमानना के मामले भी किए गए हैं। फिर भी राज्य की संस्थाएं न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करती हैं, जिससे वैकल्पिक उपाय की उपलब्धता ही व्यर्थ हो जाती है। कोर्ट का मानना है कि दीवानी अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने के लिए राज्य के अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। हाईकोर्ट को दीवानी अदालत के आदेशों के ऐसे उल्लंघनों का स्वतः संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कानून का शासन कायम रहे।
इसी के साथ कोर्ट ने मऊ की दीवानी अदालत के यथास्थिति कायम रखने व अदालत के अवमानना नोटिस के बावजूद आदेश की अवहेलना जारी रखने को गंभीरता से लिया है और एसडीएम मधुबन राजेश अग्रवाल को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ 13 मार्च को हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि 30 अक्टूबर 2024 के दीवानी अदालत के आदेश की अवहेलना के लिए क्यों न उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने कहा वह हाजिर नहीं होंगे तो उन्हें पेश करने के लिए जमानती व उसके बाद गैर जमानती वारंट जारी किया जाएगा। इसके अलावा कोर्ट ने राज्य सरकार को याची की जमीन पर सड़क निर्माण रोकने का भी आदेश दिया है।
याची को आदेश का पालन कराने के लिए हाईकोर्ट में दो बार याचिका करनी पड़ी। शुरू में भूमि विवाद को लेकर याची ने प्राइवेट विपक्षियों के खिलाफ दीवानी वाद किया तो दीवानी अदालत ने यथास्थिति कायम रखने का निर्देश दिया। इसके विपरीत सरकार ने याची की विवादित जमीन पर सड़क का निर्माण जारी रखा तो इसे रोकने के लिए हाईकोर्ट में याचिका की गई। हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट में आदेश 39 नियम 4ए के तहत वैकल्पिक उपचार के तहत अवमानना अर्जी दाखिल करने को कहा।
याची की अर्जी पर सिविल कोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी किया है लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा। निर्माण जारी रखा गया तो दोबारा यह याचिका दाखिल कर याची की जमीन में सड़क निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई। कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारी अदालत के आदेश का उल्लघंन कर रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट को स्वयं कार्यवाही करने की शक्ति प्राप्त है और ऐसे अधिकारियों को दंडित करना चाहिए।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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