वाराणसी की दाल मंडी में ध्वस्तीकरण पर 2 अवमानना याचिकाएं खारिज, हाईकोर्ट का फैसला
वाराणसी की दाल मंडी में ध्वस्तीकरण पर 2 अवमानना याचिकाएं खारिज हो गई। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ही नहीं की तो न्यायालय के आदेश की अवमानना का प्रश्न ही नहीं उठता।

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी स्थित दाल मंडी में ध्वस्तीकरण के मामले में दाखिल तीन दर्जन से अधिक अवमानना याचिकाओं को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने दिया है।
वाजिद अब्बास की अवमानना याचिका के अनुसार वाराणसी के गोविंदपुरा स्थित दाल मंडी में एक मकान में तीन भाइयों अली अब्बास, हसन अब्बास व जाफर अब्बास का हिस्सा था। हसन और जाफर ने अपना 2/3 हिस्सा राज्य सरकार को बेच दिया जबकि वाजिद अब्बास (अली अब्बास के पुत्र) का 1/3 हिस्सा अब भी उनके पास है, जहां वह सोनू इंटरप्राइजेज नाम से दुकान चला रहे हैं। डीएम का हलफनामा पेश कर अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने बताया कि प्रशासन वहां ध्वस्तीकरण की कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है क्योंकि दो भाइयों वाले हिस्से को ढहाया गया तो याची की दुकान भी गिर सकती है इसलिए कार्रवाई रोक दी गई है।
याची ने तथ्य का कोई ठोस खंडन नहीं किया
कोर्ट ने पाया कि याची ने इस तथ्य का कोई ठोस खंडन नहीं किया है इसलिए अवमानना का कोई मामला नहीं बनता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ही नहीं की तो न्यायालय के आदेश की अवमानना का प्रश्न ही नहीं उठता। याची अब्दुल सलाम कुरैशी ने वाराणसी विकास प्राधिकरण, नगर निगम और डीएम के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिस मूल याचिका पर आदेश हुआ था, उसमें वीडीए और नगर निगम को पक्षकार बनाया ही नहीं गया था। नगर निगम के अधिवक्ता बिपिन बिहारी पांडेय ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार द्वारा कोई ध्वस्तीकरण नहीं किया गया है। केवल वीडीए द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। कोर्ट ने याची को वीडीए के नोटिस का जवाब देने का निर्देश देते हुए याचिका को गलत मानते हुए खारिज कर दिया। इसी मुद्दे पर तीन दर्जन से ज्यादा अन्य अवमानना याचिकाएं भी कोर्ट ने खारिज कर दी हैं
आर्किटेक्ट की रिपोर्ट के बिना जर्जर भवन गिराने पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी इलाके में एक भवन को ढहाने के नोटिस पर स्पष्ट किया है कि नगर निगम अधिनियम की धारा 331 के तहत किसी भी भवन के निरीक्षण के लिए गठित समिति में आर्किटेक्ट का होना अनिवार्य है। इस तकनीकी खामी के आधार पर कोर्ट ने याची के भवन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी एवं न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने वाराणसी के सैयद अब्बास मुर्तजा शम्सी ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में नगर निगम के गत 15 अप्रैल के नोटिस को चुनौती दी गई थी। नगर निगम ने दालमंडी स्थित याची के मकान संख्या 39/12 को खतरनाक बताते हुए खाली करने और ढहाने का नोटिस दिया था। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम ने जिस निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर नोटिस दिया, उस समिति में कोई आर्किटेक्ट शामिल नहीं था।
निगम के ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ पार्षद की पीआईएल खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दाल मंडी इलाके में मकानों को जर्जर घोषित करने और उन्हें गिराने के नोटिस को लेकर वाराणसी नगर निगम के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने याची वाराणसी नगर निगम पार्षद फरजाना बीबी के वकील और वाराणसी नगर निगम के अधिवक्ता विनीत संकल्प को सुनकर दिया है। याचिका में दाल मंडी इलाके के कई मकानों को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत जर्जर घोषित किए जाने के नोटिसों को चुनौती दी थी। याचिका में मांग की गई थी कि नगर निगम के सर्वेक्षण और तकनीकी निरीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। बिना किसी वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए इन मकानों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई या विध्वंस न किया जाए।
लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।
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