
हाईकोर्ट ने योगी सरकार से इस मामले में जवाब मांगा, यूपी में ऐसा क्यों नहीं हो रहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी की योगी सरकार जवाब मांगा है। कोर्ट ने यूपी सरकार से यह बताने को कहा है कि अन्य राज्यों में उच्च न्यायालय के रिटायर जजों के घरेलू सेवकों को रखने के लिए पैसे बढ़ा दिए गए हैं तो यूपी में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिटायर जजों के घरेलू सेवकों का वेतन बढ़ाने और उन्हें अन्य सुविधाएं देने के मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने यूपी सरकार से यह बताने को कहा है कि अन्य राज्यों में उच्च न्यायालय के रिटायर जजों के घरेलू सेवकों को रखने के लिए पैसे बढ़ा दिए गए हैं तो यूपी में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने रिटायर जज एसोशिएशन की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार यादव एवं सहयोगी अधिवक्ता वशिष्ठ दुबे को सुनकर दिया है। सीनियर एडवोकेट आलोक यादव ने खंडपीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदेश सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है लेकिन प्रदेश सरकार ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।
एक दूसरे मामले में प्रमुख सचिव से स्पष्टीकरण मांगा
वहीं एक दूसरे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को एक व्यक्ति को केवल एक जन्म तिथि प्रमाणपत्र जारी होने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव से प्रदेश स्तर पर व्याप्त इस भ्रष्टाचार पर जवाब मांगा है। साथ ही सिस्टम की खामी दुरुस्त करने के कदम उठाने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने शिवांकी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।इससे पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी से जानकारी मांगी थी। क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक यूआईडीएआई ने जानकारी दी कि याची ने आधार कार्ड के लिए दो भिन्न जन्म प्रमाणपत्र दिए हैं। एक निबंधक जन्म एवं मृत्यु द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य विभाग मनौता का व दूसरा ग्राम पंचायत हरसिंघपुर का। दोनों में अलग जन्मतिथि दर्ज है। एक में जन्मतिथि 10 दिसंबर 2007 तो दूसरे में एक जनवरी 2005 है। जिससे स्पष्ट है कि विभाग में हर स्तर पर बेईमानी व्याप्त है। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है।





