एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील और पत्नी की हत्या के आरोपी की फांसी रद्द, केस से भी बरी, रिहा करने का आदेश

Apr 07, 2026 05:33 am ISTYogesh Yadav प्रयागराज, विधि संवाददाता
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की 2016 में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में मुख्य आरोपी रेयान की फांसी की सजा रद्द कर दी है। रेयान को तुरंत रिहा करने का आदेश भी दिया है।

एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील और पत्नी की हत्या के आरोपी की फांसी रद्द, केस से भी बरी, रिहा करने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर में एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद और उनकी बीवी फरजाना की हत्या के मामले में अभियुक्त रेयान की फांसी की सजा रद्द कर दी है। कोर्ट ने उसे अपराध से बरी करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपीलार्थी को फांसी की सजा देने में गंभीर गलती की है, इसे इस तथ्य से समझा जा सकता है कि ट्रायल कोर्ट हमारे सिस्टम में भय की सबसे निचली पायदान पर है। यह कोर्ट मानती है कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय और आदेश रद्द किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों का संदिग्ध आचरण स्पष्ट नहीं हुआ है। जिस अधिकारी व उनकी पत्नी की हत्या की गई वह कई हाई प्रोफ़ाइल मामलों की जांच कर रहे थे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित थे। इसमें आतंकवाद के मामले भी शामिल थे। पुलिस ने घटनास्थल पर महीनों तक डेरा डाला ताकि मामले को सुलझाया जा सके। आसपास के कई व्यक्तियों को कई दिनों तक हिरासत में रखा, जैसा गवाह क्रमांक दो तीन व 12 ने स्वीकार किया लेकिन कोई विश्वसनीय सुराग नहीं मिला।

इसी मामले में अभियुक्त मुनीर (अपील लंबित रहने के दौरान मौत हो गई) स्थानीय अपराधी था। रेयान को उसके गिरोह का सदस्य बताया गया। मोहम्मद तंजील के भाई मोहम्मद राघिब मसूद ने तीन अप्रैल 2016 को बिजनौर के थाना श्योहारा में आईपीसी की धारा 307 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मौत की सजा सुनाई थी। एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

हालांकि जब मामला हाईकोर्ट आया तो न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता व न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की राय अलग-अलग थी। एक न्यायमूर्ति ने रेयान को बरी करने का निर्णय दिया जबकि दूसरे ने उसकी सजा आजीवन कारावास में बदल दी। प्रकरण चीफ जस्टिस के पास संदर्भित कर दिया गया। इसके बाद न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने यह फैसला सुनाया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी की भतीजी का निकाह श्योहारा के बंधन बैंक्वेट हाल में हो रहा था। इसमें उनके भाई, भाभी, भतीजी ज़िमनिश और भतीजे शाहबाज़ भी शामिल होने पहुंचे थे। शादी के बाद उनके भाई वैगनार कार में पत्नी, बेटी और बेटे के साथ विवाह स्थल से निकल गए। वह भी दूसरी कार में परिवार के साथ थे।

साहसपुर की ओर ताल कटोरा नाले के पास दो व्यक्ति मोटरसाइकिल पर वहां पहुंचे और मोटरसाइकिल को कार के पास रोक दिया। उन्होंने मोहम्मद तंजिल और फरजाना पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। शोर मचाने पर हमलावर भाग निकले। अभियोजन पक्ष हत्या में आरोपी के लिप्त होने का पुख्ता सबूत नहीं जुटा सका। कोर्ट ने कहा कि सेशन कोर्ट ने साक्ष्यों को समझने में गलती की।

एनआईए के डिप्टी एसपी की हत्या से देशभर में मच गई थी सनसनी

बिजनौर। चर्चित एनआईए अफसर तंजील अहमद हत्याकांड से पूरे देश में हड़कंप मच गया था। दो अप्रैल 2016 की रात स्योहारा क्षेत्र में एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के बाद एनआईए ने लंबे समय तक बिजनौर में डेरा डाले रखा था। शुरुआत में इस सनसनीखेज हत्याकांड को आतंकी घटना माना गया था। हमलावरों ने डीएसपी तंजील अहमद पर 24 गोलियां दागीं, पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर कुल 33 घाव पाए गए।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई थी आरोपियों की पहचान

एनआईए अफसर की हत्या के बाद इसे बड़ी आतंकी वारदात के तौर पर देखा गया। बताया गया कि तंजील अहमद कई आतंकी मामलों की जांच में शामिल थे। बाद में जांच लेन-देन के विवाद की ओर मुड़ गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया था।

सुप्रीम कोर्ट जाएंगे परिजन

मामले में पैरवी कर रहे तंजील अहमद के भाई ने हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। उनका कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वह आगे भी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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