आज ग्राहक ही कुबेर, खूब बरसाएंगे धन
धनतेरस पर इस बार सेहत को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बर्तन बाजारों में इस बार पीतल और कांसे के बर्तनों की मांग में भारी इजाफा हुआ है। वहीं स्टील और एल्युमिनियम के बर्तनों की बिक्री काफी कम रही। कारोबारी इसे ग्राहकों में बढ़ती जागरूकता और चिकित्सकीय सलाह का नतीजा बता रहे हैं।
रामघाट रोड, बड़ा बाजार, सेंटर प्वाइंट, महावीरगंज, रेलवे रोड स्थित दुकानों पर इस बार पीतल की थाली, गिलास, कटोरी, लोटा, कड़ाही और पूजा के बर्तनों की जबरदस्त बिक्री हो रही है। कई दुकानदारों के मुताबिक पिछले पांच साल में पहली बार ऐसा रुझान देखने को मिला है जब लोगों ने सेहत को प्राथमिकता देते हुए पारंपरिक धातुओं की ओर रुख किया है। जहां पहले ग्राहक केवल चमक-दमक और डिजाइन को देखकर बर्तन चुनते थे, वहीं अब सेहत सबसे बड़ा मानक बन गई है। यह बदलाव न केवल बाजार की दिशा बदल रहा है बल्कि एक नई स्वास्थ्य-संस्कृति को भी जन्म दे रहा है सजावट से पहले सेहत।
बदलता ट्रेंड
बर्तन कारोबारी बताते हैं कि इस बार धनतेरस पर स्टील के बर्तनों की बिक्री में करीब 60 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। एल्युमिनियम के बर्तनों की तो पूछपरख ही खत्म हो गई है। जबकि पीतल और कांसे की बिक्री में तीन गुना तक बढ़ोतरी हुई है। दुकानों पर इन धातुओं के नए डिजाइन और हल्के वजन वाले मॉडल ग्राहकों को खूब भा रहे हैं।
सेहत पहले, दिखावा बाद में
ग्राहकों का कहना है कि पहले जहां चमकदार स्टील के बर्तन खरीदना फैशन समझा जाता था, वहीं अब पीतल और कांसे को सेहत का प्रतीक माना जाने लगा है। बुजुर्गों से मिली जानकारी और सोशल मीडिया पर फैले स्वास्थ्य लाभ के संदेशों ने इस सोच को और मजबूत किया है।
क्यों बढ़ रही पीतल और कांसे की मांग
पीतल-कांसे के बर्तनों में बैक्टीरिया नष्ट करने की क्षमता होती है।
भोजन का स्वाद और पाचन दोनों बेहतर करते हैं।
शरीर में तांबा, जस्ता जैसे तत्वों की पूर्ति करते हैं।
लंबे समय तक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हैं।
धार्मिक दृष्टि से भी शुभ माने जाते हैं।
क्यों हैं पीतल-कांसे के बर्तन फायदेमंद
चिकित्सकों का कहना है कि एल्युमिनियम में बना भोजन धीरे-धीरे शरीर में एल्यूमिनियम तत्व पहुंचाता है, जो तंत्रिका तंत्र, लीवर और हड्डियों पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसके विपरीत पीतल और कांसे के बर्तन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माने गए हैं। पीतल में मौजूद तांबा और जस्ता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। कांसे के बर्तन में खाना खाने से पाचन क्रिया सुधरती है और गैस, एसिडिटी जैसी समस्याएं कम होती हैं। यह बर्तन शरीर में गर्मी का संतुलन बनाए रखते हैं और बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं।चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों के लिए पीतल और कांसे के बर्तन विशेष रूप से उपयोगी हैं। बच्चों में यह हड्डियों के विकास और मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाने में मदद करते हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए ये पाचन और रक्त संचार को संतुलित रखने में सहायक हैं। नियमित रूप से इन बर्तनों में बना भोजन करने से शरीर में सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति होती है, जिससे कमजोरी और थकान जैसी शिकायतें कम होती हैं।
धनतेरस पर पीतल-कांसे की चमक लौटी, स्टील की रौनक फीकी
अलीगढ़। धनतेरस पर इस बार सेहत को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बर्तन बाजारों में इस बार पीतल और कांसे के बर्तनों की मांग में भारी इजाफा हुआ है। वहीं स्टील और एल्युमिनियम के बर्तनों की बिक्री काफी कम रही। कारोबारी इसे ग्राहकों में बढ़ती जागरूकता और चिकित्सकीय सलाह का नतीजा बता रहे हैं।
रामघाट रोड, बड़ा बाजार, सेंटर प्वाइंट, महावीरगंज, रेलवे रोड स्थित दुकानों पर इस बार पीतल की थाली, गिलास, कटोरी, लोटा, कड़ाही और पूजा के बर्तनों की जबरदस्त बिक्री हो रही है। कई दुकानदारों के मुताबिक पिछले पांच साल में पहली बार ऐसा रुझान देखने को मिला है जब लोगों ने सेहत को प्राथमिकता देते हुए पारंपरिक धातुओं की ओर रुख किया है। जहां पहले ग्राहक केवल चमक-दमक और डिजाइन को देखकर बर्तन चुनते थे, वहीं अब सेहत सबसे बड़ा मानक बन गई है। यह बदलाव न केवल बाजार की दिशा बदल रहा है बल्कि एक नई स्वास्थ्य-संस्कृति को भी जन्म दे रहा है सजावट से पहले सेहत।
बदलता ट्रेंड
बर्तन कारोबारी बताते हैं कि इस बार धनतेरस पर स्टील के बर्तनों की बिक्री में करीब 60 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। एल्युमिनियम के बर्तनों की तो पूछपरख ही खत्म हो गई है। जबकि पीतल और कांसे की बिक्री में तीन गुना तक बढ़ोतरी हुई है। दुकानों पर इन धातुओं के नए डिजाइन और हल्के वजन वाले मॉडल ग्राहकों को खूब भा रहे हैं।
सेहत पहले, दिखावा बाद में
ग्राहकों का कहना है कि पहले जहां चमकदार स्टील के बर्तन खरीदना फैशन समझा जाता था, वहीं अब पीतल और कांसे को सेहत का प्रतीक माना जाने लगा है। बुजुर्गों से मिली जानकारी और सोशल मीडिया पर फैले स्वास्थ्य लाभ के संदेशों ने इस सोच को और मजबूत किया है।
क्यों हैं पीतल-कांसे के बर्तन फायदेमंद
चिकित्सकों का कहना है कि एल्युमिनियम में बना भोजन धीरे-धीरे शरीर में एल्यूमिनियम तत्व पहुंचाता है, जो तंत्रिका तंत्र, लीवर और हड्डियों पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसके विपरीत पीतल और कांसे के बर्तन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माने गए हैं। पीतल में मौजूद तांबा और जस्ता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। कांसे के बर्तन में खाना खाने से पाचन क्रिया सुधरती है और गैस, एसिडिटी जैसी समस्याएं कम होती हैं। यह बर्तन शरीर में गर्मी का संतुलन बनाए रखते हैं और बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं।चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों के लिए पीतल और कांसे के बर्तन विशेष रूप से उपयोगी हैं। बच्चों में यह हड्डियों के विकास और मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाने में मदद करते हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए ये पाचन और रक्त संचार को संतुलित रखने में सहायक हैं। नियमित रूप से इन बर्तनों में बना भोजन करने से शरीर में सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति होती है, जिससे कमजोरी और थकान जैसी शिकायतें कम होती हैं।

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