Hindi NewsUP Newsअलीगढ़The traffic jam brought life to a standstill.
जाम ने थाम दी जिंदगी की रफ्तार

जाम ने थाम दी जिंदगी की रफ्तार

संक्षेप:

शहर की सबसे व्यस्त और संवेदनशील सड़कों में शामिल रसलगंज रोड आज खुद बदहाली की शिकार है। यहां जाम अब कोई अपवाद नहीं, रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है। ई-रिक्शाओं की बेतरतीब कतारें, सड़क पर फैला अतिक्रमण और दुकानों का फुटपाथ से सड़क तक फैल जाना शहर का स्थायी जाम प्वाइंट बना दिया है। 

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रसलगंज चौराहे से लेकर जिला अस्पताल मलखान सिंह, सराय हकीम और बारहद्वारी तक का मार्ग लगातार जाम की चपेट में रहता है। इस सड़क से प्रतिदिन करीब 20 से अधिक छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, जिनमें दोपहिया, चारपहिया, ऑटो, ई-रिक्शा और एंबुलेंस तक शामिल हैं। लेकिन सड़क की चौड़ाई के अनुपात में ट्रैफिक का दबाव कहीं ज्यादा है, ऊपर से ई-रिक्शाओं का अव्यवस्थित संचालन हालात को और गंभीर बना देता है।

हिन्दुस्तान के बोले अलीगढ़ अभियान के तहत टीम ने इस इलाके के लोगों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि रसलगंज चौराहा शहर के कई प्रमुख मार्गों को जोड़ता है। यही सड़क रसलगंज को सराय हकीम, रेलवे रोड और जीटी रोड जैसे अहम इलाकों से संपर्क में रखती है। इसी मार्ग पर शहर का प्रमुख जिला अस्पताल मलखान सिंह भी स्थित है, जहां रोज़ाना सैकड़ों मरीज और तीमारदार आते-जाते हैं। जाम की वजह से एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है, जिससे समय पर इलाज तक प्रभावित हो सकता है। लोगों ने कहा कि स्थिति को और बदतर बनाता है बाजार का अतिक्रमण। सड़क किनारे सजने वाली दुकानें, ठेले और अस्थायी बाजार न केवल फुटपाथ, सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लेते हैं। इससे वाहनों की आवाजाही सिमटकर रह जाती है और थोड़ी सी भी चूक पर लंबा जाम लग जाता है। ट्रैफिक नियंत्रण और अतिक्रमण हटाने की ठोस व्यवस्था न होने से यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। रसलगंज चौराहे की हालत सबसे ज्यादा खराब है। रोड केवल एक बाजारू सड़क नहीं, शहर की जीवनरेखा है। इसके बावजूद अव्यवस्था, लापरवाही और नियोजन की कमी ने इसे शहरवासियों के लिए सिरदर्द बना दिया है। लोगों ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस को रसलगंज चौराहे से लेकर बारहद्वारी तक ई-रिक्शा चालकों पर नियंत्रण करना चाहिए। चौराहे पर खड़े ई-रिक्शा और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

शिकायत

-रसलगंज चौराहे पर ई-रिक्शाओं का अव्यवस्थित जमावड़ा।

-सड़क किनारे और फुटपाथ पर दुकानों का भारी अतिक्रमण।

-ई-रिक्शा के लिए तय स्टैंड और रूट की व्यवस्था न होना।

-ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती और निगरानी का अभाव।

-जिला अस्पताल तक जाने वाली एंबुलेंस का जाम में फंसना।

-पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का पूरी तरह कब्जे में होना।

-नो-पार्किंग नियमों का खुलेआम उल्लंघन।

-रसलगंज चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल और रोड मार्किंग की कमी।

-सुबह और शाम पीक आवर्स में अत्यधिक ट्रैफिक दबाव।

-अतिक्रमण हटाओ अभियान का केवल अस्थायी और दिखावटी होना।

सुझाव

-ई-रिक्शाओं के लिए अलग स्टैंड और निश्चित रूट तय किए जाएं।

-रसलगंज चौराहे से जिला अस्पताल तक सख्त अतिक्रमण हटाओ अभियान चले।

-जिला अस्पताल के आसपास क्षेत्र को नो-पार्किंग और नो-स्टॉप जोन घोषित किया जाए।

-ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए।

-ई-रिक्शा चालकों का पंजीकरण और ट्रैफिक नियमों का प्रशिक्षण अनिवार्य हो।

-फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त कर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाया जाए।

-आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल और स्पष्ट रोड मार्किंग की व्यवस्था की जाए।

-पीक आवर्स में भारी वाहनों का प्रवेश नियंत्रित किया जाए।

-सीसीटीवी कैमरों से निगरानी कर नियम तोड़ने वालों पर तत्काल कार्रवाई हो।

-रसलगंज रोड को शहर का मॉडल ट्रैफिक कॉरिडोर विकसित किया जाए।

अस्पताल के सामने ही जाम में फंसी जिंदगी

अलीगढ़। जिला महिला अस्पताल और जिला अस्पताल मलखान सिंह के सामने ई-रिक्शाओं का बेतरतीब जमावड़ा अब गंभीर समस्या बन चुका है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को सबसे पहले जाम से जूझना पड़ता है। अस्पताल के मुख्य गेट के सामने ई-रिक्शा चालक सवारियां भरने के लिए कतार लगाकर खड़े हो जाते हैं, जिससे सड़क की चौड़ाई सिमट जाती है और कुछ ही मिनटों में लंबा जाम लग जाता है। इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा नुकसान आपातकालीन सेवाओं को उठाना पड़ रहा है। कई बार एंबुलेंस जाम में फंस जाती हैं, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में देरी होती है। महिला अस्पताल के सामने हालात और भी संवेदनशील हैं। जहां गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु और बुजुर्ग मरीज आते-जाते हैं। जाम के कारण न सिर्फ समय बर्बाद होता है, मरीजों की तकलीफ भी बढ़ जाती है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के सामने नो-स्टॉप और नो-पार्किंग नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। न तो ई-रिक्शाओं के लिए अलग स्टैंड निर्धारित है और न ही सख्त निगरानी। नतीजा यह है कि जहां इलाज मिलना चाहिए, वहीं अव्यवस्था और जाम मरीजों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है।

बोले लोग

ई-रिक्शा जरूरी हैं, लेकिन उनकी संख्या और संचालन पर नियंत्रण न हो तो यही हाल रहेगा। नियम जरूरी हैं, वरना शहर जाम में डूबता रहेगा। जिला अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह के पास जाम, अतिक्रमण शर्मनाक है।

जय गोपाल वीआईपी

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हम रोज रसलगंज रोड से निकलते हैं। ई-रिक्शा बीच सड़क पर खड़े रहते हैं, ऊपर से दुकानदारों ने आधी सड़क घेर रखी है। जाम इतना भयानक होता है कि पांच मिनट का रास्ता आधे घंटे में तय होता है। प्रशासन सिर्फ देख रहा है।

प्रमोद

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जिला अस्पताल जाने वाला यही मुख्य रास्ता है, लेकिन जाम में फंसी एंबुलेंस देखकर दिल दहल जाता है। अगर किसी की जान चली जाए तो जिम्मेदार कौन होगा। ई-रिक्शा और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।

सोनू शर्मा

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रसलगंज चौराहा शहर की धड़कन है, लेकिन यहां हर समय अफरा-तफरी रहती है। ट्रैफिक पुलिस नाम मात्र की दिखती है। न लाइन है, न नियम। हर कोई मनमर्जी से वाहन चलाता है, जिससे जाम स्थायी बन गया है।

भुवनेश्वर दयाल

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बाजार की दुकानें अब फुटपाथ से सड़क तक फैल चुकी हैं। पैदल चलने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची। मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है और जाम में फंसना तय हो जाता है। ये खुला अतिक्रमण क्यों नहीं हटता।

सचिन कुमार

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ई-रिक्शा वालों की संख्या बेकाबू हो गई है। जहां जगह मिले वहीं खड़े हो जाते हैं, सवारी बैठाते हैं। किसी को नियमों की परवाह नहीं। अगर इन्हें तय स्टैंड और रूट मिले तो हालात सुधर सकते हैं।

गोपाल शर्मा

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तीमारदार जब मरीज को लेकर जिला अस्पताल जाते हैं। तो रसलगंज रोड पर जाम में फंस जाते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने का डर बना रहता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन की संवेदनहीनता साफ दिखती है।

आदित्य शर्मा

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रसलगंज रोड से रोज हजारों वाहन गुजरते हैं। लेकिन सड़क की हालत और ट्रैफिक व्यवस्था बेहद खराब है। विकास की बातें होती हैं, पर जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी रोज जाम से जूझ रहा है।

तुषार वार्ष्णेय

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यह सड़क रेलवे रोड और जीटी रोड को जोड़ती है, फिर भी कोई ठोस ट्रैफिक प्लान नहीं है। अगर यहां सही ढंग से यातायात नियंत्रित किया जाए तो आधी समस्या अपने आप खत्म हो सकती है।

विनय पांडेय

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दुकानदार सड़क तक सामान फैलाकर बैठते हैं, कोई रोकने वाला नहीं। जब कभी कार्रवाई होती भी है तो कुछ घंटों का नाटक बनकर रह जाती है। स्थायी समाधान कब मिलेगा।

अनिल अरोरा

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स्कूल जाने वाले बच्चों को भी इसी जाम से गुजरना पड़ता है। देर होती है, खतरा अलग। सड़क पर इतनी भीड़ रहती है कि दुर्घटना का डर हर वक्त बना रहता है।

अजय अरोरा

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रसलगंज चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल और पुलिस की सही तैनाती हो तो जाम कम हो सकता है। लेकिन यहां हर चीज भगवान भरोसे चल रही है। अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भयावह होगी।

प्रदीप शर्मा

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ई-रिक्शा चालकों को नियमों की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। बिना लाइसेंस, बिना रूट के चलने से हालात बिगड़ रहे हैं। प्रशासन को अब सख्त फैसला लेना होगा।

निशांत शर्मा

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जिला अस्पताल के पास जाम सबसे ज्यादा खतरनाक है। मरीज, बुजुर्ग और महिलाएं फंसी रहती हैं। इस इलाके को नो-पार्किंग और नो-स्टॉप जोन घोषित करना चाहिए।

गोपाल शर्मा

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हम टैक्स देते हैं, फिर भी हमें जाम और अव्यवस्था ही मिलती है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इस सड़क को प्राथमिकता दे, क्योंकि यह पूरे शहर को जोड़ती है।

इमरान

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रसलगंज चौराहा ऐसा लगता है जैसे यहां किसी का नियंत्रण ही नहीं। हर दिशा से वाहन घुसते हैं, नतीजा सिर्फ जाम और हंगामा। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में यह सड़क पूरी तरह जाम हो जाएगी।

प्रवीन वार्ष्णेय

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Sunil Kumar

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