बढ़ता जा रहा आवारा पशुओं का आतंक
संक्षेप: बीते सोमवार को नौरंगाबाद इलाके में हुई एक भयावह घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। इलाके में एक बेकाबू सांड ने अचानक सड़क पर तांडव मचा दिया था। उसने जो भी सामने आया, उस पर हमला कर दिया। इस घटना में करीब 14 लोग गंभीर रूप से घायल हुए और दो की जान चली गई।
सांड़ की घटना के कारण शहरवासियों में खामोशी के साथ डर पसरा हुआ है। बच्चे घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं, महिलाएं बाजार जाने से पहले कई बार सोच रही हैं और बुजुर्गों के चेहरों पर अब भी उस हादसे की झलक साफ देखी जा सकती है। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि शहर में सुरक्षा अब इंसानों की नहीं, जानवरों की मर्जी पर भी निर्भर है।

नौरंगाबाद इलाके में आवारा सांड के हमले की घटना से पूरे शहर के लोगों में एक भय व्याप्त है। घटना सोमवार सुबह की है, जिस समय लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। तभी अचानक एक आवारा सांड रोड पर प्रकट हो गया। देखते ही देखते उसने कई लोगों को टक्कर मारकर लहुलुहान कर दिया। इसके बाद पैदल चल रहे लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। चंद मिनटों में सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। दुकानों के शटर बंद होने लगे, लोग घरों में भागे। चीख-पुकार के बीच घायल लोग सड़कों पर पड़े रहे। स्थानीय लोगों ने किसी तरह पुलिस और नगर निगम को सूचना दी, लेकिन जब तक टीमें पहुंचीं, तब तक सांड 14 से ज्यादा लोगों को घायल कर चुका था। मंगलवार को अलीगढ़ की घटना पर अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। जिसके बाद राजनीति गर्मा गई है।
हिन्दुस्तान समाचार पत्र के अभियान बोले अलीगढ़ के तहत मंगलवार को टीम ने नौरंगाबाद इलाके में घटनास्थल पर पहुंच लोगों से संवाद किया। इस दौरान लोगों ने बताया कि सांड के तांडव ने पूरे शहर में डर का माहौल बना दिया है। कहा कि सोमवार को सड़कों पर खून और डर दोनों बह रहे थे। बड़ी मशक्कत के बाद टीम ने सांड को काबू किया, लेकिन तब तक जो होना था, हो चुका था। लोगों ने बताया कि दो लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं अन्य घायल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि यह घटना पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। अगर समय रहते आवारा पशुओं को नियंत्रित किया गया होता तो दो परिवारों को अपने प्रियजनों की लाशें न देखनी पड़तीं।
दो गौशालाओं में 750 गोवंश, तीन और प्रस्तावित
शहर में आवारा पशुओं को रोकने के लिए नगर निगम ने फिलहाल दो स्थायी गौशालाएं संचालित कर रखी हैं। जिसमें कान्हा गौशाला आगरा रोड और नंदी गौशाला बरौला जाफराबाद में इस समय करीब 750 गोवंश ठहराए गए हैं। दोनों गौशालाओं में प्रतिदिन चारे, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इन गौशालाओं में क्षमता लगभग पूरी हो चुकी है, इसलिए अब तीन नई गौशालाओं के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जो शहर के अलग-अलग स्थानों पर बनाए जाने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक, नई गौशालाएं बन जाने के बाद शहर से आवारा सांडों और गोवंशों को अधिक प्रभावी तरीके से हटाया जा सकेगा। साथ ही, हर वार्ड में पकड़ने वाली टीमों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे पकड़े गए पशुओं को सीधे इन गौशालाओं में भेजें। निगम का दावा है कि नई गौशालाओं के निर्माण से न केवल सड़कों की सुरक्षा बढ़ेगी, नागरिकों को भी राहत मिलेगी।
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नगर निगम के दावे फेल, सड़कों पर जानवरों का कब्जा
लोगों ने कहा कि नगर निगम का दावा है कि वह लगातार आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चला रहा है। आंकड़ों में बताया जाता है कि हर महीने दर्जनों सांड पकड़े जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। शहर की हर बड़ी सड़क रामघाट रोड, सासनी गेट, नौरंगाबाद, रेलवे रोड, धनीपुर मंडी समेत समूचे शहर में आवारा सांड और कुत्तों के झुंड खुले घूमते हैं। सुबह और शाम के समय सड़कें इनका अड्डा बन जाती हैं। लोगों का कहना है कि निगम का अभियान सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित है, नतीजा यह है कि हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नौरंगाबाद की घटना के बाद भी नगर निगम ने एक बार फिर अभियान तेज करने की घोषणा की है। लेकिन लोगों का भरोसा अब टूट चुका है। नागरिकों का कहना है कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, ऐसे हादसे होते रहेंगे।
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लोगों की मांग, सख्त कानून बने
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन पशुपालकों ने दूध निकालने के बाद गोवंश को यूं ही सड़कों पर छोड़ दिया, उनके खिलाफ जुर्माना लगाया जाए। साथ ही शहर में पर्याप्त गोशालाओं की व्यवस्था की जाए, जिससे कोई भी पशु आवारा न घूमे। लोगों का कहना है कि जब तक सख्त कानून नहीं बनेगा, तब तक सड़कों पर खून बहता रहेगा। नौरंगाबाद की घटना ने अलीगढ़ के हर मोहल्ले को झकझोर दिया है। यह हादसा सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं, पूरे शहर के लिए सबक है। अगर अब भी निगम और प्रशासन ने कदम नहीं उठाए, तो अगली खबर किसी और सड़क, किसी और जान की हो सकती है।
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बोले लोग
नौरंगाबाद की घटना के बाद अब बच्चे घर से बाहर जाने में डरते हैं। हर गली में सांड घूमते हैं। प्रशासन को चाहिए कि तुरंत अभियान चलाकर सभी आवारा पशुओं को गोशालाओं में भेजे, जिससे लोग चैन से रह सकें।
हर्षित वार्ष्णेय
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अब तो ऐसा लगता है जैसे सड़कों पर निकलना जंग लड़ने जैसा हो गया है। कहीं से सांड आ जाए या कुत्ता काट ले। नगर निगम को चाहिए कि हर वार्ड में नियमित रूप से पशु पकड़ने की टीम तैनात करे।
विकास शर्मा
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हमारी गली में रोज शाम को सांड घूमते हैं, महिलाएं घरों से नहीं निकलतीं। सरकार को चाहिए कि जो पशुपालक अपने जानवर छोड़ देते हैं, उन पर सख्त जुर्माना लगाया जाए जिससे लोग जिम्मेदारी समझें।
अनिल
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नौरंगाबाद की घटना ने पूरा माहौल बदल दिया है। अब सुबह टहलने भी डर लगता है। प्रशासन को इस समस्या को सिर्फ अभियान से नहीं, स्थायी व्यवस्था बनाकर खत्म करना चाहिए।
हिमांशु
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बच्चे अब साइकिल से स्कूल नहीं जा पाते, क्योंकि रास्ते में सांड और कुत्तों के झुंड मिल जाते हैं। निगम को स्कूल मार्गों को प्राथमिकता देकर वहां से पशुओं को हटाना चाहिए।
दुर्गेश चंद्र
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डर इतना है कि अब महिलाएं बाजार जाने से पहले मोहल्ले के किसी पुरुष को साथ ले जाती हैं। नगर निगम को हर इलाके में नियंत्रण टीम बनानी चाहिए जो तुरंत मौके पर पहुंचे।
रवि
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पहले शाम को लोग आराम से बैठकर बातें करते थे, अब सांड के डर से दरवाजे बंद कर लेते हैं। निगम और पुलिस को मिलकर सड़कों को सुरक्षित बनाना चाहिए। घटना से पूरे शहर में भय का माहौल है।
रूपेंद्र
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बच्चों के खेल के मैदानों में भी सांड घुस जाते हैं। यह बेहद खतरनाक है। प्रशासन को स्कूलों और पार्कों के आसपास विशेष निगरानी रखनी चाहिए। जिससे बच्चे सुरक्षित रहें।
मोहनलाल कश्यप
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हम लोगों का रोज डर बना रहता है कि कहीं सांड किसी को घायल न कर दे। निगम को चाहिए कि सड़कों पर पशुओं को छोड़ने वालों पर मुकदमा दर्ज करें। जिससे आगे ऐसी घटनाएं न हों।
भूपेंद्र शर्मा
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नौरंगाबाद की घटना ने ये साबित कर दिया कि अलीगढ़ में व्यवस्था नाम की चीज नहीं। प्रशासन को आपात योजना बनाकर पूरे शहर से आवारा जानवरों को हटाना चाहिए।
मोहित
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अब महिलाएं बच्चों को बाहर खेलने नहीं भेजतीं। हर वक्त डर बना रहता है। निगम को नियमित निरीक्षण कराना चाहिए कि कौन से इलाके में सबसे ज्यादा आवारा पशु हैं। समस्या का जल्द निस्तारण होना चाहिए।
शिवम
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कई बार निगम को सूचना देने के बाद भी कोई नहीं आता। अगर यही लापरवाही रही तो लोगों का गुस्सा फूटेगा। प्रशासन को त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली बनानी चाहिए। जिससे शहरवासी सुरक्षित माहौल में जी सकें।
ज्ञानेश देवी
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सांड ने 14 लोगों को घायल किया है। जिसके कारण इलाके में डर बना हुआ है। रात में घर लौटना अब डरावना हो गया है। कहीं से कोई सांड अचानक आ जाता है। पुलिस गश्त के साथ-साथ निगम को भी रात में निगरानी बढ़ानी चाहिए।
मंजू देवी
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हमारी कॉलोनी में सांडों का आतंक महीनों से है। जब तक उन्हें स्थायी गोशाला में नहीं भेजा जाएगा, तब तक हादसे होते रहेंगे। निगम को ठोस नीति बनानी चाहिए।
चंद्रवती
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अब लोगों को लगता है कि शहर में इंसानों की जान की कीमत नहीं रह गई। सरकार को इस समस्या को प्राथमिकता में लेकर हर वार्ड में पशु नियंत्रण केंद्र खोलना चाहिए।
शिवम राजपूत
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सांड के डर से अब लोग सुबह की सैर छोड़ चुके हैं। नगर निगम को जल्द ही मोबाइल वैन सेवा शुरू करनी चाहिए जो शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंच सके।
संदीप गुप्ता
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बाजार में खरीदारी के दौरान भी डर लगता है कि कहीं अचानक सांड हमला न कर दे। प्रशासन को भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अस्थायी पशु पकड़ने वाली टीम रखनी चाहिए।
मनीष शर्मा
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हर साल निगम गोशाला के नाम पर करोड़ों खर्च करता है, फिर भी सांड सड़कों पर हैं। पारदर्शिता लाने के लिए नगर निगम को सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करनी चाहिए।
सीए तुषार बंसल
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हमारी गली में रोज बच्चे खेलने जाते हैं, लेकिन अब उन्हें रोकना पड़ता है। प्रशासन को मोहल्लों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को पशु नियंत्रण में सहयोग के लिए प्रेरित करना चाहिए।
राहुल बर्मन
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बच्चे बाहर खेलने की जिद करते हैं, लेकिन हम मना कर देते हैं। डर अब घर की दीवारों तक घुस आया है। प्रशासन को गंभीरता से स्थायी समाधान निकालना होगा।
सुरेंद्र गुप्ता
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