टैक्स कम देने वाले ट्रेडों का पांच साल का लेखा जोखा देखेंगे अफसर
एफएमसीजी समेत संवेदनशील बिजनेस सेक्टर की खंगाली जाएगी कुंडली, अलीगढ़ जोन में बड़ी इकाइयों की जांच के बाद कमिश्नर ने लिया फैसला, अलीगढ़ के 10 खंड, मथुरा क

अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता चालू वित्तीय वर्ष के शुरूआत में राजस्व बढ़ाने को लेकर शासन स्तर से अभी से कवायद शुरू कर दी गई है। कम टैक्स अदा करने वाले सभी ट्रेड को सूचीबद्ध किया जा रहा है। सेक्टरवार बिजनेस की जांच जीएसटी के अफसर करेंगे। पिछले पांच सालों का लेखा जोखा फर्मों का देखा जाएगा। इकाइयां टर्नओवर के हिसाब से टैक्स अदा कर रहीं हैं कि नहीं इसकी अलीगढ़, एटा, हाथरस, मथुरा, कासगंज में जांच होगी। जांच में जिनका टैक्स टर्नओवर के अनुसार कम मिलेगा उनको नोटिस या फिर उनकी एसआईबी कराई जाएगी।
राजस्व में इजाफा करने के उपाय
राज्यकर विभाग राजस्व में इजाफा करने के लिए संवेदनशील ट्रेड समेत एफएमसीजी की जांच करेगा। इनको सूचीबद्ध किया जा रहा है। अलीगढ़ में 10 सेक्टर हैं। 10 सेक्टरों में पंजीकृत फर्मों का पांच सालों का ब्योरा खंगाला जाएगा, वह नियमानुसार टैक्स दे रही हैं या नहीं। एफएमसीजी व कुछ बड़ी फर्मों की जांच में सामने आया कि इकाइयां टर्नओवर के अनुसार टैक्स नहीं दे रही हैं। जांच के बाद उनको टैक्स भी अदा करना पड़ा है। इसी तरह से सभी सेक्टर की फाइलों को खंगाला जाएगा। इसको लेकर जेसी, डीसी व एसी को जिम्मेदारी दी गई है। फाइलों का अध्ययन कर टैक्स भुगतान का आकलन करें। शून्य टैक्स दाखिल करने वाले भी इसमें शामिल किए जाएंगे। हजारों की संख्या में पंजीकृत व्यापारी जीएसटी में टैक्स शून्य दाखिल कर रहे हैं। एक नहीं बल्कि अलीगढ़ जोन के पांचों जिलों में स्थिति खराब है। मुख्यालय से दिशा निर्देश मिलने के बाद सेक्टर वार समीक्षा की जाएगी। इसमें करापवंचन का मामला मिलने पर फाइलें एसआईबी को रेफर की जाएंगी। एसआईबी के बाद टैक्स जमा कराया जाएगा। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि विभिन्न ट्रेडों में टैक्स कम क्यों आ रहा है? इस पहलू पर जांच के साथ सीए, अधिवक्ताओं व व्यापारियों एवं निर्माताओं से भी संवाद होगा。
संवेदनशील ट्रेड की जांच
राज्यकर विभाग ने आधा दर्जन से अधिक उत्पादों को संवेदनशील की श्रेणी में डाला है। संवेदनशील वाले ट्रेड में सीमेंट, आयरन, स्टील, सुपाड़ी, गुटखा, लकड़ी समेत अन्य उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों से संबंधित इकाइयों व परिवहन पर भी नजर रखी जाएगी। 27 तरह के ट्रेड शामिल हैं, जिनकी जांच होगी। पांच सालों का रिकार्ड देखा जाएगा। इसमें बड़ी फर्मों से लेकर छोटी शामिल होंगी। इसी के आधार पर राजस्व बढ़ाने को लेकर काम किया जाएगा। वहीं तीसरे नंबर पर जीएसटी में पंजीकृत ठेकेदारों को भी शामिल किया गया है। ठेकेदार भी टर्न ओवर के मुताबिक जीएसटी अदा नहीं कर रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष में राज्यकर विभाग ने राजस्व का लक्ष्य पूरा कर लिया था। इस बार लक्ष्य उससे अधिक बढ़ाकर आया है।
अधिकारियों की टिप्पणियां
बोले अधिकारी जोन में पंजीकृत फर्मों की ट्रेडवार जांच की जाएगी। टैक्स कम अदा करने का कारण खोजा जाएगा। राजस्व का लक्ष्य पूरा करने व करापवंचन रोकने की दिशा में काम किया जा रहा है। जो इकाइयां टैक्स कम दे रही हैं उनकी विभिन्न पहलुओं पर जांच होगी ताकि सत्यता का पता चल सके। रवि राज प्रताप मल्ल, एडिशनल कमिश्नर एक अलीगढ़।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


