अलीगढ़ बनेगा ब्रज भूमि, उड़ेगा अबीर-गुलाल

Feb 26, 2026 11:50 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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Aligarh News - - शहर के मुख्य मंदिरों से निकलेगी शोभायात्रा, मंदिरों में रंग भरनी एकादशी की पूरी हुईं तैयारियां

अलीगढ़ बनेगा ब्रज भूमि, उड़ेगा अबीर-गुलाल

अलीगढ़, कार्यालय संवाददाता। शहर भर में होली का उल्लास छाया हुआ है। लेकिन मंदिरों की नगरी जयगंज की होली अनूठी ही होती है। इस बार 60 हजार किलो गुलाल हवाओं में घुलेगा। विभिन्न रंगों के कई गुलालों से सड़के पट जाएंगी। यहां 110 सालों से लगातार डोला निकाला जा रहा है। मुरली मनोहर मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, रंगेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर समेत जयगंज स्थित एक दर्जन से अधिक मंदिरों से रंग भरनी एकादशी पर डोले निकाले जाते हैं। जिसके साथ पूरा जयगंज अबीर-गुलाल से नहा उठता है। उत्सव और आनंद का यह रस आजादी से पहले का है। मंदिर श्री द्वारिकाधीश, मंदिर श्री लक्ष्मी नारायण और मंदिर श्री मदन मोहन से एक साथ डोले निकलते हैं, जो सांझी विरासत की कहानी को बयां करते हैं।

आज मंदिरों से शोभायात्राएं निकलेंगी। मंदिर समितियों ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। जयगंज के प्रमुख मंदिरों में रंगभरनी एकादशी की तैयारियां कई दिन पहले से शुरु हो जाती हैं। मंदिरों में साफ सफाई के साथ मुख्य रूप से सजावट की जाती है। मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। दस टन से ज्यादा फूल मंगाए गए हैं। जिस तरह से गुलाल उड़ाया जाएगा, वैसे ही फूलों की होली भी साथ-साथ चलेगी। सारे मंदिर रंगीन लाइटों से सजाए गए हैं। मंदिरों में शिव तेरस से ही तैयारी शुरु हो गईं थीं। झांकियां, बैंड बुक हो चुके हैं। इस आयोजन की खास बात ये है कि इसमें सबसे पहले क्षेत्र के बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है। इस बार भी सुबह ठाकुर जी के पूजन के बाद बुजुर्गों का सम्मान होगा। इसके बाद यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। बैंड पर होंगे होली के रसिया मुरली मनोहर मंदिर के महंत श्रीजी पुरोहित ने बताया कि शोभायात्रा से पहले ठाकुर जी को श्वेत वस्त्र, गुलाबी पकड़ी पहनाई जाएगी। बैंड पर होली के रसिया जैसे कान्हा को नारी बनाओ री, चुनरी में लग गया दाग, होली खेले तो आई जइयो रसिया, इस दौरान कान्हां व ग्वालों की गारी भी गाई जाएंगी। इनमें होरी याद दिलाए दूंगी, अईयो-अईयो मतवारी के ऐसौ लठ बजाऊं, तेरी होरी में खिलवाऊं, बढ़ो चढ़ो तोहे फाग रे जैसे गीत होंगे। रंग रंगेश्वर मंदिर से धमेंद्र अग्रवाल ने बताया की बाहर से नफरी बुलाई जाती है। उसके द्वारा रसिया मेरी चुनरी में लग गयो दाग, दैया रे पिचकारी मार गयो, मेरो खोए गयो बाजूबंद गाए जाते हैं। समय के साथ बदला स्वरूप लक्ष्मी नारायण मंदिर से बुजुर्ग राजेंद्र कुमार मुनीम जी, विशन चंद वार्ष्णेय ने बताया कि तीस सालों में होली में अंतर आ गया है। पहले केमिकल के रंगों से कोई होली नहीं खेलता था। गुलाल का प्रचलन था। इससे भी ज्यादा प्रचलन टेसू के फूलों की होली का हुआ करता था। तीन दिन पहले ही फूलों को भिगों कर रख दिया जाता था। इसके बाद लक्ष्मी नारायण मंदिर के पुजारी पं. नन्नू मल शर्मा डोले पर पिचकारी भरकर लोगों पर बौछार करते थे। मंदिरों का इतिहास.......... डूंगरमल ने शर्त पूरी करके कराया था लक्ष्मी नारायण मंदिर का निर्माण अलीगढ़। इस मंदिर का इतिहास 100 साल पुराना है। यहां लक्ष्मीजी के साथ भगवान विष्णु विराजमान हैं। रोजाना सैकड़ों की संख्या में भक्त यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। मेला संयोजक मनोज यादव ने बताया कि मंदिर का निर्माण सेठ डूंगरमल ने कराया था। बताया जाता है कि मंदिर की जगह पर एक महात्मा रहा करते थे। डूंगरमल ने उनसे यह स्थान छोडऩे को कहा। इस पर महात्मा ने कहा कि वह इसी शर्त पर यह स्थान छोड़ सकते हैं कि यहां पर मंदिर की स्थापना की जाए। इस पर डूंगरमल राजी हो गए और उन्होंने विशाल लक्ष्मी नारायण मंदिर की स्थापना कराई। मंदिर आजादी के समय से भी पहले का है। यहां रंगभरनी एकादशी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। पहले सभी भगवान से होली खेलते हैं, फिर प्रभु दर्शन के लिए नगर भ्रमण करते हैं। दूर-दराज से भी लोग यहां होली खेलने आते हैं। जब डोला निकलता है तो उसकी सुंदरता देखते ही बनती है। 190 वर्ष पुराना इतिहास है मुरली मनोहर मंदिर का महंत श्रीजी पुरोहित ने बताया कि मुरली मनोहर मंदिर को 190 वर्ष पहले कायस्थ समाज के एक जमींदार ने पुत्र प्राप्ति होने पर बनवाया था। मंदिर निर्माण कराने के बाद पं. जुगल किशोर पुरोहित को जिम्मेदारी सौंपी। तब से इनकी पीढ़ी इस मंदिर पर सेवा कर रही है। वर्तमान मंहत सातवीं पीढ़ी के रूप में सेवा कर रहे हैं। मुख्य महंत इनके पिता सतीश कुमार वशिष्ठ हैं। महंत के मुताबिक मंदिर रामा नंदी संप्रदाय से संबंधित है। इसके संरक्षक राम जन्म भूमि व कृष्ण जन्म भूमि के अध्यक्ष महंत नित्य गोपाल दास महाराज हैं। 200 साल पुराना है जयगंज के द्वारिकाधीश का इतिहास, द्वारिकाधीश जी महाराज समिति के सेवादार कन्हैया वार्ष्णेय ने बताया कि द्वारिकाधीश महाराज मंदिर का इतिहास 200 साल पुराना है। मंदिर का निर्माण बद्री प्रसाद ने करवाया था। आजादी से पहले का इतिहास समेटे हुए मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। मंदिर में द्वारिकाधीश महाराज के साथ ही राधा-कृष्ण भी विराजमान हैं। आजादी से पहले कई बार अंग्रेजों ने रंगभरनी एकादशी उत्सव को रोकने की कोशिश की। मगर भक्तों के उल्लास को देखते हुए वह ऐसा नहीं कर सके। पूरे शहर से यहां लोग रंगभरनी एकादशी पर जुटते हैं। प्रभु को रंगने के लिए पूरा जयगंज उमड़ पड़ता है। आनंद के रंग में हर कोई रंग उठता है। रंग भरनी एकादशी पर जयगंज में होली की धूम रहती है। सभी भक्त डोले के साथ-साथ अबीर-गुलाल उड़ाते हुए नाचते-झूमते सभी को होली की शुभकामनाएं देते हैं। वर्जन तीस साल पहले अलग ही दौर था जब होली पर टेसू के फूलों की बड़ी भूमिका होती थी। बाजार में उन फूलों का रंग छाया रहता था। अब रंगों ने उनका स्थान ले लिया है। राजेंद्र कुमार पहले डोले से टेसू के फूलों का पानी पिचकारी में भरकर श्रद्धालुओं पर मारी जाती थी। अब गुलाल की बौछार की जाती है। इसका भी आनंद है। विशन चंद वार्ष्णेय होली पर अलग ही नजारा होता है। चारों तरफ गुलाल ही गुलाल उड़ता हुआ नजर आता है। लोग आपस में एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं। धर्मेंद्र अग्रवाल होली का शुभारंभ मंदिर से ही शुरु हो जाता है। पूजन के बाद से लोग एक दूसरे पर गुलाल डालना शुरु कर देते हैं। ब्रज की झलक दिखाई देती है। हरपाल सिंह यादव जयगंज को मंदिरों की नगरी कहा जाता है। मुख्य मंदिरों से निकलने वाले डोलों को देखने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है। मनोज सत्या ऐसा नजारा अलीगढ़ में और कहीं देखने को नहीं मिलता। अलीगढ़ से बाहर रहने वाले लोग भी रंग भरनी एकादशी पर शहर में आ जाते हैं। उमेश सक्सेना मुरली मनोहर मंदिर पर भव्य आयोजन किया गया है। ठाकुर जी का पूजन अर्चन किया जाएगा। इसके बाद होली का शुभारंभ होगा। मनोज यादव होली का पर्व आपसी भाई चारे का त्योहार है। जयगंज से निकलने वाली शोभायात्रा इसकी जीती जागती मिसाल है। सर्व धर्म शामिल होते हैं। डॉ. रजत सक्सेना द्वारिकाधीश मंदिर से भी डोला निकाला जाता है। शोभायात्रा में मंदिरों के डोले एक के पीछे एक चलते हैं। इनके साथ हजारों की भीड़ होती है। कन्हैया वार्ष्णेय पहले टेसू के फूलों की होली होती थी, अब केमिकल रंगों ने उसकी जगह ले ली। हम आज भी गुलाल की होली कर परंपराएं निभा रहे हैं। यतेंद्र अलीगढ़ की होली सामाजिक एकता और सौहार्द का प्रतीक है। यहां पर होली सिर्फ दोस्तों के साथ ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के साथ मनाई जाती थी। योगेंद्र वार्ष्णेय रंग भरनी एकादशी को लेकर जयगंज में पहले से योजना बनाई जाती है। बाजार के लोग भी इस कार्यक्रम में सहभागिता करते हैं। देवांशु वार्ष्णेय इस शोभायात्रा में इतना गुलाल होता है कि कोई बच ही नहीं सकता। कोई इसका बुरा भी नहीं मानता क्यों कि सभी को पता है रंग तो होना ही है। अंकित वार्ष्णेय मंदिर में रंग भरनी एकादशी को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिर को लाइट और फूलों से सजाया गया है। ठाकुर जी को श्वेत वस्त्र, गुलाबी पगड़ी पहनाई जाएगी। श्रीजी पुरोहित, महंत श्री मुरली मनोहर मंदिर

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