समिति बनीं न बैठकें हुई, जर्जर बसों में सफर करते बच्चे

Newswrap हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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Aligarh News - स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर जनपद में केवल टालमटोल, जिला प्रशासन से लेकर संबंधित विभाग तक एक दूसरे पर टाल रहे मामला

समिति बनीं न बैठकें हुई, जर्जर बसों में सफर करते बच्चे

अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। कंडम स्कूली वाहनों से ढोए जा रहे बच्चों को लेकर सरकारी मशीनरी से लेकर समितियां व अभिभावक संजीदा नहीं हैं। निगरानी के लिए विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन होना चाहिए, लेकिन यह काम नहीं हुआ। इस समिति की जिम्मेदारी होती है वह सभी मामलों की निगरानी करे। लेकिन जनपद मे ऐसा नहीं हो रहा है। प्रशासन से लेकर संबंधित महकमे एक दूसरे पर जिम्मेदारियों को टाल रहे हैं। टालमटोल नौनिहालों पर भारी पड़ रही है। इससे उनको जान से हाथ धोना पड़ रहा है। चंद कमाई के लिए स्कूल प्रबंधन, एजेंसियां व सरकारी महकमे संज्ञान नहीं लेते हैं और बच्चों की जान खतरे में रहती है। सड़क सुरक्षा समिति का गठन हुआ है उसकी बैठकें होते हैं, लेकिन वह हादसे रोकने में नाकाम हैं। इसी तरह विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन किया जाना चाहिए। स्कूली वाहनों पर निगरानी रखनी चाहिए। जनपद में लगातार स्कूली वाहनों से हादसे हो रहे हैं। पहले बस की फर्श टूटने के कारण अनन्या नाम की बच्ची काल के गाल में समा गई थी। इसके बाद भी लगातार हादसे हुए। प्रशासन केवल आदेश जारी करने तक ही सीमित है। आदेश का पालन शिक्षा, परिवहन व स्कूल प्रबंधन नहीं करते हैं। विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति गठित करने के लिए प्रशासन की ओर से आदेश जारी किया गया है। ऐसा वहां से बताया गया, लेकिन अभी तक समिति का कोई अता पता नहीं हैं। सड़क पर कंडम बसें दौड़ रही हैं और जानलेवा साबित हो रही हैं। लेकिन इसके बाद भी महकमों का ध्यान इधर नहीं है। संभागीय परिवहन विभाग केवल चालान काटने तक सीमित है。

अनफिट बसों का संचालन लगा रहा प्रश्न चिन्ह

संभागीय परिवहन विभाग में वाहनों के संचालन व नियंत्रण के लिए आरटीओ प्रवर्तन, एआरटीओ प्रवर्तन व पीटीओ की तैनाती रहती है। बसें अनफिट सड़क पर मिलें तो उनको सीज किया जाए। बसें रिकार्ड के मुताबिक अनफिट हो चुकी हैं तो उनको नोटिस जारी कर फिटनेस पूरी कराई जाए। यह प्रक्रिया संभागीय परिवहन विभाग के आरआई की होती है। लेकिन आरआई को यही नहीं पता होता है कि उन्होंने कितनी बसों को फिटनेस जारी कर दिया है। दूसरी ओर पुलिस व ट्रैफिक विभाग भी कंडम वाहनों पर ध्यान नहीं देते हैं। ट्रैफिक पुलिस का भी बड़ा योगदान इसमें रहता है। जिला विद्यालय निरीक्षक व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्कूल सत्र शुरू होने से लेकर बंद होने तक इस पर कोई ध्यान नहीं देते हैं।

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विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं...

जर्जर व कंडम बसों से ढोए जा रहे बच्चों को लेकर कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। सभी एक दूसरे पर जिम्मेदारियों को टाल रहे हैं। संभागीय परिवहन विभाग केवल चालान व वाहनों को सीज करने की दुहाई देता है। प्रशासनिक अफसर आदेश जारी करने तक सीमित हैं। स्कूल प्रबंधन को केवल अपनी फीस से मतलब है। जबकि स्कूलों के भीतर से बसों का संचालन हो रहा है। अप्रत्यक्ष रूप से वह जुड़े हैं, लेकिन जिम्मेदारी नहीं ओढ़ना चाहते हैं। समिति का गठन अनिवार्य लेकिन उसको लेकर भी यहां पर भ्रम की स्थिति साफ दिखाई दे रही है।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर: जिलाधिकारी

डीएम अविनाश कुमार ने बताया कि समय समय पर सुरक्षा को लेकर समीक्षा की जाती है। परिवहन, पुलिस एवं शिक्षा विभाग को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर जर्जर एवं मानक विहीन वाहनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय स्तर पर परिवहन सुरक्षा समिति का गठन एवं नियमित बैठकें अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराई जाएंगी। सभी विद्यालयों को वाहनों की फिटनेस, चालक सत्यापन एवं सुरक्षा मानकों का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बोले जिम्मेदार

एसएसआई उपेंद्र मलिक ने बताया कि उन्हें थाना क्षेत्र के स्कूलों में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति के बारे में विशेष जानकारी नहीं है। क्योंकि इस तरह की किसी बैठक में जाने का मौका नहीं मिला।

बरला थाना प्रभारी सुशील कुमार ने बताया कि उन्हें विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वह किसी भी स्कूल की ऐसी किसी समिति में शामिल नहीं हैं। ​

एसबीएस स्कूल के प्रबंधक विनय कुमार ने बताया कि स्कूल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी कमेटी गठन के बाद भी नहीं हुई बैठक। स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गठित स्कूल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी कमेटी का नया स्वरूप लागू होने के बावजूद अभी तक बैठक आयोजित नहीं हो सकी है। पहले यह बैठकें केवल प्रधानाचार्य स्तर पर ही आयोजित हो जाती थीं, लेकिन नए नियमों के तहत अब संबंधित थाना और तहसील स्तर से एक-एक प्रतिनिधि का शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है।

विद्यालयों में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन किया गया है। जो विद्यालय शेष रह गए हैं, उनमें कार्य प्रगति पर है। जल्द ही समितियों को प्रशिक्षण भी संभागीय परिवहन विभाग द्वारा दिया जाएगा। डॉ. राकेश सिंह, बीएसए अलीगढ़

सामान्य प्रश्न

क्या विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन हुआ है?
विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन किया गया है, लेकिन अभी तक समिति का कोई अता पता नहीं हैं।

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