
न कट, न सर्जरी, लीडलेस पेसमेकर से धड़का दिल
Aligarh News - - अलीगढ़ में पहली इस प्रकार का का पहला प्रत्यारोपण, कुछ ही घंटे में मरीज स्वस्थ
अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। न कट न सर्जरी फिर भी पेस मेकर से दिल धड़कने लगा। ऐसा कारनामा जेएनएमसी के हृदय रोग विभाग ने कर दिखाया है। हृदय रोग विभाग ने बिना सर्जरी लीड लेस पेसमेकर प्रत्योरापण सफलतापूर्वक कर लिया है। दिल के उपचार में एएमयू जेएन मेडिकल कॉलेज नित नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसी क्रम में हृदय रोग विभाग के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मोहम्मद रफ़ी अनवर ने लीड लेस पेसमेकर का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। जेएनएमसी में यह प्रत्यारोपण 31 दिसंबर को की गई। यह उपलब्धि न केवल अस्पताल बल्कि पूरे अलीगढ़ और आसपास के जिलों के मरीजों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आई है।
इस प्रत्यारोपण को मात्र 25 मिनट के अंदर पूरा कर लिया गया। जिसे जांघ की नसों के द्वारा दिल के अंदर ही स्थापित कर लिया गया। जिसका वजन मात्र 1.75 ग्राम है। आम पेसमेकर का प्रत्यारोपण दर्द भरा डॉ. मोहम्मद रफ़ी अनवर ने बताया कि आम पेसमेकर लगाने की प्रक्रिया जटिल और दर्द भरा है। आमतौर पर पेसमेकर में छाती में कट लगाकर मशीन लगाई जाती है। कटकर दिल तक तारें (लीड्स) डाली जाती हैं, जबकि माइक्रा लीडलेस पेसमेकर में ऐसा नहीं होता है। यह बेहद ही न्यून उपकरण है। जिसे पैर की नस (फेमोरल वेन) के माध्यम से सीधे दिल के अंदर स्थापित किया जाता है। इस विधि में संक्रमण का खतरा नहीं लीडलेस पेसमेकर की प्रक्रिया में संक्रमण का खतरा नहीं होता है। न ही मरीज को दर्द, शरीर पर कोई बाहरी निशान नहीं और रिकवरी भी तेज़ होती है। लीडलेस पेसमेकर खासतौर पर बुजुर्ग मरीजों, बार-बार संक्रमण की आशंका वाले रोगियों, नसों में समस्या वाले मरीजों तथा उन लोगों के लिए लाभकारी है, जिन्हें पहले पारंपरिक पेसमेकर से परेशानी हो चुकी हो। अभी तक यह सुविधा दिल्ली जैसे महानगरों में थी। अब अलीगढ़ में इस लीड लेस पेसमेकर लगाने की सुविधा मेडिकल में उपलब्ध है। इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें - बार-बार चक्कर आना या बेहोशी - दिल की धड़कन का बहुत धीमा हो जाना - बिना कारण अत्यधिक थकान - सांस फूलना या कमजोरी महसूस होना - पहले लगाए गए पेसमेकर में संक्रमण या समस्या वर्जन सामान्य पेसमेकर की तुलना में यह पेसमेकर लाभकारी है। माइक्रो साइज होने की वजह से दिल के अंदर ही स्थापित हो जाता है। न ही सीने में कोई कट या सर्जरी करने की आवश्यकता होती है। डा. मो. रफी अनवर, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, जेएनएमसी

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