जर्जर व असुरक्षित बड़े भवनों की सूरत बदलेगा एडीए
Aligarh News - शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के लागू होने से कराए जाएंगे कार्य, मुंबई, गुजरात, एमपी व तमिलनाडु की तर्ज पर प्राधिकरण क्षेत्र में होंगे काम

अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। जिले में जर्जर-असुरक्षित बड़े भवनों की अब सूरत बदलेगी। उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के अर्न्तगत एडीए ऐसे भवनों का पुर्ननिर्माण कराएगा। मुंबई, गुजरात, एमपी व तमिलनाडु की तर्ज पर न्यूनतम 1500 वर्गमीटर भूमि पर 25 वर्ष से अधिक पुराने निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों, स्मारकों का नए सिरे से विकास किया जाएगा। जर्जर सरकारी आवासों, पुरानी हाउसिंग सोसाइटियों तथा अतिक्रमण प्रभावित क्षेत्रों को पुनर्विकास में प्राथमिकता मिलेगी। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से बीते दिनों निर्देश जारी किए गए थे। नीति के अनुसार हेरिटेज, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित भवन आदि नीति के दायरे से बाहर रहेंगे।
किसी पुरानी हाउसिंग सोसाइटी या अपार्टमेंट के पुनर्विकास के लिए न्यूनतम दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। अधिकतम पांच वर्ष में कार्य पूरा किया जा सकेगा। सोसाइटी को डीपीआर की मंजूरी से अधिकतम 60 दिनों में योजना स्थल को खाली करना होगा। कार्यदायी संस्था को लाभार्थियों को निशुल्क रहने की व्यवस्था या किराया देना होगा। पुनर्विकसित भवनों में दो वर्षों तक कोई कमी होने पर संबंधित कार्यदायी संस्था को उसे ठीक कराना होगा। योजना के अनुश्रवण व विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए राज्य स्तर पर आवास बंधु को नोडल एजेंसी बनाया गया है। एडीए ने सारसौल स्थित कांशीराम आवास योजना में बने आवासों को चिन्हित किया है। यहां बने आवासों को पुनर्विकास कराया जाएगा।0-एडीए की अन्य योजनाओं में भी चिन्हित होंगे भवनएडीए की अन्य योजनाओं में भी पुराने व जर्जर भवनों को चिन्हित किया जा रहा है। इन सभी आवास के पुनर्विकास के लिए आवंटियों की सहमति ली जाएगी।0-वर्जनउत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के तहत पुराने व जर्जर भवनों को पुनर्विकास कराया जाएगा। कांशीराम आवास नीति के अर्न्तगत चुने गए हैं।-कुलदीप मीणा, एडीए वीसी
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