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हमारा आर्थिक भविष्य ही नहीं, राष्ट्र के रुप में आत्मा भी दांव पर: रघुराम राजन

हमारा आर्थिक भविष्य ही नहीं, राष्ट्र के रुप में आत्मा भी दांव पर: रघुराम राजन -एएमयू साहित्य महोत्सव में आयेाजित हुआ वर्चुअल समारोह फोटो- अलीगढ़।...

हमारा आर्थिक भविष्य ही नहीं, राष्ट्र के रुप में आत्मा भी दांव पर: रघुराम राजन
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,अलीगढ़Sat, 21 May 2022 10:30 PM

-एएमयू साहित्य महोत्सव में आयेाजित हुआ वर्चुअल समारोह

फोटो-

अलीगढ़। कार्यालय संवाददाता।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि हमारा आर्थिक भविष्य ही नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के रूप में हमारी आत्मा भी दांव पर है।

एएमयू में चल रहे साहित्य महोत्सव मे रघुराम राजन का आभासी व्याख्यान हुआ। उन्होंने भारतीय विकास के लिए उदार लोकतंत्र क्यों आवश्यक है विषय पर विचार रखे। कहा कि न केवल हमारा आर्थिक भविष्य दांव पर है बल्कि एक राष्ट्र के रूप में हमारी आत्मा भी है। उनके भाषण की जड़ देश में विनिर्माण क्षेत्र के नेतृत्व वाले विकास के विकल्प के रूप में उदार लोकतंत्र और सेवा क्षेत्र के नेतृत्व वाले विकास के विचार पर टिकी रही। पैनल का प्रश्नोत्तर सत्र के साथ समापन हुआ। जिसमें दर्शकों ने कई प्रासंगिक विषयों पर प्रश्न पूछे। वर्चुअल कार्यक्रम में देबदित्य भट्टाचार्य, प्रोफेसर, काजी नजरूल विश्वविद्यालय, दिशा नवानी ने शिक्षा के रूप में मुक्ति: बयानबाजी बनाम वास्तविकता विषय पर बुद्धिजीवियों ने विचार रखे। एएमयू के 100 साल: क्रांति और कायाकल्प विषय पर एक पैनल चर्चा हुई। प्रोफेसर फायजा अब्बासी, आतिफ हनीफ, एएमयू पीआरओ उमर पीरजादा, अता खुर्शीद आदि ने विचार रखे। फिल्म निर्माता उर्दू कवि गौहर रज़ा द्वारा कला और प्रतिरोध पर व्याख्यान में उन्होंने कला के बारे में प्रतिरोध और क्रांति के रूप में बात की। रज़ा ने साहित्य के लिए साहित्य और परिवर्तन के लिए साहित्य के लिए साहित्य के विभाजन की बात की। डिफाटिंग एनालिसिस पैरालिसिस: फाइंडिंग योर वॉयस विषय पर भी चर्चा हुई।

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