वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने वाले महापाप के भागीदार

Apr 08, 2026 11:57 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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Aligarh News - यूपी से शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौ. इब्राहिम हुसैन ने जारी किया फतवा

वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने वाले महापाप के भागीदार

अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने वाले गुनाह-ए-कबीरा यानि महापाप के भागीदार हैं। ऐसा करने वाले आखिरत (परलोक) में सजा पाएंगे और जहन्नुम के हकदार होंगे। यह बातें यूपी के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन ने बुधवार को वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को लेकर फतवा (शरई राय) जारी करते हुए कहीं। मुफ्ती ने सरकार को भी अधिकार दिया है कि वह ऐसी संपत्तियों की जांच कर उन्हें जनहित में वापस ले। ​मुफ्ती इब्राहिम हुसैन ने कुरआन की सूरह अन-निसा और सूरह अल-बकरा का हवाला देते हुए कहा कि अमानत को उसके हकदारों तक पहुंचाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, लाखों बीघा वक्फ जायदाद पर कुछ लोग कुंडली मारकर बैठे हैं और निजी लाभ कमा रहे हैं।

यह गरीबों और यतीमों का हक मारना है। जो लोग वक्फ संपत्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं, वे अल्लाह और उसके रसूल के खिलाफ जंग के लिए तैयार हो जाएं। सरकार से अपील है कि सार्वजनिक हित में इसका इस्तेमाल हो। वक्फ संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाए जाएं। जो वक्फ फासिद (दोषपूर्ण) साबित हों, उन्हें निरस्त किया जाए। इन संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण में लेकर चैरिटी, वेलफेयर और सामाजिक न्याय के लिए इस्तेमाल किया जाए।​0-फतवे की 5 बड़ी बातें:​जहन्नुम की चेतावनी: वक्फ संपत्ति में खयानत करने वाले आखिरत (परलोक) में सख्त सजा पाएंगे और जहन्नुम के हकदार होंगे।​हराम कमाई: वक्फ की जमीन बेचकर या निजी लाभ लेकर की गई कमाई पूरी तरह 'हराम' है। ऐसे लोगों को तुरंत तौबा कर संपत्ति वापस करनी चाहिए।​फासिद वक्फ: अगर वक्फ धोखे से किया गया है या उसका मालिकाना हक स्पष्ट नहीं है, तो शरीयत में उसे फासिद (अवैध) माना जाएगा।​सरकार का अधिकार: शरीयत के फिक्ही उसूल के तहत हाकिम-ए-वक्त (सरकार) को यह अधिकार है कि वह दुरुपयोग हो रही संपत्तियों की जांच करे और उन्हें वापस लेकर जनहित में लगाए।​बिना भेदभाव लाभ: मुफ्ती ने कहा कि वक्फ का लाभ बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के समाज के सबसे गरीब, यतीम और जरूरतमंद तबके तक पहुंचना चाहिए।​0-कौन हैं मौलाना इब्राहिम हुसैन​मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन अलीगढ़ से ताल्लुक रखते हैं। वे बीए-एलएलबी, एमए और पेशे से अधिवक्ता भी हैं। उन्हें सितंबर 2005 में मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के वंशज प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुसी द्वारा शाही मुफ्ती नियुक्त किया गया था। वर्तमान में वे भारतीय समाज सेवक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

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