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कार्तिक पूर्णिमा पर मंदिरों में बहेगी भक्ति की बयार

कार्तिक पूर्णिमा पर मंदिरों में बहेगी भक्ति की बयार

संक्षेप:

Aligarh News - मंदिरों में और घरों में देव दिवाली पर होंगे दीपदान, मार्गशीर्ष में भगवान विष्णु और उनके शंख की होगी पूजा

Nov 05, 2025 12:11 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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अलीगढ़, कार्यालय संवाददाता। शहर के विभिन्न मंदिरों में आज कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भक्ति की बयार बहेगी। मंदिरों में देव दिवाली पर भव्य दीप दान के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इस दौरान अचल सरोवर एक लाख से अधिक दीपकों की रोशनी में नहाएगा। साथ ही मार्गशीर्ष माह शुरु होने पर मंदिरों में सुबह और संध्या काल आरती के समय के साथ भोग-प्रसादी में भी बदलाव शुरु हो जाएगा। अचल सरोवर पर विभिन्न संगठनों द्वारा दीपदान किया जाता है। पूरे अचल पर दीपकों की लाइन नजर आएगी। इसको लेकर मंगवार को ही तैयारियां पूरी कर ली गई। सरोवर पर लाइट की व्यवस्था की गई है।

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साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा मुख्य मंदिर गिलहराज मंदिर में एक लाख इक्कीस हज़ार एक सौ इक्कीस दीपों से दीपदान होगा। शाम 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। प्रभु राम की पालकी के स्वागत के साथ शाम 6:30 बजे एक साथ सभी दीप जलाए जाएंगे। साथ ही शाम 6:45 बजे पर गिलहराज जी मंदिर के महाआरती घाट से बाबा महाकाल की महाआरती बनारस की तर्ज पर होगी। इसके साथ प्राचीन सिद्धपीठ गणेश मंदिर में के द्वारा आस पास के एक दर्जन से अधिक मंदिरों में दीपदान किया जाएगा। इसके अलावा संस्कार भारती महानगर के द्वारा अचल सरोवर पर शाम 5 बजे से देव दिवाली मनाई जाएगा। आकर्षक रंगोली के साथ भजन संध्या का आयोजन होगा। मार्गशीर्ष माह में होते हैं बदलाव मार्गशीर्ष मास में पूजा पद्धति में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी की पूजा पर जोर दिया जाता है। इस माह में पवित्र नदी में स्नान और दान का बहुत महत्व है। इसके अलावा, विष्णु सहस्रनाम, भगवद गीता का पाठ किया जाता है। मार्गशीर्ष महीने के महत्व को लेकर स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज ने बताया कि इस महीने को जप, तप और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं। मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से युक्त होती है, इसलिए इस माह को मार्गशीर्ष कहा जाता है। सतयुग में देवों ने वर्ष का आरंभ मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही किया था। साथ ही ऋषि कश्यप ने भी इसी महीने के दौरान कश्मीर नामक जगह की स्थापना की थी। यमुना में स्नान के साथ इस महीने में स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। इस मौसम में शीतलहर शुरु हो जाती है। अत: गर्म कपड़े, कंबल, मौसमी फल, शैया, भोजन और अन्नदान का विशेष महत्व है। अगहन के महीने में श्रीकृष्ण का ध्यान और उपासना करने पर सभी पापों से मुक्ति मिलती है। स्कंदपुराण के अनुसार, भगवान की कृपा प्राप्त करने की कामना रखने वाले श्रद्धालुओं को अगहन मास में धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए। ये परिवर्तन का महीना हैं इसी महीने से देवता एवं मंदिरो के पट खुलने और बंद होने का समय परिवर्तित होता हैं। चातुर्मास (आषाढ़ मास से कार्तिक मास तक) में साधु सन्यासियों पर यात्रा करने का प्रतिवंध रहता हैं। एक हीं स्थान पर भजन पूजन कर समाज को धर्म से जोड़ कर मार्गदर्शित करते हैं। जो कि मार्कशीर्ष महीने मेंसभी प्रतिबंधो से मुक्त होकर पुरे विश्व को सनातन धर्म की मुख्य धारा से जोड़ते हैं। वर्जन मार्गशीर्ष मास में मंदिर की आरती का समय बदल गया है। आरती के समय के अलावा भोग प्रसादी में भी बदलाव होगा। मूंगफली, बादाम, पिस्ता का भोग लगेगा। मनोज मिश्रा, महंत श्री वार्ष्णेय मंदिर मंदिर में सूर्योदय और सूर्यास्त के हिसाब से आरती होती है। कन्हैया की आठ बार आरती की जाती है। प्रसादी में गर्म वस्तुओं का प्रयोग होगा। भगवान को गर्म कपड़े पहनाए जाएंगे। महेश चंद व्यास, महंत श्री मंगलेश्वर महादेव मंदिर मंदिर में आरती का समय सुबह चार से साढ़े चार कर दिया गया है। शाम की आरती साढ़े छह से बदल कर छह बजे होगी। बाबा की प्रसादी में अब से बाजरे की रोटी शामिल हो जाएगी। प्रहलाद गिरी, महंत, श्री खेरेश्वर धाम ये महीना जप, तप और ध्यान के लिए सर्वोत्तम है। अगहन के महीने में श्रीकृष्ण का ध्यान और उपासना करने पर सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साधु सन्यासियों की यात्रा से प्रतिबंध हटता है। स्वामी पूर्णानंद पुरी महाराज, प्रमुख, वैदिक ज्योतिष संस्थान