
बैंक और एलआईसी कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
Aligarh News - बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने वाला बीमा संशोधन विधेयक सामाजिक सुरक्षा, श्रमिक अधिकारों और आर्थिक संप्रभुता पर हमला है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए, क्योंकि यह सार्वजनिक संस्थाओं को हाशिये पर डाल देगा और रोजगार के सुरक्षित स्वरूपों को खतरे में डालेगा।
अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने वाला बीमा संशोधन विधेयक देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिक अधिकारों और आर्थिक संप्रभुता पर सीधा हमला है। ट्रेड यूनियनों का स्पष्ट मत है कि इस विधेयक को किसी भी रूप में संशोधित नहीं, बल्कि पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए। जिला सयोजक, जिला मंत्री प्रदीप चौहान ने कहा कि बीमा कोई सामान्य व्यापारिक वस्तु नहीं है, बल्कि यह जीवन, स्वास्थ्य, वृद्धावस्था और रोज़गार सुरक्षा से जुड़ा हुआ एक सामाजिक दायित्व है। 100% एफडीआई की अनुमति का अर्थ बीमा क्षेत्र को पूरी तरह मुनाफ़े के तर्क के अधीन कर देना है, जिससे ग्रामीण, गरीब और उच्च जोखिम वाले वर्गों की उपेक्षा तय है।
ललित शर्मा ने चेतावनी दी कि विदेशी पूंजी के पूर्ण नियंत्रण से सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं जैसे एलआईसी और जीआईसी हाशिये पर चली जाएंगी, जिससे सार्वजनिक नियंत्रण समाप्त होगा। नीति-निर्माण पर कॉरपोरेट दबाव बढ़ेगा। इसका सीधा असर रोज़गार पर पड़ेगा और स्थायी नौकरियों की जगह ठेका, गिग और असुरक्षित काम को बढ़ावा मिलेगा। ट्रेड यूनियनों ने यह भी कहा कि यह विधेयक जीवन और मृत्यु के वित्तीयकरण को बढ़ावा देता है, जहां पॉलिसीधारकों के हितों से अधिक शेयरधारकों के मुनाफ़े को प्राथमिकता दी जाएगी। मज़दूरों और आम जनता की बचतों को वैश्विक बाज़ारों के जोखिम के हवाले करना किसी भी तरह से राष्ट्रीय हित में नहीं है। सभी ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से सरकार से इस विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग की है। मज़दूर वर्ग व आम जनता से इसके खिलाफ़ संगठित संघर्ष तेज़ करने का आह्वान किया है।

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