श्रवण शक्ति प्रभावित कर रहा इयरबड्स-डीजे का शोर
Aligarh News - ईएनटी ओपीडी में 30 प्रतिशत मरीजों की सुनने की क्षमता प्रभावित, 80 डेसिबल से ऊपर का शोर दिल और नर्वस सिस्टम पर भारी

(विश्व श्रवण दिवस) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। मोबाइल और संगीत का बढ़ता शौक अब युवाओं की सेहत पर सीधा असर डाल रहा है। जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग की ओपीडी में इन दिनों बड़ी संख्या में ऐसे युवा पहुंच रहे हैं, जिन्हें कम सुनाई देने, कान में घंटी बजने (टिनिटस) और सिरदर्द की शिकायत है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कान की बीमारी से आने वाले करीब 30 प्रतिशत मरीजों में सुनने की क्षमता प्रभावित पाई जा रही है। इनमें बड़ी संख्या नियमित रूप से इयरबड्स इस्तेमाल करने वालों की है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. नीरज गुप्ता के अनुसार, लगातार ऊंची आवाज में इयरबड्स लगाने से कान के अंदर मौजूद सूक्ष्म हेयर सेल्स और सुनने वाली नसें प्रभावित होती हैं।
एक बार ये सेल्स नष्ट हो जाएं तो दोबारा विकसित नहीं होते। कई युवा 90 से 100 डेसिबल तक की आवाज घंटों सुनते हैं, जो बेहद खतरनाक है। उन्होंने बताया कि सामान्य बातचीत की ध्वनि लगभग 60 डेसिबल होती है, जबकि 85 डेसिबल से अधिक शोर लंबे समय तक सुनना स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। युवाओं को 60-60 नियम अपनाने की सलाह दी जाती है, अधिकतम 60 प्रतिशत वॉल्यूम पर दिन में 60 मिनट से ज्यादा इयरबड्स का उपयोग न करें। शोरगुल वाले आयोजनों में ईयरप्लग का इस्तेमाल करें। यदि कान में घंटी बजने, कम सुनाई देने या दिल की धड़कन तेज होने जैसी शिकायत हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। ..... डीजे से बढ़ रहीं धड़कनें सिर्फ इयरबड्स ही नहीं, डीजे का तेज शोर भी युवाओं के लिए खतरा बनता जा रहा है। चिकित्सकों के पास ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें तेज डीजे के बाद दिल की धड़कन बढ़ने, घबराहट और सीने में दर्द की शिकायत हुई। दीनदयाल अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सिंघल कहते हैं कि 80 डेसिबल से अधिक शोर दिल और नर्वस सिस्टम पर दबाव डालता है। तेज ध्वनि से शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन बढ़ता है, जिससे रक्तचाप और हृदय गति अनियंत्रित हो सकती है। इसकी अनदेखी करने पर हार्ट फेल तक का खतरा बढ़ जाता है।
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