
प्रकाश उत्सव में गुरु गोविंद सिंह की शौर्य गाथा ने भरा जोश
Aligarh News - बाबा दीप सिंह पंजाबी क्वार्टर में हुआ आयोजन, शबद कीर्तन में संगतों को किया गया निहाल
अलीगढ़, कार्यालय संवाददाता। गुरुद्वारा शहीद धन धन बाबा दीप सिंह पंजाबी क्वार्टर गुरुद्वारे में सोमवार को गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में शबद कीर्तन का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान संगतों को गुरु की शौर्य गाथा बताई गई। सरदार वीरेंद्र सिंह, जत्थेदार भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह धर्म, न्याय और बलिदान की मिसाल हैं। उनका जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब में गुरु तेग बहादुर के यहां हुआ था। पीर भीकम शाह मुस्लिम फकीर ने गुरु साहब को सजदा किया था। गुरु गोविंद सिंह जी ने अपनी उम्र में 14 जंग लड़ी और 14 ही विजय प्राप्त कीं।
वह बहुत अच्छे कवि भी थे। वह अपने तीरों पर एक-एक तोला सोना लगवाते थे, ताकि यदि कोई सैनिक उनके तीर से घायल हो, तो उस सोने का इस्तेमाल उसके इलाज या अंतिम संस्कार के लिए हो सके, और यह उनकी दया और दुश्मनों के प्रति भी मानवता का प्रतीक था। उन्होंने अपने पिता गुरु तेग बहादुर, माता गुजरी, और अपने चारों पुत्रों अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह, फतेह सिंह के बलिदान दिए। दो बड़े साहबजादे चमकौर की जंग में लड़ाई लड़ते हुए शहीद हो गए। उनके नन्हे साहिबजादों जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया, लेकिन उन्होंने धर्म नहीं छोड़ा। इस दौरान लंगर अटूट बरता गया। इस महान बलिदान के कारण उन्हें सरबंसदानी कहा जाता है। इस अवसर पर सरदार राजेंद्र सिंह ने संतो को बधाई दी। हरदीप सिंह जुनेजा, गुरदीप सिंह, तेजपाल सिंह, दलजीत सिंह, गुरविंदर सिंह, हरविंदर सिंह उपस्थित रहे।

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