
आयुष्मान योजना में जालसाजों का ‘फर्जी खेल’
Aligarh News - अस्पतालों में पकड़े गए तीन सौ से अधिक फर्जी आयुष्मान कार्ड रद, पांच-10 हजार में ‘फर्जी कार्ड’, असली मरीजों को नहीं मिल रहा हक
अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। गरीब परिवार इलाज की आस में जब अस्पताल की चौखट पर पहुंचता है तो हाथ में ‘फर्जी आयुष्मान कार्ड’ देखकर उम्मीदें टूट जाती हैं। जिन पैसों से दवा खरीदी जानी थी, वो ठगों की जेब में जा चुके होते हैं। अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग कार्ड रद करने की बात तो करता है, मगर असली गुनहगार तक कोई जांच नहीं पहुंचती। यही कारण है कि ठगी का ये सिलसिला बेरोकटोक जारी है। अस्पतालों में पकड़े गए तीन सौ से अधिक कार्ड रद हो चुके हैं। ये कार्ड किन जालसाजों ने बनाए, इसकी जांच अब तक न हुई। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मिलने वाला आयुष्मान कार्ड गरीबों के लिए वरदान माना जाता है, लेकिन अब यह ठगों के लिए भी ‘कमाई का जरिया’ बन गया है।

सासनीगेट क्षेत्र की एक महिला अस्पताल इलाज कराने पहुंची तो वहां जांच में उसका कार्ड फर्जी निकला। ठगी का खुलासा होते ही पीड़िता ने फर्जी कार्ड बनाने वाले से संपर्क किया। ठग ने तुरंत पैसे लौटाकर मामला ‘रफा-दफा’ कर दिया। न पुलिस, न एफआईआर, बस एक और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अस्पताल प्रशासन ने जब फर्जी कार्ड की जानकारी सीएमओ ऑफिस को भेजी तो वहां से भी कोई ठोस जांच नहीं की गई। न तो यह पता लगाया गया कि कार्ड किस आईडी से बना, न ही ठगों पर शिकंजा कसा गया। अधिकारियों की चुप्पी ने ठगों के हौसले और बढ़ा दिए हैं। खैर रोड पर तो पूरे परिवार के फर्जी कार्ड बना दिए गए। सूत्र बताते हैं कि पांच से 10 हजार रुपये लेकर फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने का ‘गुप्त कारोबार’ गांवों और कस्बों में तेजी से फलफूल रहा है। गरीब और अनपढ़ लोग योजना के नाम पर ठगे जा रहे हैं। इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं और हाथ में फर्जी कार्ड देखकर मायूसी ही मिलती है। .... संपन्न लोगों के बने कार्ड योजना में पात्र लोग चक्कर काट रहे हैं और अपात्रों के कार्ड धड़ल्ले से बन रहे हैं। अस्पताल संचालक, कारोबारी, स्कूल संचालकों के परिवार आयुष्मान कार्ड धारक हैं। जबकि, ये पात्र नहीं है। जिम्मेदार विभागों की लापरवाही का नतीजा यह है कि ठग खुलेआम सक्रिय हैं, कार्ड बन रहे हैं, शिकायतें हो रही हैं, लेकिन न कोई कार्रवाई होती है, न ही किसी की जवाबदेही तय होती है। अगर कार्ड बनाने वाली आईडी की जांच की जाती तो कई ठग अब तक सलाखों के पीछे होते। .... योजना में शामिल चिकित्सा इकाई जिला स्तरीय अस्पताल- 04 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र- 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र- 09 गैर सरकारी अस्पताल- 65 ट्रस्ट संचालित अस्पताल- 01 मेडिकल कॉलेज- 01 .... फैक्ट फाइल आयुष्मान कार्ड का लक्ष्य- 15,89,980 लक्ष्य के सापेक्ष बने कार्ड- 10,53,528 योजना में लाभांवित मरीज- 1,96,443 उपचार में खर्च धनराशि- 184.41 करोड़ रुपये ............. वर्जन... आमतौर पर शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है। अस्पतालों से जिन संदिग्ध कार्डों का डेटा भेजा जाता है, वे रद करा दिए जाते हैं। यह भी पता लगाया जाएगा कि ऐसे कार्ड किस आईडी से बन रहे हैं। ऐसे लोगों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई कराई जाएगी। डॉ. रोहित गोयल नोडल अधिकारी, आयुष्मान

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