एडवाइजरी : फफूंद रोग से ग्रीष्मकालीन बाजरे की फसल को बचाएं किसान
बारिश और गर्मी के चलते पैदा हुईं संक्रमण की परिस्थितियां, 45 दिनों के अंदर संक्रमित पौधों को तुरंत हटा दें किसान

अलीगढ़, कार्यालय संवाददताा। जिले के ब्लॉक इगलास, खैर, चंडौस में गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली ग्रीष्मकालीन बाजरे की फसल में लगने वाली फफूंद जनित (डाउनी मिल्ड्यू) रोग है। कृषि विभाग ने किसानों को इस रोग से बचाव के उपाय बताए हैं। जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि यह रोग उच्च आर्द्रता वाले वातावरण में पनपता है, जिससे पत्तियों में गंभीर क्लोरोसिस (पीलापन), प्रणालीगत संक्रमण और ’ग्रीन ईयर’ लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें पुष्प भाग पत्ती जैसी संरचनाओं में परिवर्तित हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन में नुकसान होता है। वर्तमान मौसम की परिस्थिति जैसे कि गर्मी की शुरुआत में बारिश होना जिससे उच्च सापेक्ष आर्द्रता में बढ़ोतरी एवं पिछले दिनों 1 अप्रैल से लगातार बारिश की बौछारें (जो गर्मियों की शुरुआत या मानसून के दौरान देखने को मिली) और जिसके चलते मध्यम तापमान (20-25 डिग्री सेल्सियस) देखने को मिला, जो संक्रमण के लिए आदर्श परिस्थितियां निर्मित हुई।
अगर ऐसी परिस्थिति आने वाले दिनों में भी देखने को मिलती हैं, यह बीमारी का प्रकोप किसी भी ग्रीष्मकालीन बाजरे की वेरायटी में देखने को मिल सकता है।45 दिनों में हटाएं संक्रमित पौधे कोडीएओ के मुताबिक डाउनी मिल्ड्यू रोग का उपचार और प्रबंधन में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बुवाई के 45 दिनों के भीतर संक्रमित पौधों को तुरंत हटा दें। जड़ से उखाड़कर जला दें या दफना दें। मिट्टी में ऊस्पोर की मात्रा को कम करने के लिए बाजरा को गैर-मेजबान फसलों के साथ बारी-बारी से बोएं। पिछले मौसमों के संक्रमित मलबे को नष्ट करें। रासायनिक प्रबंधन के तहत फफूंदनाशक मेटालेक्सिल-एम (4 प्रतिशत) मैनकोजेब (64 प्रतिशत) डब्ल्यूपी रिडोमिल गोल्ड एवं मैटको का 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 150 लीटर पानी के माध्यम से स्प्रे करें। अच्छे परिणाम के लिए फसल की शुरुआती अवस्था में ही उपर्युक्त दवा का स्प्रे करें।
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