
नजर बचाने की जंग में पिछड़े सरकारी अस्पताल
संक्षेप: Aligarh News - -मोतियाबिंद ऑपरेशन में निजी क्षेत्र का रहा दबदबा -एनजीओ और सरकारी अस्पतालों की रफ्तार
अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम (एनबीसीपी) की ताजा रिपोर्ट ने मोतियाबिंद ऑपरेशन की स्थिति पर नई रोशनी डाली है। अक्टूबर तक के आंकड़े बताते हैं कि मोतियाबिंद ऑपरेशन में निजी क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए कुल लक्ष्य का लगभग 94 प्रतिशत हासिल कर लिया है। वहीं एनजीओ ने 14 प्रतिशत और सरकारी अस्पतालों ने मात्र 10 प्रतिशत के आसपास उपलब्धि दर्ज की है। एनबीसीपी की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में जहां कुल लक्ष्य 60718 ऑपरेशन का था, वहीं सिर्फ 14415 ही पूरे हो सके थे। लेकिन 2025-26 में कहानी बदली हुई दिखती है, इसी लक्ष्य के मुकाबले अब तक 37069 ऑपरेशन पूरे हो चुके हैं, यानि 61 प्रतिशत की प्राप्ति।

इसमें सबसे मजबूत योगदान निजी अस्पतालों का है, जिन्होंने अकेले 34145 ऑपरेशन कर दिए। एनजीओ की बात करें तो गांधी आई हॉस्पिटल ने सबसे अधिक 1064 ऑपरेशन करके बड़ी भूमिका निभाई है। निफरद और कल्याण करोती ने मिलकर 541 ऑपरेशन किए हैं, जिससे कुल संख्या 1605 पहुंचती है। चश्मा वितरण के आंकड़े चिंतित करते हैं। 3681 के लक्ष्य के मुकाबले अभी सिर्फ 305 चश्मे ही वितरित हुए हैं, जो मात्र 8.29 प्रतिशत है। हाल में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इस स्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि अंधता निवारण अभियान को गति देने के लिए विभागीय ढांचे को और सशक्त करने की जरूरत है। .... विशेषज्ञों का मूल्यांकन रिपोर्ट में आंख विशेषज्ञों के प्रदर्शन का भी विस्तृत मूल्यांकन किया गया है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का प्रदर्शन सबसे आगे है, वे 925 ऑपरेशन कर चुके हैं। मलखान सिंह जिला अस्पताल के डॉ. एके रस्तोगी और डॉ. अनुप गुप्ता ने क्रमशः 182 और 125 ऑपरेशन किए हैं। वहीं अतरौली, डीसीएच और अन्य केंद्रों के डॉक्टर भी अपनी क्षमता अनुसार योगदान दे रहे हैं। कुल मिलाकर जिले के सरकारी सर्जनों ने 1477 ऑपरेशन किए हैं।

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