DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सड़कों पर इस्लाम नहीं संविधान बचाने के लिए उतरिए: शबनम हाशमी

सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने कहा कि सड़कों पर इस्लाम नहीं, संविधान बचाने के लिए उतरिए। एक साथ तीन तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं का मसीहा बताने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट का था। इसमें सरकार का कोई रोल नहीं है। एएमयू में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने कहा कि तीन तलाक के फैसले को शरीयत पर हमला बताया जा रहा है। यह कहना पूरी तरह गलत है। पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि कई देशों में एक साथ तीन तलाक काफी पहले खत्म हो चुका था। भारत में एक साथ तीन तलाक खत्म करने का जो फैसला आया है, वह सराहनीय है, लेकिन यह फैसला सुप्रीम कोर्ट का है। इसमें इस बिल को लागू करने में मुस्लिम महिलाओं की वाहवाही लूटने वालों का कोई रोल नहीं है। उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई और सावित्री बाई फूले के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस्लाम खतरे में नहीं है। संविधान खतरे में है। देश में अभी तक फालतू के मुद्दों पर हिंदू और मुसलमानों के ठेकेदार समाज के लोगों को भ्रमित कर सड़कों पर उतारते आये हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के लिए सड़कों पर आना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो बोलने वालों को गौरी लंकेश बनाया जा सकता है। हमारी विरासत सावित्री बाईं फूले, भगत सिंह की है। महिलाओं के केवल जागरूक होने की आवश्यकता है।

पुरुषों की सोच बदलने से ही महिलाओं की स्थिति में सुधार: सुष्मिता

-ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा कि महिला किसी भी देश की हो, सभी मुसीबतें एक जैसी है। महिलाओं की शारीरिक क्षमता पुरुषों के बराबर है, लेकिन पुरुषों को मताधिकार करने का प्रयोग महिलाओं से 90 वर्ष पहले मिला। परिवर्तन चाहते हैं तो पुरुषों को अपनी सोच बदलनी होगी। 0-बेटियों को नहीं मिल रहा उनका हक: रूही जुबैरी अलीगढ़। कार्यक्रम में कांग्रेस की पूर्व प्रदेश महासचिव रूही जुबैरी ने कहा कि बेटियों को उनका हक नहीं मिल रहा है। रानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। हर लड़की गंगा, जमुनी की तहजीब है। बेटियों को हर क्षेत्र में आगे आता देखकर खुशी होती है।

महिलाओं को इंसान मानेंगे तो ही मिलेगा दर्जा: अरफा खानम

अलीगढ़। कार्यक्रम में पहुंची वरिष्ठ पत्रकार अरफा खानम ने कहा कि महिलाओं को उनका सही दर्जा तभी मिल सकेगा, जब उनको इंसान मान लिया जाएगा। बेटियों के नाम पर सिर्फ बड़ी बड़ी बातें की जा रही है। सोच में बदलाव होना जरूरी है।

परिवरिश में न समझे बेटी-बेटे में अंतर: तबस्सुम जमाल

वरिष्ठ वैज्ञानिक तबस्सुम जमाल ने कहा कि घर में परिवरिश करते समय बेटी-बेटे में अंतर न समझें। बेटियों को कड़ी मेहनत कर मुकाम हासिल करने की आवश्यकता है।

पुरुषों को सोच का ताला खोलकर तोड़नी होगी महिलाओं की बंदिशे: रशंदा-भारतीय लेखिका रशंदा जलील ने कहा कि पुरुषों को अपनी सोच का ताला खोलना होगा। महिलाओं की बंदिशों को तोड़ना होगा। लड़कों की तालिम से ही ओरतों की तालीम को बढ़ावा मिलेगा।

हरीश रावत की बेटी समेत अन्य की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की पुत्री एवं ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी अनुपमा रावत, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की पूर्व अध्यक्षा नीलू वर्मा, छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उसमानी, उपाध्यक्ष सज्जाद सुभान राथर, सचिव मौहम्मद फहद, आयोजक सीनियर कैबिनेट समरीन फरहा आदि मौजूद रहे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Do not Islam on the streets, to save the constitution: Shabnam Hashmi