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अलीगढ़

डिफ्रेंशिएटर: गंगा में होगी डॉल्फिन की खोज, जलीय जीवों के लिए बनेंगे हैचिंग प्वाइंट

हिन्दुस्तान टीम,अलीगढ़Published By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 08:55 PM
डिफ्रेंशिएटर: गंगा में होगी डॉल्फिन की खोज, जलीय जीवों के लिए बनेंगे हैचिंग प्वाइंट

डिफ्रेंशिएटर: गंगा में होगी डॉल्फिन की खोज, जलीय जीवों के लिए बनेंगे हैचिंग प्वाइंट

-नमामि गंगे के तहत गंगा समिति करेगी जलीय जीवों के संरक्षण का कार्य, बढ़ाया जाएगा कुनबा

-अलीगढ़ के गंगा से सटे सांकरा, दादों,अतरौली में लगेंगे सीवेज शोधन संयत्र, रुकेगा गंदा पानी

-पहली बार अलीगढ़ में गंगा समिति का गठन, गंगा घाट के 10 किमी. क्षेत्र में लगाए जाएंगे पौधे

कार्यालय संवाददाता। अलीगढ़।

अलीगढ़ जनपद की सीमा से सटे क्षेत्रों में बहने वाली गंगा अब शुद्ध होगी। इतना ही नहीं यहां डॉल्फिन की खोज के साथ ही जलीय जीवों का संरक्षण करने के साथ ही हैचिंग प्वाइंट बनाए जाएंगे। यह सब हो सकेगा नमामि गंगे योजना के तहत जिला गंगा संरक्षण समिति का गठन होने से। समिति गंगा के शुद्धीकरण के लिए भी कार्य करेगी।

अलीगढ़ में गंगा सुरक्षा समिति के लिए पेदन व नामिद सदस्यों की घोषणा कर दी गई है। इसमें डीएम पदेन अध्यक्ष होंगी और नौ अन्य विभागों के अधिकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा तालानगरी औद्योगिक विकास विभाग के अध्यक्ष नेकराम शर्मा, सुबोध नंदन शर्मा, अशोक चौधरी, ज्ञानेश शर्मा को गंगा सुरक्षा समिति का नामित सदस्य बनाया गया है। वन विभाग के मुताबिक अब इस समिति का गठन होने के चलते नमामि गंगे योजना के तहत कई कार्य कराए जाएंगे। जिले के तीन अतरौली, गंगीरी व बिजौली ब्लॉक के नौ गांव से गंगा गुजरती है। इन गांव में गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाए जाने के कार्य होंगे। दादों में सांकरा घाट को विकसित किया जाएगा। गंगा से सटे गांव के 14 किमी तक के क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा दिए जाने के साथ फल, फूल के पौधे लगेंगे।

सबसे महत्वपूर्ण गंग नहर व सांकरा के पास गंगा नदी का पूर्व में हुए सर्वे में यहां काफी मगरमच्छ व कछुए दिखाई दिए, जो जलीय जीवन का प्रतीक हैं। इसके अलावा नरौरा क्षेत्र में बहने वाली गंगा में राष्ट्रीय जलीय जीव डाल्फिन को भी लोगों के द्वारा देखा गया है। डीएफओ दिवाकर कुमार वशिष्ठ ने बताया कि समीपवर्ती जनपद बुलंदशहर व कासगंज में डाल्फिन व अन्य जलीय जीव की उपस्थिति है। बुलंदशहर में गंगा पर डाल्फिन का संरक्षण केंद्र भी बनाया गया है। नमामि गंगे योजना के तहत इन जलीय जीवों को बचाने के लिए इनके संरक्षण के भी कार्य होंगे।

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नमामि गंगे योजना के तहत गंगा संरक्षण समिति का गठन अब तक नहीं हुआ था। अब हो चुका है। इसके तहत गंगा को स्वच्छ व निर्मल किए जाने के साथ ही यहां डॉल्फिन की खोज व जलीय जीवों के संरक्षण के भी कार्य होंगे। गंगा किनारे जलीय जीवों के हैचिंग प्वाइंट भी इसका हिस्सा होंगे।

-दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ

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