ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेश अलीगढ़रासानिक उर्वरक से बढ़ रही लागत, उत्पादन हुआ हम

रासानिक उर्वरक से बढ़ रही लागत, उत्पादन हुआ हम

कृषि वैज्ञानिकों ने बताए उन्नत खेती करने के तरीके अच्छी उपज के लिए जीवांश...

रासानिक उर्वरक से बढ़ रही लागत, उत्पादन हुआ हम
हिन्दुस्तान टीम,अलीगढ़Mon, 26 Feb 2024 05:30 PM
ऐप पर पढ़ें

कृषि वैज्ञानिकों ने बताए उन्नत खेती करने के तरीके

अच्छी उपज के लिए जीवांश कार्बन को बढ़ाना होगा

अलीगढ़, कार्यालय संवाददाता।

क्वार्सी फार्म में सोमवार को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं विविधता के संबर्धनपर टिकाऊ कृषि में महत्व विषय पर किसान मेला व कृषि ज्ञान गोष्ठी का आयोजन हुआ। मेले में कृषि वैज्ञानिकों ने मिट्टी में कम होते जीवांश कार्बन के साथ अन्य पोषक तत्वों की जानकारी दी। साथ ही खेती में किसानों को उपयोगी तकनीकि जानकारी दी गई।

अध्यक्ष जिला पंचायत विजय सिंह ने मेले का शुभारंभ किया। उन्होने कहा कि सन्तुलित मात्रा में उर्वरक का प्रयोग किया जाए। मिट्टी की सेहत की जांच कराकर ही बीज बोएं। वैज्ञानिक केडी दीक्षित ने बताया कि अब किसान रासायनिक उर्वरकों के बारे में बहुत कुछ जान चुके हैं, मगर अधिक उपज के फेर में रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। मिट्टी में जीवांश कार्बन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। अच्छी फसल के लिए पौधों को 17 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। बिना जांच-परख के रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग हमारी खेती की लागत को बढ़ा रहा है और उत्पादन को कम करता है। ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक भगवती प्रसाद ने कृषि निर्यात नीति 2019 के तहत कृषकों को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। केवीके से डॉ. एनके मलिक ने कहा कि ऐसा कोई काम न करें जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचे। रासायनों की निर्भरता को धीरे-धीरे कम करते हुए ट्राइकोडर्मा एवं जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाएं। डॉ. अशरफ अली ने फसल सुरक्षा के बारे में बताया कि जायद की फसलों को कतार में बोएं। फसलों की निरन्तर निगरानी करते रहें। कोई पत्ता पीला पड़ता है तो उसको निकाल कर फेंक दें। डॉ. सुधीर सारस्वत ने बताया कि फसल सुरक्षा चक्र अपनाते हुए परम्परागत खेती के साथ फूलों की खेती, पशुपालन, सब्जी उत्पादन भी करें इससे आपकी आय बढ़ेगी। आलू और सरसों के खेत खाली होने पर बेल वाली फसल लौकी, तोरई, कद्दू, खीरा को बोने से पहले पालीथिन में पौध तैयार कर लें और खेत तैयार होने पर अच्छी जोताई कर पौध को रोप दें। मेले में प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें किसानों ने बढ़-चढ़कर बड़े उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। अध्यक्ष ने इस अवसर पर किसान मेले में लगे विभिन्न उत्पादों के स्टॉल का अवलोकन किया। किसान मेले में संयुक्त कृषि निदेशक राकेश बाबू, उप कृषि निदेशक शोध प्रमोद कुमार, उप कृषि निदेशक यशराज सिंह, जिला कृषि अधिकारी अमित जायसवाल, जिला उद्यान अधिकारी डॉ. धीरेन्द्र सिंह उपस्थित रहे।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें