कंडम बसों को दौड़ने से नहीं रोक पा रहे अफसर

Mar 03, 2026 12:05 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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Aligarh News - विभागीय अधिकारियों ने जिले में पूर्व में हुए हादसों से नहीं लिया कोई सबक, कमिश्नर के आदेश को भी हवा में उड़ा दिया वहीं, बच्चों की सुरक्षा है सर्वोपरी

कंडम बसों को दौड़ने से नहीं रोक पा रहे अफसर

अलीगढ़, कार्यालय संवाददाता। स्कूली बस का फर्श गिरने से हुई छात्रा की मौत ने आरटीओ कार्यालय की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। इस हादसे ने अभियान के नाम पर जांच करने वाले अधिकारियों की कलई खोल कर रख दी है। शहरभर में अब भी बिना मानक पूरे करे बसें फर्राटा भर रही हैं, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। स्कूली वाहनों की संख्या 1177 बताई गई है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर पुलिस सौ वाहनों के आंकड़ों को भी पूरा नहीं कर सकी। क्या सारे वाहनों की फिटनेस ठीक है। ऐसा है तो गंगीरी में ऐसी घटना कैसे हो गई।

यू पूरी तरह से विभागीय उदासीनता को उजागर करता है। क्या जनवरी में सड़क सुरक्षा माह में अभियान के नाम पर अधिकारी खानापूर्ति करते रहे। या फिर महज हेलमेट बांट कर और समापन समारोह में भाषण देकर अभियान पूरा कर दिया गया। ऐसे कई सवाल हैं, जो छात्रा की दर्दनाक मौत के बाद उठ रहे हैं। कंडम बसें अब भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। इन पर कब कार्रवाई की जाएगी। स्कूली बस हो या निजी, या फिर सरकारी ये सारी बसें अपने-अपने मानक पूरा करती हैं। जब कोई हादसा होता है तो विभागों को जांच, कार्रवाई की सुध आती है। सोमवार को क्वार्सी चौराहा व सारसौल पर बसों की पड़ताल की तो वह मानकों पर खरी नहीं उतरीं। किस बस का इमरजेंसी द्वार जाम पड़ा था तो किसी की खिड़की में गार्ड नहीं लगा था। प्राइवेट बसों की भी स्थिति खराब दिखी। बसों में फर्स्ट एड किट नहीं मिली। स्कूली बसों के मानक और नियम -वाहन का रंग पीला हो और उस पर स्कूल बस स्पष्ट लिखा हो। -जीपीएस ट्रैकर चालू हालत में, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट-एड किट होनी चाहिए। -वाहनों में स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए। -चालक के पास भारी वाहन का 4 साल पुराना लाइसेंस हो। वे हल्के नीले रंग की वर्दी पहनें और उनका आईडी कार्ड लगा हो। -स्कूल बस में एक प्रशिक्षित अटेंडेंट का होना अनिवार्य है। -बच्चों की संख्या निर्धारित सीट क्षमता से अधिक नहीं होनी चाहिए। -बस के आगे-पीछे स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा हो। -बस में कम से कम दो आपातकालीन निकास होने चाहिए। -बस्ते बस के अंदर ही रखे जाने चाहिए न कि बाहर या छत पर। वर्जन होली के बाद इस पर योजना बनाकर अभियान चलाया जाएगा। जो भी बस मानक के विपरीत चल रही है, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पर्व को लेकर टीम अब भी चेकिंग कर रही हैं। दीपक कुमार शाह, आरटीओ, प्रशासन

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