
अलीगढ़-छर्रा मुख्य मार्ग पर पशुओं और गंदगी का साम्राज्य
Aligarh News - अलीगढ़ जनपद के टिकटा गांव में अलीगढ़-छर्रा मुख्य मार्ग की स्थिति बेहद खराब है। सड़क पर गोबर और गंदगी के कारण पैदल चलने वालों के लिए खतरा बढ़ गया है। अवैध रूप से पशुओं को सड़क पर बांधने से दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है। स्थानीय प्रशासन की चुप्पी ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है।
बरला, संवाददाता। अलीगढ़ जनपद के महत्वपूर्ण मार्गों में से एक, अलीगढ़-छर्रा मुख्य मार्ग पर स्थित टिकटा गांव इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच, इस मुख्य मार्ग की वर्तमान स्थिति किसी ग्रामीण पगडंडी से भी बदतर हो चुकी है। सड़क का एक बड़ा हिस्सा अब राहगीरों के बजाय पालतू पशुओं, गोबर के ढेरों और अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है, जिससे यहाँ से राहगीरों का गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। खासकर पैदल राहगीर। बढ़ता दुर्घटना का ग्राफ: सड़क पर बिखरा हुआ गोबर और गीली गंदगी दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे घातक है।
मोड़ पर अचानक पशुओं का सामने आ जाना या गोबर के कारण टायर फिसल जाना यहाँ की रोज़ाना की समस्या बन गई है। यदि जल्द ही इस मार्ग से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और पशुओं के अवैध तबेले को सड़क से दूर नहीं किया गया, तो टिकटा गाँव के पास यह मुख्य मार्ग एक बड़े ब्लैक-स्पॉट में तब्दील हो जाएगा, जहाँ होने वाली मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? सड़क सुरक्षा की उड़ रही धज्जियां तस्वीरों से पता चलता है कि मुख्य मार्ग की आधी चौड़ाई पर अवैध रूप से पशुओं को बांधा जा रहा है। भैंसों और गायों का सड़क के बिल्कुल किनारे जमावड़ा न केवल यातायात को प्रभावित कर रहा है, बल्कि 'रोड सेफ्टी' के नियमों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। भारी वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैक्टरों के बीच इन पशुओं की मौजूदगी किसी भी समय एक बड़े जानलेवा हादसे का कारण बन सकती है। अतिक्रमण और गंदगी से दम तोड़ता मुख्य मार्ग टिकटा गांव के पास सड़क के किनारे जिस तरह से उपले पाथे जा रहे हैं और गोबर के ढेर लगाए गए हैं, उसने मार्ग को बेहद संकरा कर दिया है। सड़क के किनारे की पटरी पूरी तरह गायब हो चुकी है, जिसके कारण पैदल चलने वाले लोग और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर मुख्य सड़क के बीचों-बीच चलने को मजबूर हैं। सड़क के दोनों ओर कीचड़ और मलमूत्र के कारण पर्यावरण भी दूषित कर दिया है। प्रशासनिक मौन और बढ़ती मुश्किलें यह मार्ग अलीगढ़ को कई कस्बों से जोड़ता है, जिस पर दिन-रात भारी यातायात का दबाव रहता है। इसके बावजूद, टिकटा गाँव की सीमा में प्रवेश करते ही सड़क की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आती है। स्थानीय स्तर पर अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने सरकारी संपत्ति (सड़क) को अपनी निजी जागीर समझकर वहां पशुओं का तबेला बना दिया है। संबंधित विभाग की इस चुप्पी ने मार्ग की स्थिति को और अधिक भयावह बना दिया है।

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