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बोले अलीगढ़ : आधुनिक मंच पर सतयुग दर्शन कराएंगे राम

बोले अलीगढ़ : आधुनिक मंच पर सतयुग दर्शन कराएंगे राम

संक्षेप:

Aligarh News - परंपरागत रूप में किया जाता है 105 वर्ष पुरानी लीला का मंचन, राम लीला में सरयू पार लीला देश-विदेश में है प्रसिद्ध

Sep 12, 2025 10:17 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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अलीगढ़, रवि सक्सेना। अलीगढ़ की रामलीला की चर्चा दूर-दूर तक होती है। मगर, समय के साथ इस रामलीला में बदलते समय के साथ बहुत से बदलाव हुए हैं। पुराने लोग बताते है कि एक दौर वह भी था जब रामलीला में मूक मंचन होता था। अब डॉल्बी साउंड के साथ भव्य मंचन किया जाता है। तब भी उत्सव को लेकर लोगों में उतना ही उत्साह था, जितना आज की रामलीला में हैं। समय के साथ रामलीला लाइट और साउंड के साथ और भव्य होती गई। 105 वर्ष से प्रतिवर्ष होने वाली रामलीला अलीगढ़ के लिए किसी पर्व से कम नहीं है।

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रामलीला के शुरु होते ही लोग अपना समय बांध लेते हैं। मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ रामलीला मैदान में जमा होती है। इस बार लीला का प्रसारण लोग मैदान के बाहर लगी बड़ी-बड़ी स्क्रीन पर भी देख सकेंगे। साथ ही प्रतिदिन आयोजन के हिसाब से मंच पर थीम बनाई जाएगी। नोयडा के डिजायनर थीम तैयार करेंगे। थीम के माध्यम से लोगों को उसी समय काल में ले जाने की कोशिश रहेगी। समिति की माने तो इस बार बहुत ही भव्य कार्यक्रम होने जा रहा है। श्री रामलीला महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष विमल अग्रवाल ने बताया कि 105 वर्ष पुरानी रामलीला में वर्ष 1960 में बदलाव हुआ। इससे पूर्व तक मूक मंचन हुआ करता था। इशारों के साथ संगीत का वादन होता था। कोई रिकॉर्डिंग सिस्टम नहीं था। कलाकार मूक मंचन करते थे और वाद्य यंत्रों के साथ लोग मंच पर ही छिपकर बैठते थे। वर्तमान अध्यक्ष के पिता स्व. बाल किशन अग्रवाल समिति अध्यक्ष रहे थे। इनके बाद चार अध्यक्ष और बने। इसके बाद विमल अग्रवाल ने संयोजक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। रामलीला में बदलाव का दौर शुरु हो गया। बोलती रामलीला में गीत संगीत को शामिल किया गया। अब मंचन डॉल्बी साउंड के साथ होता है। विभिन्न प्रकार की लाइट भी प्रस्तुतिकरण में शामिल हो चुकी हैं। 30 साल पहले रामलीला का मंचन मथुरा के श्री आदर्श रामलीला मंडल के द्वारा किया जाने लगा। तब से अब तक स्वामी राघवेंद्र देव चतुर्वेदी के निर्देशन में रामलीला का मंचन होता आ रहा है। दीपकों की रोशनी में होती थी सरयू पार लीला जब राजा राम को वनवास के लिए भेजा जाता है तब वह सरयू नदी पार कर वह वन को जाते हैं। ये लीला यहां पर अचल सरोवर पर की जाती है। कमेटी के अध्यक्ष ने बताया कि पुराने समय में अचल ताल पर दीपकों की रोशनी में सरयू नदी पार की लीला की जाती थी। अन्य कार्यकम भी दीपक की रोशनी में ही होते थे। उस समय लाइट सिस्टम अब की तरह नहीं था। समय के साथ बदलाव होते गए। अब आधुनिक लाइटों का इस्तेमाल कर इस लीला को भव्य रूप दिया जाता है। प्रतिदिन बदली जाएगी थीम अध्यक्ष के मुताबिक इस बार रामलीला मंचन में बड़ा बदलाव किया गया है। मंचन में विभिन्न थीमों को शामिल किया जाएगा। प्रतिदिन होने वाले आयोजन की अलग थीम होगी। जैसे भरत मिलाप के समय जंगल की थीम दी जाएगी। इसी क्रम में अलग-अलग दिन होने वाले प्रसंगों को थीम के साथ दिखाया जाएगा। नोयडा के डिजायनर को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। 19 दिन होने वाले आयोजन को डिजायनर थीम के माध्यम से सजाएंगे। रावण टीले पर होता था दहन विमल अग्रवाल के मुताबिक करीब 60 साल पहले तक रामलीला में रावण का दहन नौरंगाबाद स्थित रावण टीले पर हुआ करता था। इसी के चलते उस स्थान का नाम रावण टीला पड़ा। बाद में स्थान बदल कर प्रदर्शनी मैदान में रावण दहन करने लगे। इसके अलावा यहां पर कभी ऐसा नहीं हुआ कि रावण दहन न हुआ। वर्ष 1978 में अंग्रेज अफसर ने रावण दहन कराया था। वर्ष 1990-1992 में तत्कालीन डीएम ने कर्फ्यू के दौरान रावण पुतला दहन कराया था। जलभराव में भी न रुकी बारात पदाधिकारियों ने बताया कि तीन साल पहले अलीगढ़ में भीषण बारिश हुई। इसके चलते सड़कों पर पानी भर गया। उस समय लगा राम बारात कैसे निकलेगी। मगर, समिति पदाधिकारियों और राम जी के भक्तों में उत्साह भरा हुआ था। जलभराव में होकर ही राम बारात निकाल गई। पदाधिकारियों के मुताबिक कैसी भी परिस्थिति हो लीला का मंचन जरूर किया जाता है। राम-सीता, लक्ष्मण, रावण बनने वाले सीए से लेकर इंजी. तक पदाधिकारियों ने बताया कि रामलीला का मंचन करने वाले कलाकारों ने कई सीए से लेकर इंजीनियर हैं। परशुराम का किरदार निभाने वाले मयंक मुंबई में जॉब करते हैं। कुछ एक लोग दुबई तक में नौकरी करते हैं। ये सभी रामलीला में मंचन करने अवकाश लेकर आ रहे हैं। अशफाक बना रहे हैं रावण नुमाइश मैदान में रावण, कुंभ करण, मेघनाद का पुतला बनाने का काम शुरु हो चुका है। डिबाई, दानपुर के 74 वर्षीय अशफाक पिछले 42 साल से रामलीला के लिए रावण का पुतला बना रहे हैं। उनका पूरा परिवार इसी काम को करता है। इस कला में माहिर वह चौथी पीढ़ी हैं। अध्यक्ष के मुताबिक 60 फुट का रावण, 55 फुट का कुंभकरण और 50 फुट का मेघनाद बनाया जा रहा है। समय के साथ बढ़ गया बजट बढ़ती महंगाई के साथ रामलीला के आयोजन का बजट भी बढ़ गया है। बीते वर्ष करीब 35 लाख रुपये के बजट से कार्यक्रम किया गया था। पदाधिकारियों के मुताबिक इस वर्ष 45 लाख का बजट बना। हर सामान पहले की अपेक्षा महंगा हो गया है। इस बार थीम अलग से आयोजन में शामिल की गई है। इस क्रम में आयोजित होंगे कार्यक्रम 16 सितंबर, श्रीगणेश पूजन, मुकुट पूजन, सुंदरकांड पाठ। 17 सितंबर, नारद मोह, राम, रावण जन्म, मारीच सुबाहु वध। 18 सितंबर, श्रीराम जानकी प्रथम मिलन की लीला। 19 सितंबर, श्रीराम बारात। 20 सितंबर, श्रीराम विवाह, श्रीराम वन गमन। 21 सितंबर, केवट लीला, सरयू पार लीला। 22 सितंबर, श्रीराम भारद्वाज, वाल्मीकि से मिलन। 23 सितंबर, दशरथ मरण, श्रीराम की पादुका लाना। 24 सितंबर, काली मेला। 25 सितंबर, जयंत लीला, खरदूषण वध। 26 सितंबर, सीता हरण, जटायू मोक्ष। 27 सितंबर, श्री हनुमान जी की सवारी। 28 सितंबर, हनुमान मिलन। 29 सितंबर, हनुमान जी का मेघनाद युद्ध, लंगा दहन। 30 सितंबर, सुख सारण संवाद, रामेश्वर स्थापना। 1 अक्टूबर, कुंभ करण, मेघनाद, रावण वध। 2 अक्टूबर, दशहरा-श्रीराम रावण युद्ध, रावण वध। 3 अक्टूबर, श्रीराम-भरत मिलाप, सांस्कृतिक कार्यक्रम 4 अक्टूबर, नगर भ्रमण, प्रजा अवलोकन। रामलीला मंचन की पूरी तैयारी कर ली गई है। 15 सितंबर को मंडली यहां पर आ जाएगी। 16 सितंबर से आयोजन शुरु हो जाएंगे। आयोजन लगातार 19 दिन तक चलेंगे। भव्य तैयारियां की गई हैं। विमल अग्रवाल, अध्यक्ष गौशाला कमेटी, महोत्सव पुराने समय से होने वाली रामलीला ने लोगों के दिलों में अपनी एक अलग जगह बना रखी है। लोगों भक्ति भाव से परिवार के साथ रामलीला का मंचन देखने आते हैं। अरविंद अग्रवाल, सचिव समय के साथ रामलीला मंचन में बहुत से बदलाव हुए हैं। एक समय था जब रामलीला का मंचन मूक होता था। अब गीत संगीत के साथ लाइट एंड साउंड के साथ प्रस्तुतिकरण होता है। अनुज वार्ष्णेय, वित्त संयोजक अलीगढ़ की रामलीला पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां की सरयू पार लीला की लोग खूब तारीफ करते हैं। पहले दीपकों की रोशनी में सरयू पाल लीला होती थी, अब लाइट में होती है। अर्जुन गोविल, संयोजक रामलीला की तैयारी कई दिन पहले से शुरु हो गई थी। अब उसे अंतिम रूप दिया गया है। जल्द ही आयोजन शुरु हो जाएंगे। लीला को लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है। संयम पाराशर, संयोजक रामलीला में इस बार अद्भुत मंचन होने जा रहा है। प्रतिदिन होने वाले आयोजनों में अलग थीम रहेगी। इसके लिए टीम को काम सौंपा गया है। विषय के हिसाब से थीम बनाई जाएगी। ऋषभ गर्ग, संयोजक मूक मंचन से बोलती हुई रामलीला किसी चमत्कार से कम नहीं है। 50 वर्ष पूर्व तक लीला का मंचन मूक रूप से किया जाता था। धीरे-धीरे बदलाव हुए और साउंड शामिल किया गया। विक्रांत गर्ग, संयोजक अलीगढ़ की रामलीला अपने आप में विशेष है। इस लीला को करने के लिए पूरी टीम कई दिनों से जुटी हुई थी। अब जाकर तैयारियां पूरी हुई हैं। 16 सितंबर से आयोजन शुरु होंगे। आकाश अग्रवाल, संयोजक रामलीला की खास बात ये है कि इस पर मौसम का कोई असर नहीं होता। आंधी हो या तूफान हो लीला कभी नहीं रोकी जाती। पूर्व में बारिश के बाद जलभराव में भी लीला जारी थी। पीयूष अग्रवाल सीए, संयोजक रामलीला का मंचन देखने के लिए लोकल के अलावा दूसरे शहरों से लोग भी आते हैं। रामलीला मैदान में सभी के बैठने के उचित व्यवस्था की जाती है। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहती है। भव्य अग्रवाल, संयोजक सुरक्षा की दृष्टि से पहले ही प्रशासन को सूचित किया जाता है। मैदान के बाहर पुलिस बल की तैनाती रहती है। इसके अलावा समिति के लोग भी कार्यक्रम में निगरानी करते हैं। प्रदीप भारद्वाज इस बार रामलीला का आयोजन लोग रामलीला मैदान में तो देखेंगे ही साथ ही मैदान के बाहर दो बड़ी स्क्रीन लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन पर लोग बाहर से भी लीला का आनंद ले सकेंगे। कैलाश राय भव्य आयोजनों में प्रतिदिन अलग-अलग लीलाओं का मंचन होगा। इसके लिए मंच तैयार किया गया है। मंच को अत्याधुनिक लाइटों से सजाया गया है। रंग रोगन हो गया है। शैलेंद्र सारस्वत अलीगढ़ की रामलीला सभी पर अपनी विशेष छाप छोड़ती है। जो एक बार इस रामलीला का मंचन देख लेता है, वह हर बार महोत्सव का इंतजार करता है। लोग इसके इंतजार में हैं। गौरव मित्तल 105 वर्ष पुरानी रामलीला में समय के साथ बहुत सारे बदलाव हुए हैं। पहले मूक प्रस्तुतिकरण होता था। अब बोलती हुई लाइट, साउंड सिस्टम के साथ रामलीला का मंचन होता है। अमित वार्ष्णेय रामलीला के कलाकार विदेश में भी नौकरी करते हैं। लेकिन जब रामलीला आयोजन का समय आता है तो वह अवकाश लेकर मंचन करने सारे काम छोड़कर अलीगढ़ आते हैं। मनोज वार्ष्णेय मथुरा की मंडली पिछले 30 साल से रामलीला में मंचन करती आ रही है। इस बार भी उसी मंडली को मंचन की जिम्मेदारी दी गई है। कलाकार एक दिन पूर्व आ जाएंगे। हरीश सैनी वह दौर भी अलग था जब सरयू पार लीला दीपकों की रोशनी में होती थी। लोग अपने-अपने घरों पर दीपक जलाकर रखते थे। दीपकों की एक शृंखला सभी बन जाती थी। रोबिन वार्ष्णेय रावण, कुंभकरण, मेघनाद बनाने का काम शुरु हो गया है। डिबाई के अशफाक इन्हें बना रहे हैं। 60 फुट का रावण तैयार किया जा रहा है। 55 फुट के कुंभकरण व 50 फुट में मेघनाद बनेगा। विशाल चंद्रा अद्भुत रामलीला का मंचन होने जा रहा है। लोग बेसब्री से इसका इंतजार करते हैं। कार्यक्रम को पहले की अपेक्षा और भव्यता से किया जा रहा है। हर बार कार्यक्रम का स्वरूप भव्य होता है। कमल अरोड़ा