कानून की चौखट के बाहर गर्भपात का कारोबार
अलीगढ़ में 450 निजी अस्पतालों में से केवल एक दर्जन ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) का पंजीकरण कराया है। स्वास्थ्य विभाग अब बिना अनुमति संचालित संस्थानों की जांच बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। असुरक्षित गर्भसमापन महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।

अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। जिले में निजी स्वास्थ्य सेवाओं का जाल तेजी से फैला है। छोटे-बड़े करीब 450 निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल दर्जन भर संस्थानों ने ही मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) का वैध पंजीकरण कराया है। यानी कानूनी रूप से गर्भसमापन की अनुमति बेहद सीमित संस्थानों के पास है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आखिर बाकी संस्थानों में गर्भसमापन से जुड़े मामलों का निस्तारण किस आधार पर किया जा रहा है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत किसी भी अस्पताल, नर्सिंग होम या क्लीनिक में गर्भसमापन की सुविधा देने से पहले स्वास्थ्य विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इसके लिए संस्थान में निर्धारित मानकों के अनुरूप ऑपरेशन थिएटर, आवश्यक उपकरण, इमरजेंसी सुविधाएं और प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञ होना जरूरी है। निरीक्षण के बाद ही विभाग पंजीकरण जारी करता है। कई निजी संस्थान एमटीपी पंजीकरण की प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लेते। कुछ जगहों पर सुविधाओं की कमी है, जबकि कई संचालक कानूनी औपचारिकताओं से बचते नजर आते हैं। हालांकि बिना अनुमति गर्भसमापन कराना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है और पकड़े जाने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
बिना अनुमति संचालित संस्थान
क्वार्सी बाईपास, कमालपुर बाईपास, अतरौली, इगलास, जवां आदि क्षेत्रों में संचालित नर्सिंग होम बिना अनुमति के गर्भपात करा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि असुरक्षित और अनियमित गर्भसमापन महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव और भविष्य में गर्भधारण संबंधी जटिलताओं की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि सरकार केवल मानक पूरे करने वाले संस्थानों को ही अनुमति देती है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग अब बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों की जांच और निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है。
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ऐसे कराया जा सकता है पंजीकरण
पंजीकरण की प्रक्रिया
एमटीपी पंजीकरण के लिए अस्पताल या नर्सिंग होम संचालक को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ भवन, ऑपरेशन थिएटर, उपकरण, स्टाफ और स्त्री रोग विशेषज्ञ से जुड़े दस्तावेज जमा किए जाते हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम निरीक्षण करती है। सभी मानक पूरे मिलने पर संस्थान को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
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ये हैं प्रमुख नियम
एमटीपी के प्रमुख नियम
-प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञ का होना अनिवार्य
-ऑपरेशन थिएटर व आवश्यक उपकरण उपलब्ध होना
-स्वच्छता और इमरजेंसी सुविधा जरूरी
-तय समय सीमा और कानूनी शर्तों के अंदर ही गर्भसमापन की अनुमति
-सभी मामलों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य
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वर्जन...
जिले में करीब 18 अस्पताल एमटीपी में पंजीकृत हैं। अन्य अस्पतालों की जांच कर रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. एसके जैन, एसीएमओ
सामान्य प्रश्न
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