Against the stigma Forest department harbors hundreds of crores in the name of greenery - हरियाली के नाम पर वन विभाग ने किया करोड़ों का बंदरबाट DA Image

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हरियाली के नाम पर वन विभाग ने किया करोड़ों का बंदरबाट

वन विभाग ने जिले में हरियाली का ग्राफ बढ़ाने के लिए केवल कागजों में ही पौधरोपण किया। पौधरोपण के लिए आए करोड़ों रुपये के बजट को अधिकारी दीमक की तरह चट कर गए। मामले की जांच के लिए लखनऊ मुख्यालय से चार टीमों ने अलीगढ़ में डेरा डाल लिया है। सोमवार को टीमें जमालपुर स्थित वन विभाग के कार्यालय पर जाकर जांच करेंगी।

डीएफओ व खैर रेंज के वन रक्षक पर आरोप है कि दोनों ने मिलकर वर्ष 2018-19 में किए गए पौधरोपण के लिए खैर रेंज में गड्ढा खुदान-भरान, जिप्सम, खाद खरीद व पौध खरीद में करीब पांच करोड़ का घोटाला किया। इसके साथ ही वर्ष 2019-20 में होने वाले पौधरोपण के लिए खैर रेंज में ही 559 हेक्टेयर जमीन पर गड्ढा खुदान कागजों में ही कर साढ़े चार करोड़ रुपये का गबन किया।

वन विभाग को वर्ष 2018-2019 में अलीगढ़ मंडल में 6,55,385 पौधे रोपने का लक्ष्य मिला था। इसके लिए करीब छह करोड़ रुपये का बजट विभाग को जारी किया गया। जिसमें से विभाग ने 3.25 लाख पौधों का रोपण अलीगढ़ व अतरौली रेंज में किया। जबकि करीब 3.30 लाख पौधों का रोपण खैर रेंज की टप्पल, जट्टारी, पिसावा, चंडौस, गौमत, हामिदपुर सहित अन्य बीटों में किया जाना था। इसके लिए विभाग को करीब तीन करोड़ रुपये खर्च करने थे। खैर रेंज में वन विभाग की ओर से 2018 में करीब 288 हेक्टेयर में करीब चालीस ग्राम पंचायतों में साढ़े तीन लाख पौधे रोपने थे।

कागजों में ही लगाए गए पौधे :

कागजों में पौधे लगे दिखाए गए हैं। लेकिन, गांवों की जमीन पर जो कुछ गड्ढे खोदे गए, उस जमीन को ग्रामीणों की ओर से जोत दिया गया। बात की जाए पौधों की तो यहां साढ़े तीन लाख में से वर्तमान में एक भी पौधा नहीं है। इसके साथ ही करीब दर्जनभर गांवों में तो गड्ढा खुदान तक नहीं किया गया। जबकि ढाई करोड़ रुपये की लागत से पौधरोपण कागजों में दिखाकर बिल पास करा लिए गए। इस मामले की शिकायत वन एवं पर्यावरण के प्रमुख सचिव से की गई। लेकिन, मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

मुख्यमंत्री से की गई शिकायत :

वर्ष 2019-20 के लिए होने वाले पौधरोपण के नाम पर मंडल में 559 हेक्टेयर जमीन पर गड्ढा खुदान-भरान, जिप्सम व खाद की खरीद दिखाकर करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का गबन किया गया। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रमुख सचिव से की गई। जिसके बाद इस मामले की जांच के लिए लखनऊ मुख्यालय से बीस सदस्यीय चार टीमों ने अलीगढ़ में डेरा डाल लिया है।

आज टीम खंगालेगी रिकॉर्ड :

मुख्य वन संरक्षक (कैंपा योजना) सुनील कुमार दुबे के नेतृत्व में गठित टीम में बीस सदस्य शामिल हैं। टीम अलीगढ़ के एक होटल में ठहरी है। टीम के सदस्य आज जमालपुर स्थित वन विभाग के कार्यालय पर पहुंचकर दो दिन तक जांच करेंगे। इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय पर सौंपेंगे।

चार पर गिर चुकी है गाज :

खैर रेंज में हुए इस घोटाले की जांच मार्च 2019 में आगरा के मुख्य वन संरक्षक अभय कुमार सिंह ने की थी। जिसमें वन दारोगा राम प्रकाश, माली उदयवीर, पितांबर व जगन्नाथ को सस्पेंड कर दिया गया था। जबकि वन रक्षक वेद प्रकाश व इंद्रजीत को क्लिनचिट दी गई थी।

फर्म को किया गया डेढ़ करोड़ का भुगतान :

वन विभाग की ओर से खैर रेंज में पौधरोपण के लिए एक फर्म से करीब साढ़े तीन लाख पौधे खरीदे गए। साथ ही गड्ढा खुदान-भरान, जिप्सम व खाद की खरीद कागजों में दिखाकर डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसके लिए क्रमश: फर्म को 6.38 लाख, 68 लाख व 79,46,760 रुपये का भुगतान अलग-अलग किया गया।

चीफ कंर्जवेटर का हुआ था तबादला :

चीफ कंर्जवेटर विनय कृष्ण मिश्रा का अलीगढ़ से तबादला कर दिया गया। उनके स्थान पर आगरा के चीफ कंर्जवेटर जावेद अख्तर को प्रभार सौंपा गया है। लेकिन, विभागीय अधिकारियों में चर्चा है कि विनय कृष्ण मिश्रा ने इन तमाम बिलों पर बिना किसी जांच के ही सहमति दी थी। जिसके बाद ही उनका तबादला किया गया।

वन विभाग अलीगढ़ मंडल में हुए घपलों की शिकायत की गई थी। जिसके बाद चार टीमों का गठन कर अलीगढ़ भेजा गया है। चारों टीमों को अलग-अलग काम सौंपा गया है। सभी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को सौपेंगे। इसके बाद यह रिपोर्ट सीएम को प्रेषित की जाएगी।

-सुनील कुमार दुबे, मुख्य वन संरक्षक (कैंपा योजना)

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