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'गाय का दूध पीने से बीस लोग हाइड्रोफोबिया के शिकार'

अलीगढ़ जिले के खेड़ा गांव में करीब एक पखवाड़ा पहले पागल कुत्ते के द्वारा काटी गई गाय का दूध पीने वाले बीस लोग हाइड्रोफोबिया का शिकार हो गए हैं। रैबीज के असर से बचने के लिए उन्हें सीएचसी ले जाकर एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाए जा रहे हैं।

कोतवाली के गांव खेड़ा के रहने वाले नाहर सिंह की गाय को करीब दो सप्ताह पहले एक पागल कुत्ते ने काट लिया था। दूध बेचने वाले नाहर सिंह ने इसी गाय का दूध घर में उपयोग करने के साथ ही पड़ोसियों को भी दिया था। पागल कुत्ते के काटने से गाय के मर जाने पर परिजन समेत बीस लोग बीमारी के शिकार हो गए। रेबीज की बीमारी से बचने के लिए सभी मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवा रहे हैं। आज एक साथ पहुंचे करीब बीस लोगों ने अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाए।

हाइड्रोफोबिया के लक्षण

-व्यवहार में अचानक परिवर्तन

-प्रगतिशील पक्षापात

-गतिभंग

-डेयरी जानवरों में दुग्ध नहीं होना

-अतिसंवेदनशीलता

-गले का पक्षाघात

-लार गिरना

संक्रमित पशु से तेजी से फैलता है रोग

डॉ. दीपक वार्ष्णेय बताते हैं कि कोई भी स्तनपायी रेबीज वायरस से संक्रमित हो सकता है। लक्षण विकसित कर सकता है। अधिकांश जानवर वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। फिर संक्रमित जानवर से यह रोग मनुष्य को होना संभव है। संक्रमित चमगादड़, बंदरों, रैकून, लोमडियों, मवेशी, भेडियें, कुत्तों, या बिल्लियों के काटने से यह अन्य पशुओं जैसे गाय या मनुष्य को तेजी से चपेट में लेता है। रेबीज होने के पहले सुस्ती, बुखार, उल्टी आदि की शिकायतें आती है।

चिकित्सक से बराबर संपर्क में रहें

-इस रोग की चपेट में आने के बाद अन्य कई तरह की अहतियात भी बरते जाते हैं। लेकिन मरीज का बराबर चिकित्सक के संपर्क में रहना जरूरी है।

रेबीज से पहले इन लक्षणों की आती है शिकायत

-सुस्ती आना

-बुखार आना

-उल्टी आना

यह मामला सामने आया है। मरीजों को रेबीज के इंजेक्शन लगवाए गए हैं। इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी। इसको लेकर डॉक्टरों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ

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  • Web Title:20 people suffer from hydroxyphobia after drinking cow's milk