अपने व्यवहार में दिखाएं मोहम्मद से प्यार
गंगा-जमुनी तहजीब वाले हमारे शहर अलीगढ़ का इतिहास बेहद खूबसूरत रहा है। इस शहर ने कई बार एकजुटता की मिसाल भी पेश की। इसीलिए कभी कांवड़ यात्रा में टोपी पहने लोग सेवा करते दिखे तो ईद पर बधाई देने वालों में हिंदू भाई भी शरीक हुए। तो फिर इस माहौल के बीच ये पोस्टर विवाद क्यों?
हिन्दुस्तान की ओर से शाहजमाल एडीए कॉलोनी स्थित अकबरी मस्जिद में आयोजित बोले अलीगढ़ के तहत मुस्लिम समुदाय के जिम्मेदार लोगों ने खुलकर इस विषय पर अपने विचार रखे। वे बोले कि अगर हम अपने अजीज को प्यार करते हैं तो उसे इजहार करने का ये तरीका सही नहीं है। सड़कों पर उतरकर पोस्टर दिखाना प्यार नहीं है, बल्कि हमें अपने रोजमर्रा के जीवन और व्यवहार में उनके बताए मार्ग को अपनाना होगा। यही इंसानियत भी है।
अलीगढ़ जिले का इतिहास बरसों पुराना है। वर्तमान में जिले की कुल आबादी करीब 34 लाख है, जिनमें करीब सात लाख मुस्लिम हैं। ऐसे में अलीगढ़ का जिक्र मुस्लिमों के बिना संभव नहीं है। बीते दिनों कानपुर से लगाए गए आई लव मोहम्मद के पोस्टर जब यहां लगाए गए तो तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक तरफ पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने सूझबूझ के साथ संभ्रांत लोगों से संपर्क करके मुद्दे को बढ़ने नहीं दिया तो मुस्लिम समुदाय के जिम्मेदार लोगों ने भी अहम भूमिका निभाई।
हिन्दुस्तान से बातचीत में जिम्मेदारों ने कहा कि मोहम्मद से प्यार हर कोई करता है। वे हमारे दिल में हैं। ऐसे में उसे सहेजने के लिए हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। इसके लिए हमें वो चीज कभी नहीं करनी चाहिए, जो हमारे अजीज को पसंद ही न हो। पोस्टर के रूप में हो रहे विरोध और जुलूस प्रदर्शन हमारे दीन में नहीं सिखाया गया। इनमें कोई भी हो सकता है। कुछ युवा हैं, जो अभी नासमझ हैं। ऐसे में उनसे यही अपील है कि अगर उन्हें प्यार का इजहार करना है तो वह निश्चित ही उनका मौलिक अधिकार है। लेकिन, इस तरह सड़क पर उतरकर नहीं, बल्कि उनके बताए मार्गों पर चलकर इजहार करें। कोशिश करें कि अपनी भूमिका वहां निभाएं, जहां देश की तरक्की के लिए काम हो रहा हो।
हम सरकार के हर कदम के साथ :
पोस्टर विवाद के बीच बरेली की घटना के बाद और सतर्कता बढ़ गई है। ऐसे में लोगों ने सरकार से भी अनुरोध किया है कि वह इस प्रकरण में सख्ती न दिखाए, बल्कि उन्हें समझाने का काम करें। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वह सरकार और प्रशासन के हर कदम के साथ हैं।
26 सितंबर को कई स्थानों पर लगे थे पोस्टर :
चार सितंबर को कानपुर में बिना अनुमति के एक जुलूस निकाला गया था। इसी दौरान सड़क किनारे 'आई लव मोहम्मद' लिखा एक पोस्टर लगाया गया। विरोध के बीच पोस्टरों को हटवाया गया। इसके बाद अन्य जिलों में प्रदर्शन होने लगे। 26 सितंबर को इसकी चिंगारी अलीगढ़ में उठी। अकराबाद कस्बे में कई घरों, खंभों, बिजली के पोल व एक दरगाह पर पोस्टर लगा दिए गए। पुलिस ने संभ्रांत लोगों से वार्ता करके पोस्टरों को हटवाया। इसके बाद शहर के अलग-अलग इलाकों में ये पोस्टर देखने को मिले। पुलिस ने लोगों को हिदायत भी की। इसके बाद अगले शुक्रवार को हाईअलर्ट जारी हुआ।
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सभी की भावनाओं का रखें ख्याल : शहर मुफ्ती
शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने कहा कि आई लव मोहम्मद कहना नागरिक का मौलिक अधिकार है। ये अधिकारी कोई किसी से नहीं छीन सकता। लेकिन, उसे इजहार करने के लिए सड़कों पर उतरना बिल्कुल ठीक नहीं है। हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि हम अगर मोहम्मद से प्यार का इजहार दिखा रहे हैं तो उसके पोस्टर, पंफ्लेट इत्यादि सड़कों पर न चिपकाएं। सभी की भावनाओं का ख्याल रखें। हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए कि किसी भी तरह से शहर का माहौल न खराब हो और अमन-चैन कायम रहे।
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कोई जानकारी हो तो तत्काल पुलिस को बताएं :
पोस्टर विवाद के बीच पुलिस अलर्ट है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की ओर से लगातार पैदल गश्त करके लोगों से बात की जा रही है। साथ ही धर्मगुरुओं के साथ अधिकारियों की ओर से बैठक की गई हैं। एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक ने बताया कि लोगों से अपील की है कि अफवाह न फैलाएं। यदि किसी को ऐसी कोई जानकारी प्राप्त होती है तो उससे पुलिस को अवगत कराएं। एलआईयू के अलावा सोशल मीडिया की टीमें हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं।

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Sunil Kumarलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




