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जर्जर सड़कों पर कब तक जाती रहेंगी जानें

जर्जर सड़कों पर कब तक जाती रहेंगी जानें

संक्षेप:

अलीगढ़ में सड़कें अब सिर्फ खराब नहीं, जानलेवा हो चुकी हैं। शहर से लेकर देहात तक ऐसी कोई सड़क नहीं बची जहां गड्ढों ने खतरा न खड़ा किया हो। बारिश के बाद सड़कें और टूट गईं, लेकिन मरम्मत का नाम नहीं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कें एक मौसम तक नहीं टिक रहीं। 

Dec 01, 2025 06:31 pm ISTSunil Kumar हिन्दुस्तान
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अलीगढ़ जिले में सड़कें किस हद तक बदहाल हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नई बनी सड़कें भी एक बारिश के बाद उखड़ जाती हैं। लोक निर्माण और नगर निगम की ओर से बनाई जाने वाली सड़कों की चार से पांच साल की गारंटी कागजों में तो है, लेकिन जमीन पर उसका कोई असर दिखाई नहीं देता। सड़क निर्माण में कमीशनखोरी और घटिया सामग्री के उपयोग से स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि आम आदमी का सड़क पर चलना भी सुरक्षित नहीं रहा। पिछले महीनों में सड़क टूटने के कारण हुए हादसों ने लापरवाही की पोल खोल दी है। अगस्त में ओजोन सिटी मार्ग पर 8वीं कक्षा की छात्रा की मौत हो गई थी। मात्र पांच दिन पहले सारसौल चौराहे के पास सड़क निर्माण के चलते बाइक सवार महिला की जान चली गई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे हादसे सैकड़ों लोगों की जान ले चुके हैं।

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हिन्दुस्तान के अभियान बोले अलीगढ़ के तहत टीम ने रविवार को शहर के कई इलाकों का दौरा किया। हर मार्ग पर एक जैसा दृश्य मिला। गहरे गड्ढे, टूटी सड़क, धंसे हुए मैनहोल और लगातार बढ़ता खतरा। लोगों ने बताया कि शहर से देहात तक हर सड़क पर गड्ढों का अंबार है। स्मार्ट सिटी और सीएम ग्रिड परियोजनाओं के दौरान जगह-जगह खुदी सड़कें भी खतरा बढ़ा रही हैं। नगर निगम के पास एक हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें हैं, लेकिन उनकी मरम्मत और रखरखाव बेहद कमजोर है। लोगों का कहना है कि जब शहर में कोई वीआईपी आता है तो संबंधित सड़कें रातों-रात ठीक हो जाती हैं, लेकिन जनता के लिए इस्तेमाल होने वाली सड़कें बारिश खत्म होने के इंतजार में छोड़ दी जाती हैं। जल निकासी की व्यवस्था भी इतनी खराब है कि हल्की बारिश में ही सड़कें टूटने लगती हैं। स्मार्ट सिटी जोन को छोड़ दें तो शहर की लगभग 80 फीसदी सड़कें जर्जर हैं। रामघाट रोड, मैरिस रोड, दोदपुर, नौरंगाबाद पुल, आईटीआई रोड, आगरा रोड, जयगंज, छर्रा अड्डा, बैकुंठ नगर, पीएसी और जेल फ्लाईओवर पर सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों से भरी हैं। सौ फुटा रोड, भुजपुरा रोड, अचल रोड, रमेश विहार, सुरेंद्र नगर और महेंद्र नगर में सड़कें इतनी उखड़ चुकी हैं कि लोगों का गुजरना मुश्किल हो गया है। नगर निगम हर साल निर्माण विभाग पर 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है। लोक निर्माण विभाग ने भी हाल ही में 35 करोड़ रुपये गड्ढे भरने और मरम्मत पर खर्च किए, लेकिन हालात जस के तस हैं। शहर हो या गांव हर जगह सड़कें टूटने की कहानी एक जैसी है। अलीगढ़ की टूटी सड़कें अब सिर्फ परेशानी नहीं, मौत का कारण बन चुकी हैं। जनता सुरक्षित सड़क और जिम्मेदार व्यवस्था की उम्मीद कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी तय कब होगी।

नंबर गेम

-120 सड़कों के पैच वर्क को पीडब्ल्यूडी ने टेंडर किए जारी।

-12 करोड़ से भरे जाएंगे इन सड़कों के गड्ढे

-1000 किमी. सड़क आती है नगर निगम सीमा क्षेत्र में।

-200 सड़कों के पैच वर्क को नगर निगम ने जारी किए टेंडर।

80 फीसदी सड़कों में गड्डों, चलने लायक नहीं

महानगर में स्मार्ट सिटी वाले क्षेत्र को छोड़ दें तो बाकी स्थानों पर सड़क चलने लायक नहीं हैं। कदम कदम पर गड्ढे हैं। शहर की लाइफ लाइन रामघाट रोड पर बीच बीच में गहरे गड्डे व गैप हो गया है। मेनहोल के ढक्कन धंस गए हैं। आगरा रोड की स्थिति खराब है। जयगंज, जीटी रोड, आईटीआई रोड, नौरंगाबाद पुल, जेल फ्लाई ओवर, मीनाक्षीपुल पर गड्डे हुए हैं। बन्नादेवी थाना क्षेत्र के पास सड़क टूट चुकी है। पग पग पर सड़कें टूटी हैं और दर्द दे रही हैं।

सबसे अधिक निर्माण विभाग पर खर्च, लेकिन हालात ठीक नहीं

नगर निगम निर्माण विभाग पर करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है। लेकिन हालात में सुधार नहीं हो रहा है। अभी लोक निर्माण विभाग ने 35 करोड़ रुपये सड़कों के गड्डे भरने व मरम्मत पर खर्च पाए थे। लेकिन गांव से लेकर शहर तक एक स्थिति है। यहां की भी सडकें खराब रामघाट रोड, अचल रोड, सासनी गेट, भुजपुरा रोड, जयगंज, महेंद्र नगर, सुरेंद्र नगर, रमेश विहार, सौ फुटा में गहरे गड्ढे हो गए हैं।

Sunil Kumar

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