देखते-देखते रिहायशी से व्यवसायिक हो गए इलाके

अलीगढ़ में 50 से ज्यादा इलाके व कॉलोनियों का बदल गया स्वरूप, प्राधिकरण द्वारा नियोजित की गईं आवासीय कॉलोनी भी हुईं व्यवसायिक, ट्रैफिक, पार्किंग, सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर आया है काफी असर अब सुप्रीम कोर्ट के कड़ा रूख अपनाने के बाद उपयोग बदलने की होगी जांच

देखते-देखते रिहायशी से व्यवसायिक हो गए इलाके

केस-1-अवंतिका कॉलोनी

लगभग तीन दशक पहले अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने अवंतिका कॉलोनी आवासीय योजना लांच की थी। उस समय यहां एलआईजी, एचआईजी, एमआईजी आवास का निर्माण किया गया। आज के समय में यहां आवास में हॉस्पिटल, मार्केट, बैंक आदि व्यवसायिक गतिविधियां की जा रही हैं।

केस-2-स्वर्ण जयंती नगर

लगभग 25 साल पहले अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने स्वर्ण जयंती नगर आवासीय योजना विकसित की थी। यहां भी आज के समय में अवंतिका कॉलोनी की तरह ही व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

आवासीय कॉलोनियों में व्यवसायिक गतिविधियों के यह मात्र दो ही उदाहरण हैं। जबकि पूरे शहर में रिहायशी इलाके से व्यवसायिक इलाके में तब्दील हुए कई क्षेत्र हैं। प्राधिकरण की महायोजना: 2031 के अनुसार निर्धारित आवासीय भू-उपयोग के बावजूद भी व्यवसायिक व औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ऐसे इलाकों की संख्या 50 से अधिक है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीते दिनों देशभर में आवासीय इलाकों को अवैध रूप से व्यवसायिक उपयोग में बदले जाने पर कड़ा रूख अपनाते हुए सभी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेश को इसकी जांच करने के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा टिप्पणी करते हुए कहा कि रिहायशी इलाकों, रिहायशी इमारतों और जमीन का बिना इजाजत कमर्शियल मकसद से इस्तेमाल कर कर्मशियल इलाकों में बदला जा रहा है। ऐसी हरकतें न सिर्फ कानून और जनहित के खिलाफ हैं बल्कि उन निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनती हैं, जिन्होंने संपत्ति खरीदने और घर बनाने में पैसा लगाया। इसमें शहरी नियोजन प्रभावित हो रहा है। ट्रैफिक, पार्किंग, सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव पड़ रहा है। ऐसे में अलीगढ़ में उन आवासीय इलाकों, कॉलोनियों, इमारतों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती हैं, जहां बिना किसी अनुमति के व्यवसायिक प्रयोग में ले लिया है। स्वर्ण जयंती, अवंतिका कॉलोनी, सुरक्षा बिहार, शांति निकेतन व आवास विकास परिषद की आवास विकास आगरा रोड, मसूदाबाद सहित अन्य कई परियोजनों हैं, जहां नियम विरूद्ध व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यहां आवासीय भवनों में सैलून, अस्पताल, बैंक और शोरूम का संचालन किया जा रहा है।

यह है नियम

एडीए ने महायोजना 2031 में शहर के अलग-अलग इलाकों में आवासीय, व्यवसायिक, औद्योगिक, खेती का दायरा तय कर रहा है। इसी के हिसाब से नक्शा जारी होते हैं। इसके साथ ही एडीए की कई आवासीय कॉलोनियां भी हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं स्वर्ण जयंती नगर हैं। पिछले कई सालों से इस कॉलोनी में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। आवासीय भवनों की आड़ में व्यावसायिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं। स्थिति यह है कि लोगों ने नर्सिग होम व कोचिंग संस्थान तक खोल दिए। कहीं सैलून तो कहीं शोरूम खोल दिए गए।

एडीए ने पूर्व में कराया था सर्वे

एडीए की तरफ से पूर्व में स्वर्ण जयंती नगर कॉलोनी में एक सर्वे कराया गया था। इसमें ऐसे ही एक दर्जन से अधिक लोगों को चिन्हित किया गया। इसके बाद इन्हें प्राधिकरण से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, लेकिन आज तक कोई भी भवन संचालक संतुष्ट जवाब नहीं दिया गया। व्यवसाय भी नहीं हटाए गए। इसके बाद सभी के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में धारा 26 (2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

इनका कहना

एडीए महायोजना: 2031 के तहत निर्धारित भू-उपयोग के विपरीत बिना अनुमति के अन्य गतिविध संचालित करने वालों का सर्वे कराया जाएगा। प्राधिकरण की नियोजित कॉलोनियों का भी सर्वे होगा।

-दीपाली भार्गव, एडीए सचिव

Satendra Kulshershtha

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सत्येन्द्र ने ग्रेजुएशन और पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद अपने करियर की शुरुआत 2006 में पंजाब केसरी, वीक एंड टाइम्स जैसे प्रमुख अखबारों से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2010 में हिन्दुस्तान से जुड़कर कार्य शुरू किया।


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प्रशासनिक व राजनीतिक रिपोर्टिंग करते हुए सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं। प्रिंट, डिजिटल मीडिया के साथ-साथ हिन्दुस्तान द्वारा आयोजित कार्यशाला में शामिल होने के बाद इलेक्ट्रोनिक मीडिया (वीडियो न्यूज) का अनुभव है।

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