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मासूम हूं, बेजुबान हूं पर पत्थर नहीं हूं मैं

मासूम हूं, बेजुबान हूं पर पत्थर नहीं हूं मैं

संक्षेप:

4 अक्टूबर को विश्वभर में पशु कल्याण दिवस मनाया जाता है। अलीगढ़ भी इस अवसर पर पीछे नहीं है। यहां बड़ी संख्या में पशु प्रेमी न सिर्फ जानवरों की देखभाल करते हैं, सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं के लिए भी मदद का हाथ बढ़ाते हैं। 

Oct 03, 2025 06:20 pm ISTSunil Kumar हिन्दुस्तान
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अलीगढ़ में कई संस्थाएं और समाजसेवी पशु कल्याण को जीवन का ध्येय मान चुके हैं। शहर की प्रमुख गौशालाओं में सैकड़ों गायों की सेवा प्रतिदिन की जाती है। वहीं एनिमल फीडर जैसी संस्थाएं रोजाना सड़कों पर निरीह जीवों को भोजन उपलब्ध कराती हैं। कुछ युवा समूह सोशल मीडिया के जरिए फंड जुटाकर घायल पशुओं के इलाज का भी इंतजाम करते हैं। पशु प्रेमियों का मानना है कि मनुष्य की असली करुणा तब प्रकट होती है जब वह उन प्राणियों की रक्षा करे जो अपनी बात कह नहीं सकते। इस अवसर पर विभिन्न पशु-प्रेमी संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वे पशुओं के प्रति संवेदनशील बनें और शहर को उनके लिए भी सुरक्षित और दयालु जगह बनाएं।

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हिन्दुस्तान समाचार पत्र के अभियान बोले अलीगढ़ के तहत टीम ने गुरुवार को नगला मसानी गोशाला पर गोशाला सेवा समिति के पदाधिकारियों से संवाद किया। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पार्क में शहर के निरीह जीवों की देखभाल करने वाले एनीमल फीडर संस्था के पदाधिकारियों से भी संवाद किया। गोशाला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि नगला मसानी गोशाला में 600 से अधिक गोवंश हैं। जिनको हर प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं। बीमार गोवंश का समय पर उपचार कराया जाता है। प्रतिदिन उनके भोजन की पर्याप्त व्यवस्था भी की जाती है। बताया कि इन गोवंशों की देखभाल केवल संख्या तक सीमित नहीं है, हर एक के लिए भोजन, पानी और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं। समिति पदाधिकारियों ने बताया कि गौशाला में रोजाना कई क्विंटल हरा व सूखा चारा और दाना मंगवाया जाता है। बीमार या घायल गोवंश को समय पर पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा उपचार मिलता है। इसके लिए गौशाला में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था तो है ही, जरूरत पड़ने पर उन्हें बाहर भी ले जाया जाता है। गोवंशों के रहने के लिए बनाए गए शेड नियमित रूप से साफ किए जाते हैं ताकि संक्रमण की कोई संभावना न रहे। बताया कि इस सेवा कार्य में केवल समिति के सदस्य ही नहीं, शहर के दानदाताओं और समाजसेवियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है। लोग समय-समय पर आर्थिक सहयोग और चारे की व्यवस्था कर गौसेवा में भागीदारी निभाते हैं। समिति का मानना है कि गौवंश की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, मानवीय कर्तव्य भी है। गौशाला सेवा समिति ने आम जनता से भी अपील की कि वे बेसहारा और बीमार पशुओं की देखभाल में मदद करें, क्योंकि इंसानियत का असली पैमाना उन प्राणियों के प्रति संवेदना है जो अपनी पीड़ा खुद व्यक्त नहीं कर सकते।

निरीह जीवों के लिए समर्पित संस्था का कारवां

20 जुलाई 2020 को शुरू हुई एनिमल फीडर्स संस्था ने महज चार सालों में पशु सेवा का बड़ा अभियान खड़ा कर दिया है। इं. यश मणि जैन द्वारा स्थापित इस संस्था से शहर और बाहर के 300 से अधिक सदस्य जुड़े हैं। ये सदस्य प्रतिदिन 300 से अधिक निरीह जीवों को भोजन कराते हैं। अब तक करीब दो लाख से ज्यादा पशुओं को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अलावा संस्था जागरूकता अभियान, एंटी रेबीज टीकाकरण शिविर, लंपी वायरस से बचाव, पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं से बचाने के लिए श्वानों को रिफ्लेक्टिंग कॉलर पहनाने जैसे कई नवाचार किए हैं। संस्था ने “फीडर्स ऑल ओवर” अभियान के तहत अलग-अलग राज्यों से युवाओं को जोड़ा और अब तक 80 से ज्यादा शहरों में फीडिंग ड्राइव आयोजित की जा चुकी है। संस्था की उपाध्यक्ष युक्ति गुप्ता, सचिव गौरव यादव, उपसचिव अनुज गुप्ता और कोषाध्यक्ष रिद्धिमा जौहरी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

शहरीकरण से विलुप्त हो रहीं गौरैया

एनिमल फीडर्स संस्था ने शहर में ‘गौरैया बचाओ, प्रकृति बचाओ’ अभियान की शुरुआत की है। कभी हर घर की छत और आंगन में दिखने वाली गौरैया अब शहरीकरण, पेड़ों की कमी और मोबाइल टावरों की विकिरण के कारण तेजी से लुप्त होती जा रही है। संस्था ने विभिन्न इलाकों में गौरैया के लिए घोंसले और पानी के बर्तन लगाने का कार्य शुरू किया है, ताकि उन्हें सुरक्षित माहौल मिल सके। संस्था ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और बगीचों में घोंसले व पानी की व्यवस्था कर इस अभियान का हिस्सा बनें। साथ ही आने वाले दिनों में एंटी रेबीज वैक्सीनेशन सहित अन्य सामाजिक व पशु हितैषी कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

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