ई-रिक्शा चालक कर रहे मनमानी, नियम रखे ताक पर
अलीगढ़ की सड़कों पर बेतरतीब तरीके से दौड़ रहे ई-रिक्शा अब शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। बिना तय रूट, बिना स्टैंड और बिना पंजीकरण के चल रहे हजारों ई-रिक्शा न केवल ट्रैफिक जाम बढ़ा रहे हैं, आए दिन हादसों की वजह भी बन रहे हैं।
अलीगढ़ में ई-रिक्शा संचालन की अव्यवस्थित प्रणाली अब शहर के लिए गंभीर समस्या का रूप ले चुकी है। शहर के प्रमुख चौराहों रामघाट रोड, सेंटर प्वाइंट, जेल रोड, बन्नादेवी, क्वार्सी समेत अन्य क्षेत्रों में बिना किसी निर्धारित रूट और रोक-टोक के ई-रिक्शा का संचालन हो रहा है। नगर निगम और आरटीओ की संयुक्त कार्रवाई का अभाव इनके संचालन को और बेपरवाह बना रहा है। सवारियों के अलावा आजकल ये माल और स्कूली बच्चों को भी ढो रहे हैं।

हिन्दुस्तान समाचार पत्र के अभियान बोले अलीगढ़ के तहत टीम ने गुरुवार को शहर के बाजारों में लोगों से संवाद किया। इस दौरान लोगों ने बताया कि नियमों के अनुसार हर ई-रिक्शा का पंजीकरण, तय रूट और अधिकृत स्टैंड से संचालन आवश्यक है। मगर शहर में अधिकांश चालक बिना नंबर, बिना रूट परमिट और बिना प्रशिक्षण के सड़क पर निकल पड़ते हैं। इस कारण एक-एक रूट पर सैकड़ों ई-रिक्शा दौड़ते नजर आते हैं, जिनमें कई बार केवल एक ही सवारी होती है। इससे न केवल अनावश्यक भीड़ बढ़ती है, जाम की स्थिति भी लगातार बनती रहती है। बताया कि नगर निगम में करीब 3 हजार ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। जबकि आरटीओ में इनकी पंजीकृत संख्या 14 हजार 897 है। लेकिन, इनकी वास्तविक संख्या करीब 30 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। बिना नंबर और अवैध रूप से चल रहे ई-रिक्शा की वजह से ट्रैफिक पुलिस के लिए भी नियंत्रण मुश्किल होता जा रहा है। इससे सबसे अधिक प्रभावित आम यात्री, छात्र, स्कूली बच्चे और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े लोग होते हैं। अव्यवस्थित संचालन के कारण हादसों में भी इजाफा देखने को मिल रहा है। कई चालक कम उम्र के या प्रशिक्षणहीन होते हैं, जो ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हुए अचानक यू-टर्न, गलत दिशा में प्रवेश और ओवरलोडिंग जैसी गतिविधियां करते हैं। अगर ई-रिक्शा को निर्धारित स्टैंड से नंबर के आधार पर चलाया जाए, तो सड़क पर एक साथ बड़ी संख्या में ई-रिक्शा उतरने की स्थिति खत्म हो सकती है। इससे जाम में कमी, सड़क पर सुगमता और यातायात का संतुलन सुधर सकता है।
नंबर गेम
-14 हजार 897 ई-रिक्शा पंजीकृत में आरटीओ कार्यालय में।
-30 हजार से अधिक ई-रिक्शा शहर की सड़कों पर लगा रहे दौड़।
-3 हजार करीब ई-रिक्शा नगर निगम हैं पंजीकृत।
स्कूली बच्चों से लेकर माल तक ढो रहे ई-रिक्शा
अलीगढ़ में ई-रिक्शा का उपयोग अब सिर्फ आम यात्रियों तक सीमित नहीं रह गया है, स्कूलों और व्यावसायिक गतिविधियों में भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। सुबह स्कूल टाइम पर ई-रिक्शा चालकों की सबसे अधिक भीड़ स्कूलों के बाहर देखने को मिलती है। कई चालक कम उम्र के बच्चों को लेकर तेज रफ्तार में निकलते हैं। जबकि वाहन में क्षमता से अधिक बच्चे बैठे होते हैं। न तो सेफ्टी बेल्ट होती है और न ही बच्चों के लिए कोई सुरक्षा प्रोटोकॉल। इससे अभिभावकों में लगातार चिंता बनी रहती है क्योंकि दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। दूसरी ओर, व्यावसायिक क्षेत्र में भी ई-रिक्शा का उपयोग अनियंत्रित रूप से बढ़ रहा है। बाजारों, थोक मंडियों, गोदामों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सामान ढोने के लिए इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। इससे बाजारों में भीड़ और अव्यवस्था और बढ़ जाती है। ये वाहन जहां जगह मिलती है वहीं रुककर लोडिंग-अनलोडिंग शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्कूल और व्यावसायिक गतिविधियों में ई-रिक्शा के उपयोग पर नियमन लागू किया जाए तो दुर्घटनाओं, भीड़ और जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वर्तमान स्थिति में इनका अनियंत्रित उपयोग शहर की यातायात व्यवस्था पर सबसे बड़ा दबाव बना हुआ है।
शिकायत
-ई रिक्शा बिना रूट और स्टैंड के जहां चाहें रुक जाते हैं जिससे जाम लगता है।
-स्कूल टाइम पर ई रिक्शा की लाइनें पूरी सड़क ब्लॉक कर देती हैं।
-कई चालक अचानक मोड़ लेते हैं जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ता है।
-बाजारों में मनमानी रुकावट से पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।
-बिना फिटनेस वाले ई रिक्शा बीच सड़क खराब होकर जाम बढ़ाते हैं।
-चालक मोबाइल चलाते हुए वाहन चलाते हैं जिससे सड़क पर खतरा बढ़ता है।
-रात में कई ई रिक्शा बिना लाइट के चलते हैं जिससे हादसे की आशंका रहती है।
-मोहल्लों में तेज रफ्तार से घुसने पर बच्चों और बुजुर्गों को खतरा होता है।
-सड़क क्षमता से अधिक ई रिक्शा होने से रोज जाम की स्थिति बनती है।
-एंबुलेंस को भी ई रिक्शा साइड नहीं देते जिससे मरीजों को परेशानी होती है।
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सुझाव
-ई रिक्शा को स्टैंड से नंबर प्रणाली के अनुसार सड़क पर उतारा जाए।
-शहर में इनके लिए तय रूट निर्धारित कर सख्ती से पालन कराया जाए।
-सभी चालकों का अनिवार्य प्रशिक्षण और नियमों की काउंसलिंग कराई जाए।
-स्कूलों के बाहर अलग ड्रॉप-पिक जोन बनाया जाए।
-बिना नंबर और फिटनेस वाले ई रिक्शा को तुरंत सीज किया जाए।
-हर ई रिक्शा पर लाइट और रिफ्लेक्टर अनिवार्य किया जाए।
-बाजारों में लोडिंग-अनलोडिंग के लिए अलग जगह तय हो।
-जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और डिजिटल रूट पास लागू किया जाए।
-मोहल्लों में ई रिक्शा की स्पीड लिमिट और प्रवेश नियंत्रण तय हो।
-ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम संयुक्त अभियान चलाकर व्यवस्था सुधारे।
बोले लोग
सड़कों की क्षमता से कई गुना अधिक ई रिक्शा चल रहे हैं जिससे भीड़ बढ़ना स्वाभाविक है। शहर की पुरानी संकरी गलियों में यह और भी गंभीर समस्या बन गई है और लोगों को हर दिन इससे जूझना पड़ रहा है।
महिम गुप्ता
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ई रिक्शा जहां चाहें वहीं मोड़ लेते हैं जिससे अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं और कई बार टक्कर होने की नौबत आ जाती है। शहर की सड़कों पर इनकी वजह से आवाजाही बेहद मुश्किल होती जा रही है और लोगों का समय भी ज्यादा बर्बाद होता है।
विशाल चंद्र
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सुबह स्कूल टाइम पर तो हाल और खराब हो जाता है। क्योंकि हर स्कूल के बाहर लंबी लाइन में खड़े ई रिक्शा पूरी सड़क घेर लेते हैं। बच्चों को छोड़ने आए वाहन भी फंस जाते हैं और आसपास के लोग भी जाम में फंसकर परेशान हो जाते हैं।
मनोज सिंह
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ई रिक्शा चालक बिना रूट के चलकर जहां जगह मिलती है वहीं दौड़ पड़ते हैं। जिससे ट्रैफिक का फ्लो बिल्कुल बिगड़ जाता है। सड़कों पर व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी कोई लेता नहीं है और परेशानी का सामना जनता को ही करना पड़ता है।
राजू दीक्षित
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कई ई रिक्शा बिल्कुल बिना नंबर के चलते हैं। जिनके चालक बहुत तेजी से मोड़ बदल देते हैं। खतरा हर पल बना रहता है कि कब सामने से कोई गलत दिशा में आकर दुर्घटना कर दे। इससे लोगों का डर और तनाव दोनों बढ़ता है।
संतोष कुमार
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बाजारों के अंदर ई रिक्शा सबसे ज्यादा जाम लगाते हैं। क्योंकि वे मनमाने ढंग से जहां सवारी दिखती है वहीं रुक जाते हैं। इससे पैदल चलने वालों के लिए भी जगह नहीं बचती। खरीदारी करने वालों को लगातार दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
टिंकू
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शाम की व्यस्त ट्रैफिक में ई रिक्शा बीच सड़क पर धीमी गति से चलते रहते हैं। जिससे पीछे पूरा जाम लग जाता है। हॉर्न बजाने के बाद भी वे किनारे नहीं लगते और हर दिन यही समस्या दोहराई जाती है जिससे लोग बेहद परेशान हैं।
गिरीश
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कई ई रिक्शा रात में बिना हेडलाइट के चलते हैं जिससे सामने आने वाले वाहन चालकों को एकदम दिखाई नहीं देता। इस वजह से कई बार अचानक ब्रेक लगाकर संभालना पड़ता है और हादसे का खतरा हर समय बना रहता है।
बंटी
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बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने आए ई रिक्शा सड़क पर दो या तीन कतारों में खड़े हो जाते हैं। इससे सड़क पूरी तरह ब्लॉक हो जाती है और आम लोगों को घर पहुंचने में दोगुना समय लग जाता है। रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं।
संजीव वार्ष्णेय
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ई रिक्शा जहां चाहे यू टर्न ले लेते हैं। जिससे पीछे आ रहे वाहनों को संभलने का मौका ही नहीं मिलता। शहर की संकरी सड़कों पर यह आदत ट्रैफिक को और अव्यवस्थित कर देती है और लोग हर दिन परेशान होते हैं।
मक्खन लाल
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कई बार ई रिक्शा अचानक बीच सड़क पर बंद हो जाते हैं और चालकों को धक्का लगाना पड़ता है। जिससे पीछे लंबा जाम लग जाता है। इस वजह से ऑफिस जाने वाले लोग रोज देर से पहुंचते हैं और तनाव में रहते हैं।
दीपक
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जाम की स्थिति में एंबुलेंस भी फंस जाती हैं। ई रिक्शा चालकों को साइड देना नहीं आता। कई बार मिनटों तक एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ पाती। जिससे मरीजों की हालत खराब होने का खतरा रहता है और लोग भी घबराए रहते हैं।
दर्शन
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ई रिक्शा की बढ़ती संख्या से जगह-जगह शोर और भीड़ दोनों बढ़ गए हैं। सड़कों पर इतनी अधिक भीड़ हो जाने से वाहन धीरे-धीरे चलते हैं और लोगों का आधा दिन तो इसी जाम को पार करने में निकल जाता है।
प्रशांत
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हल्की बारिश होते ही ई रिक्शा और भी धीमे चलने लगते हैं। जिससे सड़क पर लंबी लाइनें लग जाती हैं। पानी भरने पर वे बीच रास्ते में ही रुक जाते हैं और लोगों को घंटों तक फंसे रहना पड़ता है।
दीपक
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रिक्शा चालक अनुभवहीन होने के कारण ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते और जहां जगह दिखती है वहीं घुस जाते हैं। इससे सड़क का पूरा संतुलन बिगड़ जाता है और लोग हर दिन किसी न किसी नए जाम में फंस जाते हैं।
आकाश
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कई परिवार शिकायत करते हैं कि ई रिक्शा चालक सड़कों पर लगातार हॉर्न बजाते रहते हैं जिससे शोर बढ़ता है। इससे बुजुर्गों और बीमार लोगों को काफी परेशानी होती है और उन्हें घर में भी शांति नहीं मिल पाती।
कमल वर्मा
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मुख्य बाजारों में ई रिक्शा का अव्यवस्थित पार्किंग सबसे बड़ी समस्या है। वे दुकानों के आगे खड़े हो जाते हैं। इससे ग्राहकों को पहुंचने में परेशानी आती है और दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित होता है।
वीरेंद्र सिंह
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ऑफिस टाइम पर ई रिक्शा की लाइन इतनी लंबी होती है कि लोग बस स्टॉप तक भी समय पर नहीं पहुंच पाते। हर दिन इसी भीड़ में फंसकर लोगों का काफी समय खराब होता है और कामकाज पर भी असर पड़ता है।
शुभम अग्रवाल
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कई ई रिक्शा चालक सड़क के किनारे खड़े होकर सवारी के इंतजार में आधी सड़क घेर लेते हैं। इससे आगे बढ़ने के लिए सिर्फ एक संकरा रास्ता बचता है और वहां जाम लगना तय होता है जिससे हर कोई परेशान रहता है।
भरत
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ई रिक्शा बिना किसी परमिट के चलते हैं। जिससे इन्हें रोकने का अधिकार किसके पास है यह भी स्पष्ट नहीं होता। नतीजा यह है कि इनका संचालन न कोई नियंत्रित करता है और न कोई इनके व्यवहार पर नजर रखता है।
धर्मेंद्र
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