हाथीपुल अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू
शहर के इतिहास में अहम पहचान रखने वाला करीब दो सौ साल पुराना हाथीपुल आज खुद मरम्मत की गुहार लगा रहा है। कभी अंग्रेजी हुकूमत के जमाने में बना ये पुल अब जर्जर हो चुका है। तीन दिन पहले जब इससे पानी टपकने लगा तो लोगों में हड़कंप मच गया।
वार्ड 68 के उस्मानपाड़ा क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक हाथीपुल से तीन दिन पहले अचानक पानी टपकने लगा। जिससे आम नागरिक परेशान हो गए। स्थानीय नागरिकों ने इसकी जानकारी क्षेत्रीय पार्षद अब्दुल मुत्तलिब को दी। पार्षद ने तत्काल नगर आयुक्त से शिकायत कर पुल की मरम्मत की मांग की। उन्होंने कहा कि यह पुल लगभग दो शताब्दियों पुराना है और अब इतनी जर्जर स्थिति में पहुंच गया है कि पानी इसके ढांचे से रिसने लगा है। अगर समय रहते मरम्मत नहीं हुई, तो बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
हिन्दुस्तान समाचार पत्र के अभियान बोले अलीगढ़ के तहत टीम ने रविवार को हाथीपुल पर लोगों से संवाद किया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने बताया कि इस पुल की दशा सुधारने के लिए कई बार जलकल विभाग और निर्माण विभाग में शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ निरीक्षण कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब लगातार पानी टपकने से नीचे की दीवारें भी कमजोर होती दिख रही हैं। पुल के नीचे हालात और भी खतरनाक हैं। यहां नगर निगम ने कूड़ा प्वाइंट बना रखा है, जहां गंदगी और दुर्गंध का आलम है। लोगों ने बताया कि कूड़े के ढेर पर कई बार वाहन फिसल चुके हैं और लोग घायल भी हुए हैं। रात में ये ढेर दिखता नहीं, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, पुल के नीचे लगा ट्रांसफार्मर भी जर्जर हालत में है। विभाग ने जुगाड़ से उसे टिका रखा है, जबकि उसके पास ही कूड़े का अंबार लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी भी वक्त जानलेवा साबित हो सकती है। लोगों ने बताया कि पुल से पानी रिसने का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। कई बार अधिकारियों की टीमें आईं, लेकिन हर बार कारण तलाशने के बाद नतीजा शून्य रहा। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि पुल के ऊपर रखे ट्रांसफार्मर और बंद नाली भी रिसाव का कारण हो सकते हैं। लोगों ने कहा कि हाथीपुल केवल एक रास्ता नहीं, शहर की ऐतिहासिक धरोहर है। उसकी अनदेखी न केवल शहर के इतिहास के साथ अन्याय है, आम नागरिकों की जान से भी खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि नगर निगम तत्काल जलनिकासी और पुल की तकनीकी जांच कराए जिससे स्थिति नियंत्रण में लाई जा सके।
बोले लोग
हाथीपुल से तीन दिन पहले पानी का रिसाव होने लगा। जिसकी जानकारी नगर आयुक्त को दी जा चुकी है। पुल की स्थित काफी जर्जर है। जल्द ही इसका निर्माण कार्य कराए जाने की मांग की गई है।
अब्दुल मुत्तलिब, पार्षद
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दो सौ साल पुराना पुल हमारी विरासत है, लेकिन आज ये खतरे में है। हर साल शिकायतें होती हैं, अधिकारी आते हैं, तस्वीरें खिंचती हैं और फिर सब भूल जाते हैं। अब तो पुल से पानी टपकना गंभीर चेतावनी है।
मो. इंतजार
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जब किसी ऐतिहासिक जगह से पानी टपकने लगे, तो ये सिर्फ रिसाव नहीं लापरवाही का संकेत होता है। नगर निगम को तुरंत इसकी तकनीकी जांच करानी चाहिए जिससे पुल का ढांचा और कमजोर न हो।
उमैद
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हाथीपुल हमारे मोहल्ले की पहचान है। इससे न केवल लोग रोज गुजरते हैं, नीचे से भी रास्ता है। पानी टपकने से नीचे से गुजरना डरावना लगने लगा है। हादसे का खतरा बढ़ गया है।
उस्मान
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कई बार हमने जलकल विभाग को शिकायत दी, लेकिन सिर्फ निरीक्षण हुआ, काम नहीं। अब पुल में लगातार पानी रिसने लगा है, जिससे लगता है कहीं इसकी नींव ही कमजोर न हो जाए।
इरफान
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नगर निगम और निर्माण विभाग दोनों को मिलकर इस पर काम करना चाहिए। यह पुल केवल एक संरचना नहीं, शहर की शान है। इसे गिरने से पहले संभाल लेना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सैयद राशिद अली
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रात में जब पुल के नीचे से जाते हैं, तो पानी की बूंदें टपकती महसूस होती हैं। ऊपर से आवाज भी आती है। डर लगता है कि कहीं अचानक कोई हिस्सा गिर न जाए।
मो. जावेद
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हाथीपुल के नीचे कूड़ा प्वाइंट सबसे बड़ी गलती है। कूड़े का पानी और नाली का रिसाव मिलकर पुल को और कमजोर कर रहे हैं। प्रशासन को पहले वहां सफाई और ढुलाई की व्यवस्था करनी चाहिए।
मो. कासिम
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पुल के नीचे लगा ट्रांसफार्मर भी खतरे में है। अगर पानी उस तक पहुंच गया तो बड़ा हादसा हो सकता है। बिजली विभाग और नगर निगम दोनों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
मुन्ना कुरैशी
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जो पुल अंग्रेजों के जमाने से टिका हुआ है, वह आज हमारी लापरवाही से टूटने के कगार पर है। शहर की धरोहरों की देखरेख सिर्फ कागजों पर होती है, जमीनी स्तर पर कुछ नहीं।
शमशाद अहमद
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हाथीपुल की मरम्मत कोई मुश्किल काम नहीं, बस प्रशासनिक इच्छाशक्ति चाहिए। हर बार आश्वासन मिलता है, पर काम शुरू नहीं होता। अब जनता को खुद निगरानी करनी होगी।
मो साजिद
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अगर पुल से पानी टपक रहा है, तो इसका मतलब है कि अंदर से कहीं रिसाव या दरार है। तकनीकी जांच जरूरी है। यह मामला आम नहीं, गंभीर संरचनात्मक समस्या हो सकती है।
यूसुफ खान
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गंदगी और रिसाव ने इस इलाके को बदनाम कर दिया है। पहले हाथीपुल से गुजरना गौरव की बात होती थी, अब लोग डरते हैं। अलीगढ़ की पहचान खतरे में है।
मो जीशान
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शहर के पुराने ढांचे को संभालना सरकार की जिम्मेदारी है। हाथीपुल से पानी टपकना दर्शाता है कि हमारी धरोहरों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। यह सिर्फ एक पुल नहीं, इतिहास का हिस्सा है।
मो. कामरान
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बच्चे स्कूल जाते हैं तो माता-पिता डरते हैं कि कहीं पुल पर कुछ न गिर जाए। पानी का रिसाव अगर बढ़ा तो पूरा रास्ता ही खतरे में आ जाएगा। इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए।
मो. कासिफ
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पहले भी कुछ साल पहले ऐसा हुआ था, तब अधिकारियों ने जांच की और मामला बंद कर दिया। अब वही हाल फिर सामने आया है। इसका मतलब है कि कभी स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
हाजी अबीद
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पुल के ऊपर लगा ट्रांसफार्मर नाली बंद कर रहा है, यही रिसाव की वजह हो सकती है। इसे हटाकर नई जलनिकासी बनवानी चाहिए। विभागों में तालमेल की कमी सबकी परेशानी बढ़ा रही है।
जाहिद
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इतने पुराने पुल को संभालने के लिए ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण योजना के तहत काम होना चाहिए। इसे सामान्य निर्माण की तरह नहीं देखना चाहिए। यहां तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जरूरी है।
नाजिम
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कूड़े के ढेर और रिसाव ने नीचे के रास्ते को खतरनाक बना दिया है। रात में गाड़ियां फिसल जाती हैं। नगर निगम को वहां लाइट और संकेत बोर्ड भी लगवाने चाहिए।
वसी आलम
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लोग पुल के नीचे खड़े होकर बातें करते हैं, लेकिन अब वहां पानी टपकता है। डर लगता है कि कहीं ऊपर से कोई पत्थर न टूटकर गिर जाए। यह हालत पहले कभी नहीं थी।
जफर आलम
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प्रशासन अगर अब भी नहीं जागा, तो यह पुल किसी दिन खबर नहीं, हादसे की सुर्खी बन जाएगा। लोगों की चेतावनी को गंभीरता से लेकर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।
शीमरान
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