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मेकअप और चश्मा लगाकर पहुंचे डॉग्स

मेकअप और चश्मा लगाकर पहुंचे डॉग्स

संक्षेप:

अलीगढ़ इस सप्ताहांत एक अनोखे और शानदार नजारे का साक्षी बनने जा रहा है। ओजोन सिटी का फुटबॉल ग्राउंड द अलीगढ़ डॉग वैलफेयर सोसाइटी के राष्ट्रीय डॉग शो में देश-विदेश की 46 शानदार प्रजातियों और दुलर्भ श्वानों की उपस्थिति से गूंज उठा है। 

Nov 23, 2025 06:39 pm ISTSunil Kumar हिन्दुस्तान
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अलीगढ़ में आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केवल 275 श्वान ऑल ब्रीड शो और 110 श्वान स्पेशलिटी शो में एंट्री कर चुके हैं। कैनल क्लब ऑफ इंडिया के नियमों के तहत 22 और 23 नवंबर को ओजोन सिटी के फुटबॉल ग्राउंड में हो रहे इस दो-दिवसीय राष्ट्रीय डॉग शो ने देश-विदेश के श्वान प्रेमियों और दुर्लभ प्रजातियों को एक ही मंच पर ला दिया है। द अलीगढ़ डॉग वैलफेयर सोसाइटी के सचिव संदीप नक्षत्र ने बताया कि देशभर से लगभग 275 श्वान ऑल-ब्रीड डॉग शो में और करीब 110 श्वान स्पेशलिटी शो में भाग लेने के लिए अलीगढ़ पहुंच चुके हैं। सभी प्रतिभागी श्वानों में माइक्रोचिप लगी है। जिसमें उनकी तीन पीढ़ियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है, जिससे उनकी नस्ल की शुद्धता और प्रामाणिकता सुनिश्चित रह सके।

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हिन्दुस्तान समाचार पत्र के अभियान बोले अलीगढ़ के तहत शनिवार को टीम ने ओजोन सिटी के फुटबॉल ग्राउंड में डॉग लवर, उनके हैंडलर्स और स्वामियों से संवाद किया। बताया कि इस वर्ष अलीगढ़ में जुटी भीड़ केवल संख्या में ही नहीं गुणवत्ता में भी बड़ी है। 46 से अधिक प्रजातियां, जिनमें से कई देशभर में गिनी-चुनी हैं, इस शो की खास आकर्षण हैं। ओजोन सिटी के डायरेक्टर सागर मंगला ने बताया कि फुटबॉल ग्राउंड को विशेष रूप से सजाया गया है ताकि देशभर से आए प्रतिभागियों और श्वानों का भव्य स्वागत किया जा सके। उन्होंने कहा कि ओजोन सिटी में यह नवां एवं दसवां राष्ट्रीय डॉग शो है, जिसे लेकर व्यापक तैयारी की गई है और पूरा परिसर उत्साह से भरा हुआ है। इस वर्ष निर्णायक मंडल में मलेशिया से आए इंटरनेशनल जज डैरिक सीयू, बेंगलुरु के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जज टी. प्रीतम व हेमचंद्रा शामिल हैं। ये जज विभिन्न श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान करेंगे और श्वानों का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर करेंगे। संस्था के कोषाध्यक्ष अनुराग पांडे और सदस्य हरेन्द्र सिंह ने बताया कि 46 प्रजातियों का ऐसा संगम अलीगढ़ में पहली बार देखने को मिलेगा।

इन जगहों से आए लोग

डॉग शो में पलवल, कानपुर, लखनऊ, पंचकुला, बरेली, पटियाला, दिल्ली, देहरादून, जयपुर, गुरुग्राम, पठानकोट, कोलकाता, फतेहगढ़, नोएडा, मेरठ, अलवर, बेंगलुरु, मुंबई, पानीपत, अहमदाबाद सहित देश के विभिन्न शहरों से हैंडलर्स और श्वान स्वामी पहुंचे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी प्रतिभागियों की उपस्थिति आयोजन की प्रतिष्ठा को और बढ़ा रही है।

दुर्लभ प्रजातियों की शाही मौजूदगी

इस राष्ट्रीय आयोजन में दो ऐसी प्रजातियां विशेष रूप से सबका ध्यान खींच रही हैं जो देश में बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं।

-प्रेसा कैनेरियो, जिनकी संख्या पूरे देश में मुश्किल से दो से तीन ही है, उनमें से दो श्वान अलीगढ़ डॉग शो में मौजूद हैं।

-ऑस्ट्रेलियन शेफर्ड, जिनकी देश भर में संख्या केवल पांच मानी जाती है, वे भी इस आयोजन में भाग ले रहे हैं।

श्वानों का व्यक्तित्व, ट्रेनिंग और लाइफस्टाइल

रखरखाव

-इन प्रीमियम नस्लों का रखरखाव सामान्य पालतू श्वानों से कहीं अलग और अत्यधिक विशेषज्ञता वाला होता है।

-नियमित ग्रूमिंग, हेयर केयर, क्लॉ ट्रिमिंग और हाइजीन पर विशेष ध्यान।

-कुछ नस्लों को रोजाना मिनिमम 2-3 घंटे व्यायाम की आवश्यकता होती है।

-प्रदर्शनी नस्लों के लिए कोट शाइनिंग, त्वचा की देखभाल और स्पेशल बाथ तकनीक इस्तेमाल की जाती है।

-कई मालिक अपने श्वानों पर मासिक 20 से 50 हजार तक खर्च करते हैं।

खानपान

-इन श्वानों की डाइट साइंस आधारित होती है।

-प्रोटीन, ओमेगा-फैटी एसिड, कैल्शियम और विटामिन से समृद्ध हाई-ग्रेड किबल।

-कई नस्लें ग्रेन-फ्री डाइट, उच्च ऊर्जा वाला मीट प्रेप या विशेष बालेंस्ड होम-कुक्ड भोजन लेती हैं।

-बड़े आकार की नस्लों के लिए जॉइंट सपोर्ट फूड, जबकि एक्टिव नस्लों के लिए स्पोर्ट्स डॉग डाइट दी जाती है।

-कुछ दुर्लभ नस्लें हर दिन 2-3 विशेष मील प्लान लेती हैं, जिन्हें हैंडलर्स विशेष समय पर देते हैं।

व्यवहार और आदतें

-इस शो में आए ज्यादातर श्वान अत्यधिक प्रशिक्षित हैं।

-इन पर कमांड बेस्ड ट्रेनिंग, एगिलिटी ट्रेनिंग और शो-वॉक की विशेष प्रैक्टिस होती है।

-प्रेसा कैनेरियो जैसे श्वान शांत स्वभाव के होते हैं लेकिन अपने मालिक और घर की सुरक्षा में सर्वोच्च।

-ऑस्ट्रेलियन शेफर्ड जैसी नस्लें अत्यधिक इंटेलिजेंट, एक्टिव और कमांड फॉलोइंग के लिए पसंद की जाती हैं।

-कई प्रजातियां बच्चों के प्रति सौम्य, परिवार-प्रेमी और सामाजिक व्यवहार के लिए जानी जाती हैं।

बोले लोग

इस डॉग शो में आकर ऐसा लगा जैसे श्वानों की एक नई दुनिया सामने खुल गई हो। हर श्वान अपनी अलग चाल, व्यवहार और प्रशिक्षण शैली दिखा रहा था। दर्शकों में भी गजब का उत्साह दिखा, लोग बड़ी रुचि से हर गतिविधि को देख रहे थे।

विवेक बंसल, दिल्ली

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यहां आए श्वानों का आत्मविश्वास और अनुशासन देखकर सच में खुशी हुई। हैंडलर्स ने जिस तरह उन्हें तैयार किया है, वह पेशेवर स्तर का है। इतना शांत और नियंत्रित आयोजन कम ही देखने को मिलता है। पूरा माहौल बेहद सकारात्मक था।

आकाश, पलवल

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इस शो की सबसे खास बात यह थी कि हर श्वान को पूरा समय और स्थान मिला। वे बिना किसी तनाव के स्वतंत्रता से चले, दौड़े और अपनी ट्रेनिंग का प्रदर्शन कर सके। यहां की व्यवस्था ने सभी को बेहद सहज रखा।

भावेश, मुंबई

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मैं कई सालों से श्वानों को पाल रहा हूं, लेकिन इतनी विविधता एक साथ देखना दुर्लभ अनुभव है। सभी श्वानों की ग्रूमिंग, चाल-ढाल और प्रस्तुति देखकर समझ आता है कि उनका रखरखाव और मेहनत कितनी समर्पित होती है।

वसीम, दिल्ली

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दर्शकों की जागरूकता देखकर अच्छा लगा। लोग केवल फोटो लेने नहीं आए थे, वे श्वानों के व्यवहार, खानपान, ट्रेनिंग और उनकी दिनचर्या के बारे में सीखना चाहते थे। यह एक सकारात्मक बदलाव है जो जिम्मेदार पालतूपन की ओर ले जाता है।

रजी अब्बास, मेरठ

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हर श्वान का अपना एक व्यक्तित्व होता है और यहां वह साफ नजर आया। कहीं शांत स्वभाव, कहीं फुर्ती, कहीं आत्मविश्वास हर एक का अपना अंदाज देखकर मन प्रसन्न हो गया। यह शो सच में सीखने योग्य था।

महिपाल सिंह, मुंबई

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इस आयोजन में अनुशासन सबसे प्रभावशाली रहा। न शोर, न भीड़ का दबाव और न ही किसी तरह की अव्यवस्था। श्वान आराम से अपनी बारी का इंतजार करते दिखे, जो आयोजन की उत्कृष्टता को दर्शाता है।

गौरव, सहारनपुर

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श्वानों की ग्रूमिंग देखकर लगा कि उनके मालिक व हैंडलर कितनी मेहनत करते हैं। कोट शाइनिंग, साफ सफाई, पैर व दांतों की देखभाल हर चीज अद्भुत थी। यह सब देखकर समझ आता है कि यह शौक कितना गंभीर और संवेदनशील है।

दिप्तीमान सेन गुप्ता, कोलकाता

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यह शो बच्चों के लिए भी बेहद खास रहा। उन्होंने श्वानों को नजदीक से देखा, उनके व्यवहार को समझा और जिम्मेदार तरीके से उनसे दूरी रखकर भी उनसे जुड़ाव महसूस किया। यह सच में शिक्षाप्रद अनुभव था।

जगवीर सिंह, बरेली

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इस शो ने साफ दिखा दिया कि प्रशिक्षण ही किसी श्वान की असली पहचान होती है। उनकी प्रतिक्रिया, आदेश पालन, चाल और स्थिरता देखकर लगा कि हैंडलर्स ने बेहद मेहनत से उन्हें तैयार किया है।

अर्शदीप सिंह, बरेली

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हैंडलर्स के बीच आपसी सहयोग और श्वानों के प्रति उनका स्नेह देखना दिल को छू गया। प्रतियोगिता होते हुए भी माहौल दोस्ताना रहा और सभी ने एक-दूसरे की सहायता की। यह बहुत सुंदर लगा।

तोशेंद्र, बरेली

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मेरे श्वान को नए माहौल में आमतौर पर हिचकिचाहट होती है, लेकिन यहां का शांत वातावरण उसे तुरंत सहज कर गया। यह आयोजन श्वानों के लिए अनुकूल माहौल देता है, जो बहुत बड़ी बात है।

श्यामवीर, दिल्ली

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Sunil Kumar

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Sunil Kumar

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