मनमानी पार्किंग शहर के लिए बड़ा खतरा

मनमानी पार्किंग शहर के लिए बड़ा खतरा

संक्षेप:

दिल्ली के लाल किले के पास चलती कार में हुए धमाके ने पूरे देश को हिला दिया है। इस धमाके की गूंज अलीगढ़ तक सुनाई दी, जहां प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी कर दिया। लेकिन शहर की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां दर्जनों पार्किंग स्थल ऐसे हैं जो खुद सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं। 

Nov 14, 2025 05:53 pm ISTSunil Kumar हिन्दुस्तान
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दिल्ली में हुए धमाके के बाद अलीगढ़ पुलिस व प्रशासन ने शहर में सुरक्षा जांच अभियान तेज किया है। सड़कों से लेकर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल और बाजारों तक सख्ती बढ़ाई गई है। लेकिन बोले अलीगढ़ की टीम ने जब शहर के पार्किंग स्थलों की हकीकत देखी, तो तस्वीर बेहद चिंताजनक मिली। शहर में रेलवे स्टेशन सिविल लाइन साइड, मालगोदाम साइड, शाहकमाल रोड, अंबोलिया, कोटा बाग कंपाउंड, किशनपुर तिराहा स्थित मॉल, मसूदाबाद बस स्टैंड के समीप और सैटेलाइट बस स्टैंड आदि इलाकों में पार्किंग हैं। इन सभी में सुरक्षा व्यवस्था नदारद पाई गई। नगर निगम के रिकॉर्ड में केवल कचहरी की पार्किंग ही अधिकृत रूप से दर्ज है, जबकि हकीकत में शहर में 20 से अधिक पार्किंग स्थल संचालित हो रहे हैं।

अचल रोड पर संवाद के दौरान लोगों ने बताया कि पार्किंग स्थलों पर कोई भी व्यक्ति महज 10 या 20 रुपये देकर गाड़ी खड़ी कर देता है। न कोई एंट्री रजिस्टर, न पहचान पूछताछ, न ही वाहन जांच। कर्मचारियों को सिर्फ किराया लेने और वाहन नंबर लिखने भर की फिक्र रहती है। कई जगह बिना नंबर की गाड़ियां तक खड़ी देखी गईं, जिन पर किसी की नजर नहीं जाती। और तो और, आग लगने या हादसे की स्थिति में बचाव के इंतजाम भी नदारद हैं। कुछ स्थानों पर अग्निशमन यंत्र लगे जरूर हैं, लेकिन उनकी वैधता महीनों पहले खत्म हो चुकी है। कई पार्किंगों में तो पानी या रेत तक का इंतजाम नहीं है। ऐसे में किसी संदिग्ध गतिविधि या विस्फोटक से भरी गाड़ी का खड़ा हो जाना पूरे शहर के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। लोगों का कहना है कि बिना अनुमति चल रही पार्किंगों पर निगरानी और सुरक्षा जांच अनिवार्य की जानी चाहिए। शहर में सुरक्षा अलर्ट के बावजूद इन स्थलों पर प्रशासन की लापरवाही सवाल खड़े कर रही है। अगर समय रहते इन पार्किंगों को नियमानुसार पंजीकृत कर सुरक्षा मानकों से नहीं जोड़ा गया, तो अलीगढ़ के लिए ये पार्किंग स्थल किसी बड़े हादसे की पृष्ठभूमि बन सकते हैं।

शहर की पार्किंग में सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी

शहर की अधिकांश पार्किंगों में सुरक्षा उपकरणों की हालत बेहद चिंताजनक है। पड़ताल के दौरान पार्किंग स्थलों पर अग्निशमन यंत्र या तो पूरी तरह नदारद मिले या महीनों पहले ही उनकी एक्सपायरी डेट समाप्त हो चुकी है। कई स्थानों पर सुरक्षा दिखाने के लिए केवल खाली सिलेंडर टांग दिए गए हैं, जिनमें गैस तक नहीं बची। रेलवे पार्किंग, बस स्टैंड, मालगोदाम साइड की पार्किंगों में फायर सेफ्टी की कोई भी उचित व्यवस्था नहीं है। कुछ स्थानों पर तो कर्मचारियों को यह तक नहीं पता कि अग्निशमन यंत्र का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। आपात स्थिति में अगर किसी वाहन में आग लग जाए, तो स्थिति संभालना नामुमकिन हो जाएगा। लोगों का कहना है कि पार्किंग स्थल, जहां सैकड़ों वाहन रोजाना खड़े रहते हैं, वहां फायर सेफ्टी सबसे पहला नियम होना चाहिए। लेकिन नगर निगम और संचालकों की लापरवाही ने इस मूलभूत जरूरत को मजाक बना दिया है। कहीं उपकरण एक्सपायर हैं, तो कहीं रखे ही नहीं गए। यह स्थिति किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

शहर में सिर्फ एक पार्किंग ही वैध बाकी सभी अवैध

नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि पूरे शहर में केवल कचहरी की पार्किंग ही अधिकृत और वैध रूप से पंजीकृत है। जबकि शहर में 20 से अधिक पार्किंग स्थल प्रतिदिन संचालित हो रहे हैं। रेलवे स्टेशन, सिविल लाइन, मालगोदाम, शाहकमाल रोड, कोटा बाग कंपाउंड, किशनपुर तिराहा, शहर के कई मॉल, बस स्टैंड और सैटेलाइट बस स्टैंड जैसे स्थानों पर पार्किंग चल रही हैं।

लेकिन इनमें से एक भी नगर निगम से स्वीकृत नहीं है। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है। इन पार्किंगों से रोजाना हजारों रुपये की वसूली हो रही है, लेकिन न कोई कर जमा होता है, न सुरक्षा मानकों का कोई पालन होता है। न तो इन स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, न ही कोई वैध अनुबंध है। कई जगह तो पार्किंग कर्मियों के पास कोई पहचान पत्र तक नहीं होता। पार्किंग स्थल पर तैनात कर्मचारी को पहचानना मुश्किल हो जाता है। ये केवल पार्किंग के समय रूपये लेते समय ही दिखाई पड़ते है, बाद मे ये कहा नदारद हो जाते है, पता ही नहीं चलता।

रेलवे स्टेशन पर टूटी बाउंड्री से असुरक्षा की दरार

रेलवे स्टेशन सिविल लाइन साइड वाहन पार्किंग की बाउंड्री पिछले करीब दो साल से टूटी हुई है। नगर निगम द्वारा स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कार्य चल रहा है। जिसके चलते करीब दो साल पहले रेलवे स्टेशन पार्किंग की दीवार को गिराया गया था। जहां वाहन खड़े होते हैं। इस जगह से कोई भी व्यक्ति या वाहन बिना जांच के आसानी से अंदर आ सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से यह बेहद खतरनाक स्थिति है। यात्रियों का कहना है कि कई बार इस बाउंड्री से लोग शॉर्टकट बनाकर पार्किंग में घुस जाते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था बेअसर हो गई है। यह टूटी दीवार अब शहर की सुरक्षा में सबसे कमजोर कड़ी बन गई है।

बोले लोग

पार्किंग संचालकों से हर महीने लाखों रुपये की वसूली होती है, लेकिन सरकार और नगर निगम दोनों ने ही अपनी की आंखें बंद कर रखी हैं। इस अव्यवस्था पर जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

केके गुप्ता

पार्किंग स्थलों पर कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लग हुए हैं। अगर चोरी या विस्फोट जैसी अप्रिय घटना घटित हो जाए तो कोई फुटेज तक नहीं मिलती। यह बेहद गंभीर लापरवाही है। इस ओर जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए।

लाजपत वार्ष्णेय

वर्तमान में शहर के हर गली-मोहल्ले में अवैध रूप से पार्किंग चल रही है। पुलिस को हफ्ते के भीतर इन अवैध पार्किंग का सर्वे कर बंद कराना चाहिए, वरना ये जगहें अपराधियों के अड्डे बन जाएगी।

भुवनेश गुप्ता

शहर में पार्किंग की हालत देखकर डर लगने लगा है। कोई भी गाड़ी कहीं भी खड़ी कर देता है, किसी को कोई परवाह नहीं। अगर कोई संदिग्ध वाहन खड़ा हो जाए, तो किसी को पता भी नहीं चलेगा। यह लापरवाही शहर की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

मुकुट बिहारी

हर पार्किंग पर लिख दिया जाता है वाहन मालिक स्वयं जिम्मेदार, लेकिन सुरक्षा कौन करेगा। न कोई कैमरा, न रजिस्टर, न जांच। नगर निगम को ऐसे स्थलों की तुरंत जांच करानी चाहिए।

महेश चंद्र वार्ष्णेय

आज कल पार्किंग सिर्फ कमाई का एक जरिया बन गई हैं। किसी को सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है। पैसे लेकर बस पर्ची दे दी जाती है। अगर कोई आपराधिक गतिविधि हो जाए तो जवाबदेही किसकी होगी।

गौरव सरना

पार्किंग स्थलों पर कोई नियम नहीं है। कोई व्यक्ति 10 रुपये देकर बिना नंबर की गाड़ी लगाता है, और कर्मचारी बस आंख मूंद लेते हैं। यह लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है।

देवेंद्र शर्मा

दिल्ली जैसी घटनाओं के बाद भी अगर प्रशासन नहीं जागेगा तो देर हो जाएगी। पार्किंग शहर की सुरक्षा में सबसे कमजोर कड़ी बन चुकी हैं, जहां कोई भी संदिग्ध वाहन रख सकता है।

विवेक गुप्ता

हमने खुद देखा है कि कुछ पार्किंगों में गाड़ियां हफ्तों तक खड़ी रहती हैं, लेकिन कोई नहीं पूछता कि मालिक कौन है। ऐसे में अपराधियों को खुली छूट मिल जाती है।

विकास माहेश्वरी

नगर निगम के रिकॉर्ड में सिर्फ एक पार्किंग दर्ज होना अपने आप में शर्मनाक है। बाकी सब पार्किंग कैसे चल रही हैं। यह बड़ा सवाल है जिस पर प्रशासन को जवाब देना चाहिए।

विक्की गुप्ता

कई बार पार्किंग में आग लगने या शॉर्ट सर्किट की घटनाएं हुई हैं, लेकिन फायर सेफ्टी का कोई इंतजाम नहीं है। पुराने अग्निशमन यंत्र सिर्फ दिखावे के लिए टंगे रहते हैं।

सूरज श्रीवास्तव

स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास की पार्किंग में न कोई पुलिस की मौजूदगी है और न कोई चेकिंग। ये जगहें तो सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं, लेकिन सबसे ज्यादा उपेक्षित भी।

दीपक वार्ष्णेय

जब भी कोई बड़ी घटना होती है, कुछ दिन जांच बढ़ा दी जाती है, फिर सब पहले जैसा हो जाता है। यह सिर्फ औपचारिकता नहीं, जनता की सुरक्षा का सवाल है।

आशीष शर्मा

अलीगढ़ का नाम पहले भी आतंकियों के ठिकाने के रूप में लिया जा चुका है। ऐसे में सुरक्षा को लेकर इतनी ढिलाई बहुत खतरनाक हो सकती है। यह चेतावनी नहीं, खतरे की घंटी है।

मधुकर आर्य

कई पार्किंगों में तो प्रवेश और निकासी का कोई नियंत्रण ही नहीं है। एक ही गेट से सब कुछ होता है। सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद खतरनाक स्थिति है। इसमें सुधार होना चाहिए।

तनुज वार्ष्णेय

अगर ये पार्किंगें नगर निगम के नियंत्रण में नहीं हैं तो जनता से लिया जा रहा पैसा भी अवैध है। शहर की सुरक्षा के साथ साथ ये आर्थिक भ्रष्टाचार का भी मामला है।

मनोज गुप्ता

किसी भी सार्वजनिक स्थल की सुरक्षा तभी मजबूत होती है जब जिम्मेदारी तय हो। पार्किंग में न किसी का नाम है, न पहचान। यह व्यवस्था नहीं, लापरवाही का जाल है।

कैलाश माहेश्वरी

दिल्ली में धमाके जैसी घटना किसी भी शहर में दोहराई जा सकती है अगर पार्किंग जैसी जगहों को यूं ही खुला छोड़ दिया गया। प्रशासन को इस खतरे को गंभीरता से लेना चाहिए और अवैध पार्किंग को बंद करना चाहिए। भुवनेश शर्मा

Sunil Kumar

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