
यूपी में अब बच्चों के इस कफ सिरप को लेकर अलर्ट, बिक्री पर तत्काल रोक, जिले-जिले में जांच
मानक से ज्यादा एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) की मात्रा पाए जाने पर एलमांट किड सिरप की बिक्री पर रोक के बाद उसकी जांच औषधि निरीक्षकों ने शुरू कर दी है। यह सिरप बच्चों को एलर्जी, खांसी या अस्थमा के इलाज में दिया जाता है।
यूपी कोडीन कफ सिरप का मामला छाया हुआ है। करोड़ों की सिरप पकड़ी जा चुकी है और बेचने वालों पर शिकंजा लगातार कसा जा रहा है। अब बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एक सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। 'एलमांट किड' (Almont Kid) सिरप में जहरीला तत्व मिलने की बात सामने आई है। पता चला कि इस सीरप में मानक से अधिक मात्रा में घातक रसायन एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) है। ऐसे में इस सिरप की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के निर्देश पर जिले-जिले में इसकी जांच शुरू हो गई है। खास बैच के सिरप को सील करने का आदेश दे दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला तब प्रकाश में आया जब तेलंगाना के औषधि नियंत्रण प्रशासन ने इस सिरप की लैब टेस्टिंग की। जांच में पाया गया कि सिरप में एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है। इसके बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) कोलकाता ने देशव्यापी अलर्ट जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार स्थित 'ट्राइडस रेमेडीज' द्वारा निर्मित इस सिरप के एक बैच में गड़बड़ी मिली है। इस बैच का निर्माण जनवरी 2025 में हुआ था और इसकी एक्सपायरी दिसंबर 2026 निर्धारित है।
कितना खतरनाक है एथिलीन ग्लाइकॉल?
विशेषज्ञों के अनुसार, एथिलीन ग्लाइकॉल एक औद्योगिक विलायक है जिसका उपयोग कफ सिरप में मिठास या गाढ़ेपन के लिए अवैध रूप से किया जाता रहा है। बच्चों के लिए यह 'जहर' समान है। इसकी अधिक मात्रा से किडनी फेलियर, लिवर में सूजन, सांस लेने में तकलीफ और गंभीर स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है। बताया जाता है कि पहले भी कई देशों में कफ सिरप में इसी रसायन की मिलावट के कारण बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
सहायक आयुक्त (औषधि) के निर्देश पर यूपी के तमाम जिलों में मेडिकल स्टोरों और थोक विक्रेताओं के यहां इस सिरप की जांच शुरू कर दी गई है। औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह संबंधित बैच नंबर के सिरप की उपलब्धता और भंडारण की जांच करें। स्टॉक मिलने पर उसे तुरंत सील कर नमूने लैब भेजें। वितरण और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों (इन्वॉयस) को खंगालें ताकि यह पता चल सके कि सिरप किन-किन अस्पतालों या दुकानों तक पहुंचा है।
माता-पिता और डॉक्टरों के लिए परामर्श
प्रशासन ने अपील की है कि अगर किसी के पास इस ब्रांड का सिरप रखा है तो उसे बच्चों को कतई न दें। आमतौर पर यह दवा एलर्जी, खांसी और अस्थमा के इलाज के लिए डॉक्टरों द्वारा लिखी जाती है। एफएसडीए की टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे इस कार्रवाई की रिपोर्ट सीधे मुख्यालय को भेजें। किसी भी लापरवाही पर संबंधित डीलर या फार्मा कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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