
अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद मां का ब्लड प्रेशर बढ़ा, परिवार बोला हम हैं साथ
ड्राइंगरूम में बैठे अलंकार के ताऊ, सेवानिवृत्त विंग कमांडर एसके अग्निहोत्री ने बताया कि अलंकार ने परिवार में किसी को भी अपने इस्तीफे के बारे में पहले से नहीं बताया था। इसकी जानकारी उन्हें बहू आस्था से मिली। परिवार ने आस्था को भरोसा दिलाया है कि इस फैसले में पूरा परिवार अलंकार के साथ खड़ा है।
कानपुर के केशवनगर डब्लू ब्लॉक स्थित एक सामान्य से दो मंजिला मकान में इन दिनों सन्नाटा और चिंता का माहौल है। इसी मकान में पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के परिजन रहते हैं। मकान के बाहर ‘जय बजरंगबली निवास’ लिखा बोर्ड लगा है। अंदर एक कमरे में उनकी मां गीता अग्निहोत्री आराम कर रही हैं। परिजनों के मुताबिक, बेटे के इस्तीफे की खबर के बाद उनका रक्तचाप बढ़ गया है और वे किसी से बातचीत नहीं कर रही हैं।
ड्राइंगरूम में बैठे अलंकार के ताऊ, सेवानिवृत्त विंग कमांडर एसके अग्निहोत्री ने बताया कि अलंकार ने परिवार में किसी को भी अपने इस्तीफे के बारे में पहले से नहीं बताया था। इसकी जानकारी उन्हें बहू आस्था से मिली। उन्होंने कहा कि परिवार ने आस्था को भरोसा दिलाया है कि इस फैसले में पूरा परिवार अलंकार के साथ खड़ा है। ताऊ के अनुसार, अलंकार यूजीसी के नए निमय और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े प्रकरण से आहत थे। अलंकार अग्निहोत्री के पड़ोसी शैलेंद्र पांडेय, श्रीप्रकाश, राजेंद्र अवस्थी, राधाकृष्ण त्रिपाठी, मनोज कुमार, सीताराम और विनय शंकर मिश्रा ने बताया कि अलंकार बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कॉलेज टॉप किया था। पड़ोसियों का कहना है कि वे ईमानदार अधिकारी रहे हैं और उन्होंने यूजीसी तथा बटुकों के साथ कथित बदसलूकी जैसे मुद्दों को उठाया, जिन्हें वे जायज मानते हैं। उनका कहना है कि किसी न किसी को आगे आना था और अलंकार ने यह जिम्मेदारी निभाई।
‘अलंकार ने जो किया, सोच-समझकर किया होगा’
अलंकार के ताऊ एसके अग्निहोत्री ने बताया कि इस्तीफे के बाद से उनकी अलंकार से सीधे बात नहीं हुई है, लेकिन बहू आस्था से संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि परिवार ने आस्था को धैर्य रखने को कहा है। ताऊ ने कहा, ‘अलंकार ने जो भी किया है, वह सोच-समझकर ही किया होगा। कुछ परेशानियां आएंगी, लेकिन परिवार उसके साथ हैं।’
बचपन में पिता का साया उठा, मां ने संभाला परिवार
अलंकार के पिता विजय अग्निहोत्री बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत थे। एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया था। परिजनों के अनुसार, अलंकार के पिता के निधन के बाद मां गीता अग्निहोत्री को बैंक में कैशियर की नौकरी मिली और उन्होंने अकेले दम पर सभी बच्चों की परवरिश की। सभी बच्चों ने बड़े शिक्षण संस्थानों से बीटेक किया। अलंकार के अलावा अन्य भाई-बहन बड़ी कंपनियों में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं।
एम्स्टर्डम में नौकरी के बाद बने पीसीएस अफसर
परिजनों के मुताबिक, अलंकार ने एम्स्टर्डम में करीब दस साल तक काम किया। इसके बाद भारत लौटे और पहले ही प्रयास में पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की। ताऊ एसके अग्निहोत्री ने परिवार के संघर्ष और अलंकार की मां गीता के योगदान पर ‘अनसंग लिटिल जाइंट्स’ नामक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें उनके संघर्षों का विस्तृत उल्लेख है।
सनातनी परंपराओं का पालन करता है परिवार
अलंकार का परिवार सनातनी परंपराओं का पालन करता है। ताऊ का कहना है कि वे भगवान राम के साथ-साथ रावण की विद्वता के भी सम्मानकर्ता हैं। उन्होंने बताया कि कानपुर में स्थित दशानन मंदिर, जो साल में एक बार खुलता है, वहां परिवार दशहरे पर पूजा करता है। श्याम नगर निवासी अलंकार के चचेरे भाई राजेश अग्निहोत्री ने कहा कि अलंकार का स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं है। वे पुलिस द्वारा ब्रह्मचारी बटुकों के साथ कथित बदसलूकी और यूजीसी के नए नियमों से अधिक आहत थे।

लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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