
अखिलेश दुबे का करीबी इंस्पेक्टर बर्खास्त, मां-बेटी को अवैध हिरासत में रखने का लगा था आरोप
संक्षेप: सस्पेंड चल रहे इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी को बर्खास्त कर दिया गया। उसे महिला और उसकी बेटी को अवैध तरीके से हिरासत में रखने और प्रताड़ना से महिला की आत्महत्या का दोषी पाया गया है। 15 नवंबर को समय पूरा होने पर देर रात संयुक्त पुलिस आयुक्त ने उसकी बर्खास्तगी पर मुहर लगा दी।
यूपी के कानपुर के चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे से यारी निभाने के आरोप में सस्पेंड चल रहे इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी को शनिवार को बर्खास्त कर दिया गया। उसे महिला और उसकी बेटी को अवैध तरीके से हिरासत में रखने व प्रताड़ना से महिला की आत्महत्या का दोषी पाया गया है। 15 नवंबर को समय पूरा होने पर देर रात संयुक्त पुलिस आयुक्त ने उसकी बर्खास्तगी पर मुहर लगा दी।

एनआरआई सिटी निवासी कारोबारी के घर से 17 अप्रैल 2022 को जेवर चोरी हो गए थे। उस समय नवाबगंज के थाना प्रभारी आशीष द्विवेदी और चौकी इंचार्ज रानू रमेश चंद्र थे। इन लोगों ने कारोबारी के यहां काम करने वाली किशोरी और उसकी मां को पूछताछ के लिए उठाया था। मां-बेटी को पूछताछ के बाद रात करीब दो बजे वन स्टॉप सेंटर में दाखिल कराया था। दूसरे दिन महिला ने बाथरूम में फंदा लगाकर जान दे दी थी। विभागीय जांच में आशीष और रानू रमेश चंद्र दोषी पाए गए। इस पर आशीष और रानू रमेश को बर्खास्तगी का नोटिस दिया गया। आशीष की ओर से जवाब न आया तो उसे बर्खास्त कर दिया गया। भाजपा नेता रवि सतीजा का आरोप है कि अखिलेश की शिकायत करने पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचे तो पीआरओ इंस्पेक्टर आशीष ने गाड़ी में बैठा लिया। कहा कि कमिश्नर मदद नहीं करेंगे। ले चल रहा हूं। आशीष अखिलेश के घर ले गया था।
बगैर रिपोर्ट दर्ज किए मां-बेटी को थाने बुलवा लिया था
पुलिस सेवा से बर्खास्त किया गया निलंबित इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी अप्रैल 2022 में चोरी के मामले में बगैर मुकदमा दर्ज किए ही मां-बेटी को थाने बुलवा लिया था। चोरी एनआरआई सिटी में रहने वाले कारोबारी के घर में हुई थी। मां-बेटी कारोबारी के घर में काम करतीं थीं। उस समय आशीष द्विवेदी नवाबगंज थाना प्रभारी था। उसके कहने पर ही दरोगा रानू रमेश चंद्र मां-बेटी को पकड़कर लाया था।
अखिलेश दुबे से दोस्ती निभाने के भी लगे हैं आरोप
भाजपा नेता रवि सतीजा ने अखिलेश दुबे और उसके साथियों पर अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज कराई थी। रवि सतीजा ने आरोप लगाया था कि जब वह फर्जी रेप केस की शिकायत लेकर पुलिस आयुक्त से मिलने पहुंचे तो आशीष उन्हें अखिलेश दुबे के यहां ले गया था। उस वक्त आशीष पुलिस आयुक्त कार्यालय में पीआरओ था। शिकायत के बाद हुई जांच में आशीष द्विवेदी और अखिलेश दुबे में संपर्क होने की बात सामने आई थी।
एसआई पर चल रही कार्रवाई
संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय, विनोद कुमार सिंह ने बताया कि निलंबित इंस्पेक्टर आशीष को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उस पर अपने कर्तव्यों और दायित्वों का निर्वहन न करने का आरोप था, जो विभागीय जांच में सही पाया गया है। इस घटना में शामिल रहे एसआई पर कार्रवाई चल रही है।
दरोगा को भी दिया जा चुका नोटिस
दरोगा रानू रमेश चंद्र को भी इसी मामले में दोषी पाते हुए बर्खास्तगी का नोटिस दिया जा चुका है। संयुक्त पुलिस आयुक्त के मुताबिक उसे भेजे गए नोटिस का समय पूरा होने में अभी 15 दिनों का वक्त है। उसका जवाब नहीं आया तो उसे भी सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
डायल 112 में ट्रांसफर के बाद से नहीं किया था जॉइन
पुलिस आयुक्त कार्यालय में रहते हुए भी आशीष पर अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे। तत्कालीन पुलिस आयुक्त अखिल कुमार ने आशीष को डायल 112 में स्थानांतरित कर दिया था। आशीष ने वहां जॉइन नहीं किया। स्लिप डिस्क होने की जानकारी देकर गायब हो गया। इसके बाद उसे निलंबित किया गया था। नवाबगंज प्रकरण की जांच शुरू हुई तो वह दोषी पाया गया और अब बर्खास्त कर दिया गया।





