यूपी में पंचायत चुनाव से पहले प्रधानों की टेंशन बढ़ी, दो वजहों से हैं परेशान; डिटेल में जानें

Feb 08, 2026 08:23 pm ISTAjay Singh हिन्दुस्तान टीम, महाराजगंज
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प्रधानों की टेंशन बढ़ गई है। इन दो वजहों से चुनाव समय से होगा या इसकी तारीख आगे बढ़ेगी इसको लेकर संशय बना हुआ है, जिससे प्रधान और संभावित उम्मीदवार खुलकर खर्च नहीं कर रहे हैं। 2021 के पंचायत चुनाव के लिए अधिसूचना मार्च में जारी हो गई थी। मई में चुनाव पूरा हो गया था।

यूपी में पंचायत चुनाव से पहले प्रधानों की टेंशन बढ़ी, दो वजहों से हैं परेशान; डिटेल में जानें

UP Panchayat Chunav: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अटकलों का दौर कम नहीं हो रहा है। चुनाव के लिए आरक्षण जारी नहीं होने और एसआईआर की प्रक्रिया की तारीखों को एक बार फिर एक महीने के लिए बढ़ा दिए जाने से प्रधानों की टेंशन बढ़ गई है। इन दो वजहों से चुनाव समय से होगा या इसकी तारीख आगे बढ़ेगी इसको लेकर संशय बना हुआ है, जिससे प्रधान और संभावित उम्मीदवार खुलकर खर्च नहीं कर रहे हैं। 2021 के पंचायत चुनाव के लिए अधिसूचना मार्च में जारी हो गई थी और मई में चुनाव पूरा हो गया था। 2021 के प्रधानों और सदस्यों का कार्यकाल जून 2026 में पूरा हो जाएगा। लेकिन अब तक केवल परिसीमन की कार्यवाही पूरी हो सकी।

मतदाता पुनरीक्षण का काम भी 28 मार्च तक पूरा होगा। वहीं आरक्षण को लेकर कोई कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी है। पिछड़ी जातियों के आरक्षण को लेकर कोई रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई है। बताया जाता है कि रिपोर्ट तैयार करने में ही दो से चार महीने लग सकते हैं। इसके बाद ग्राम और वार्डवार पदों का आरक्षण जारी होगा। चुनाव की अधिसूचना जारी होगी।

इधर, एसआईआर में दावे-आपत्ति की तारीख 6 मार्च तक बढ़ा दी गई है। एसआईआर करने वाले बीएलओ ही पंचायत चुनाव भी कराएंगे। ऐसे में मार्च तक मदताता संबंधी ही कार्य होंगे। यदि अभी आरक्षण को लेकर कार्यवाही आगे बढ़ी तो वह अप्रैल या मई तक जा सकता है। लेकिन अभी इसकी भी उम्मीद नहीं है। ऐसे में चुनाव समय से होंगे या देरी से होंगे इसको लेकर संशय बना हुआ है।

यूं तो चुनाव लड़ने के लिए वर्तमान प्रधान और सदस्य लगे हुए हैं लेकिन आरक्षण और तारीख स्पष्ट नहीं होने से वे खुलकर प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि कुछ लोगों ने तो गांवों में होर्डिंग बैनर लगाकर संकेत दे दिया है मौका मिला तो वह चुनाव मैदान में जरूर कूदेंगे। नए चेहरे वाले संभावित उम्मीदवारों ने भी वर्तमान प्रधान को पटखनी देने के लिए कमर कसना शुरू कर दिया है। समय पूरा होते ही समाप्त हो जाएगा अधिकार प्रधानों का कार्यकाल पांच वर्ष के लिए होता है।

पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के पहले यदि चुनाव नहीं होता और चुनाव देरी से होता है तो ग्राम पंचायत के कार्यों का संचालन प्रशासक करते हैं। ऐसे में मई-जून तक भले ही चुनाव न हो लेकिन प्रधानों का सभी अधिकार स्वत: ही समाप्त हो जाएगा। लेकिन कुछ लोगों को भ्रम है कि चुनाव जितने माह के लिए आगे बढ़ेगा उनका उतना माह और कार्य करने का मौका मिल जाएगा।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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