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आगरा में कुपोषण से जंग को सिर्फ पंजीरी!

आगरा में कुपोषण से जंग को सिर्फ पंजीरी!

बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जंग लड़ी जा रही है, मगर यह जंग बिना पुष्टाहार और पोषाहार के चल रही है। जी हां, शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों के इन दिनों यहीं हालात हैं। यहां न तो पुष्टाहार है और न ही पोषाहार। छोटी सी कोठरी में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों पर गिने चुने बच्चे पहुंचते हैं। खानापूरी को पंजीरी बांटकर उन्हें विदा कर दिया जाता है। बना हुआ पुष्टाहार भी कभी कभार केंद्रों तक पहुंचता है। शुक्रवार को केंद्रों की पड़ताल में कुछ इसी तरह के हालात नजर आए। बच्चों में बढ़ रहे कुपोषण को लेकर प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये कुपोषण से जंग लड़ने की तैयारी शुरू की। कुपोषित बच्चों और जन्म से पहले गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार और पोषाहार खिलाने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्रों के हवाले की गई। इस कारण आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय भी बढ़ाया गया। शासन और प्रशासन की प्राथमिकता में शुमार केंद्रों पर हर जरूरी सुविधाओं के निर्देश भी जारी हुए थे। मगर इसके बाद भी जिले के केंद्रों के हालात बिगड़े हुए हैं। बर का नगला आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 10 बजे केंद्र के बाहर सेविका खड़ी हुई थीं। केंद्र किसी भी तरीके से नहीं लग रहा था कि यहां आंगनबाड़ी केंद्र चलता है। जब सेविका से पूछा तो वह बच्चों को लेकर आयी। बच्चों को दो -दो चम्मच पंजीरी का वितरण किया। जब पूछा गया कि कुछ और नहीं दिया जाता है। तो सेविका का कहना था कि एक महीने से कुछ आया ही नहीं है। वहीं अक्षयपात्र से बना-बनाया खाना आता है, कभी नहीं भी आता। यह केंद्र एक छोटे से कमरे में चलता है। केंद्र शिवपुरी, आंगनबाड़ी केंद्र बल्केश्वर शिवपुरी में जब सेविका से फोन करके पूछा तो उन्होंने बताया कि केंद्र पर ही हैं। लेकिन केंद्र पर पहुंचे तब उन्होंने 11 बजे के करीब ताला खोला। एक आधी बाल्टी दलिया लेकर बदहवास सी पहुंची और बच्चों को बुलाने के लिए आवाज लगाती रही। लेकिन बच्चों ने दलिया लेने से इंकार कर दिया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि रोज पुष्टाहार नहीं मिलता। वहीं वजन मशीन के नाम पर टीन का एक गोलाकार टुकड़ा रखा हुआ था। लाल मस्जिद, आंगनबाड़ी केंद्र लगभग 11:30 बजे लाल मस्जिद का आंगनबाड़ी केंद्र गलियों के अंदर एक कमरे में चलता मिला। जहां सेविका नहीं थी। मकान मालिक थी। जो अपने बच्चे को किराए पर दिए कमरे में सुला रही थी। जब बात की तो स्थानीय महिलाओं का कहना है कि यहां बच्चों को कुछ नहीं मिलता कभी-कभी पंजीरी मिल जाती है। मगर गर्भवती महिलाओं को तो कभी कुछ नहीं मिला। कई बार यहां हंगामा भी हो चुका है। ईदगाह कटघर, आंगनबाड़ी केंद्र सुबह नौ बजे ईदगाह कटघर पर आंगनबाड़ी केंद्र पर कोई नहीं मिला। ताला बंद था। जब आस-पास के लोगों से पूछा तो उन्होंने बताया कि केंद्र तो ऐसे ही खुलता है। कभी-कभार खुल जाता है। जब खुलता है, बच्चों को पंजीरी दे दी जाती है । इसके अलावा यहां कुछ नहीं मिलता यह केंद्र ज्यादातर बंद ही रहता है। वहीं इस केंद्र पर भी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं लिखा था। लोगों ने बताया कि इस कारण पता ही नहीं चलता कि यहां केंद्र भी है। मोहनपुरा आंगनबाड़ी केंद्र सुबह साढे़ नौ बजे मोहनपुरा आंगनबाड़ी केंद्र पर भी ताला लगा पाया गया। यहां पर भी आंगनबाड़ी केंद्र एक कोठरी में चलता नजर आया। कुछ बच्चे इंतजार करते दिखे। स्थानीय लोगों से बातचीत की गई । तो उनका कहना था कि यहां केंद्र कभी कभार ही खुलता है। यहां कभी-कभार मैडम आती हैं जो बच्चों को पंजीरी बांटकर चली जाती हैं। बच्चे भी पंजीरी लेकर चले जाते हैं। बच्चों को कुपोषण से दूर करने के लिए सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। जगनपुर आंगनबाड़ी केंद्र जगनपुर चौपाल में आंगनबाड़ी केंद्र टूटे-फूटे खंडहर में चलाया जाता है। यहां पर भी कोई बोर्ड या सिंबल नहीं था। जिससे पता लग सके कि यहां कोई आंगनबाड़ी केंद्र चलता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई दिनों से केंद्र खुला ही नहीं है। न ही यहां कुछ वितरित किया जाता है। हिन्दुस्तान की टीम यहां काफी देर तक रही, मगर तब तक केंद्र ही नहीं मिला। लोगों ने कहा कि ये हालात यहां आए दिन के हैं। ईदगाह कटघर वार्ड-22, आंगनबाड़ी केंद्र आंगनबाड़ी केंद्र वार्ड नं 22 ईदगाह कटघर पर हालात कुछ सुकून वाले मिले। केंद्र खुला मिला। जहां सेविका और सहायिका दोनों मिली। बच्चों की संख्या भी ठीक-ठाक थी। साथ ही वजन करने वाली मशीन और बच्चों को पोषाहार भी दिया जा रहा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस केंद्र पर अन्य जगहों की अपेक्षा हालात बेहतर हैं। स्टाफ नियमित रूप से आता है। देखना यह होगा कि यहां के हालात ठीक रहेंगे या फिर अन्य केंद्रों जैसा हाल हो जाएगा। योजना के तहत मिलते हैं यह लाभ - - कुपोषित बच्चों को पौष्टिक आहार देने का प्रावधान है। इसके साथ ही अन्य बच्चों को पोषाहार और सप्ताह में मीनू के हिसाब से पका हुआ भोजन दिया जाता है। - 0-6 साल तक के बच्चों का टीकाकरण एवं हर सप्ताह वजन होता है। किसी भी केंद्र में वजन करने वाली मशीन नहीं मिली। - जिले में 2930 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जो ग्रामीण अंचल में ज्यादातर निजी भवनों में चल रहे हैं। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्र में किराए पर चलते हैं। - केंद्र में दो कमरे, आंगन और खेलकूद का मैदान अनिवार्य है। - एक केंद्र पर 150 से अधिक बच्चों को बेसिक शिक्षा एवं देखरेख के लिए रखा जाता है। - गर्भवती महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है। टीकाकरण भी किया जाता है। इसके साथ ही गोद भराई योजना के तहत महिलाओं को पौष्टिक आहार के रूप में राशन और घी भी दिया जाता है। शहरी क्षेत्र में अधिकांश केंद्र किराये पर संचालित हो रहे हैं। केंद्र लगातार खुलते हैं, अगर नहीं खुलने की सूचना मिलती है तो उन पर कड़ाई कर नियमानुसार खुलवाया जाता है। मई व जून में पोषाहार मांग से आधा मिला है, इस कारण दिक्कतें हुई हैं। पुन: टेंडर कर खरीद की प्रक्रिया चल रही है। केंद्रों के हालात और बेहतर किए जाएंगे। - आरके चौधरी, डीपीआरओ।

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