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24 सितम्बर, 2020|11:42|IST

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तीन लाख के लिए किया था तिहरा हत्याकांड, खुलासा

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आगरा। प्रमुख संवाददाता

नगला किशनलाल (एत्मादुद्दौला) में हुए तिहरे हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के अंदर ही खुलासा कर दिया। पड़ोस में रहने वाले सुभाष ने अपने छोटे भाई गजेंद्र और दोस्त वकील के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया था। वारदात का तानाबाना लूट के लिए बुना गया था। सुभाष ने तीन लाख रुपये उधार दिए थे। अपनी रकम को सूद सहित वसूलने के लिए सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। रामवीर और उनके बेटे बबलू को अपने घर पर मारा था। उसके बाद मीरा की हत्या की। पूरा घर खंगालने पर सिर्फ 80 हजार रुपये और चांदी के कुछ जेवरात ही मिले। दोनों की लाश रात के अंधेरे में कंधे पर टांगकर लेकर आए थे। वारदात में शामिल गजेंद्र फरार है। उसकी भी पुलिस को सटीक लोकेशन मिली है।

रामवीर, उनकी पत्नी मीरा और बबलू की रविवार रात बेरहमी से हत्या की गई थी। सोमवार की सुबह तीनों के शव रसोई में जली हुई हालत में मिले थे। पोस्टमार्टम में साफ हुआ था कि रामवीर का मुंह दबाया गया था। बबलू का गला घोंटा गया था। मीरा के सिर पर प्रहार करके जिंदा जलाया गया था। पुलिस ने देर रात कालिंदी विहार सौ फुटा मार्ग पर मुठभेड़ में सुभाष और वकील को गिरफ्तार किया। दोनों के पैर में गोली लगी है। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि सुभाष का बबलू से गहरा याराना था। बबलू की रेलवे में नौकरी के लिए पिता ने तीन लाख रुपये में अपना प्लाट गिरवी रखा था। उसे छुड़ाने के लिए सुभाष से तीन लाख रुपये उधार लिए थे। सुभाष ने इस शर्त पर रकम दी थी कि पांच लाख रुपये वापस लेगा। लॉकडाउन में सुभाष पर कर्जा हो गया। वह अपनी रकम वापस मांग रहा था। रामवीर उसे टहला रहा था। सुभाष को अंदाजा था कि इसके घर पर पांच से सात लाख रुपये रखे होंगे। रामवीर ब्याज पर पैसा देता था। इसलिए उसने वारदात की साजिश रची। पुलिस ने बताया कि हत्यारोपियों ने जो भी लूटा था, पूरा ने पूरा माल बरामद कर लिया है।

कंधे पर टांगकर लाए थे पिता-पुत्र की लाश

क्रासर

मीरा को उनके ही घर में दबोचा था, सिर पर किया प्रहार

-पत्नी के ऊपर पति का शव रखकर लगाई थी आग

-सिलेंडर में गैस कम थी इसलिए नहीं लगी भीषण आग

आगरा। प्रमुख संवाददाता

नगला किशनलाल में तिहरा हत्याकांड रामवीर के घर पर ही नहीं हुआ था। पुलिस के अनुसार सुभाष ने रामवीर और उसके बेटे बबलू को अपने घर पर मारा था। तीनों हत्यारोपी पीड़ित के घर आए। मीरा को सोते समय दबोचा। सिर फोड़ दिया। हाथ-पैर और मुंह बांध दिए। एक घंटे तक पूरा घर खंगाला। करीब 80 हजार रुपये और चांदी के जेवरात ही मिले। उन्हें लूट लिया। अपने घर पहुंचा। एक-एक करके पिता-पुत्र की लाश को उनके घर लेकर आया। तीनों को रसोई में ले गए। सिलेंडर में गैस कम थी। इसलिए मिट्टी का तेल डालकर आग लगाई और भाग गए।

एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि सुभाष और बबलू के घर में महज 50 मीटर की दूरी है। बबलू जिस कमरे में सोता था, उसमें भी एक दरवाजा है, जो पीछे गली में खुलता है। हत्यारोपी इसी दरवाजे से पिता-पुत्र के शव लेकर आए थे। सुभाष ने योजना के तहत रामवीर को रविवार की रात करीब सवा ग्यारह बजे बातचीत के लिए अपने घर बुलाया। रामवीर से अपने पैसे मांगे। उन्होंने समय मांगा। सुभाष उनसे बात कर रहा था। इसी दौरान गजेंद्र ने पीछे से उनका मुंह दबा दिया। उनकी मौत हो गई। एक हत्यारोपी बबलू को घर बुलाने आया। कहा कि उसके पिता बुला रहे हैं। जैसे ही बबलू सुभाष के कमरे में घुसा। तीनों उस पर टूट पड़े। उसे जमीन पर गिरा लिया। गले में मोबाइल चार्जर की डोरी कर दी। टेप से हाथ और पैर बांध दिए। बबलू ने भी दम तोड़ दिया। तीनों रात करीब 12 बजे पीछे के दरवाजे पीड़ित के घर में आए। मीरा को दबोच लिया। उन्हें भी मार दिया। घर में जो सामान मिला उसे एक बैग में भरकर ले गए। पहले बबलू और फिर उसके पिता रामवीर के शव को कंधे पर टांगकर लेकर आए। रसोई में शव रखकर आग लगा दी। गैस सिलेंडर में गैस होती तो यह घटना हादसे में तब्दील हो जाती। पुलिस को तीनों के हाथ-पैर बंधे नहीं मिले। शव भी राख हो जाते। मौत का कारण भी साफ नहीं हो पाता।

रात ढाई बजे गजेंद्र को बस में बैठाया

एसएसपी ने बताया कि सुभाष का छोटा भाई गजेंद्र मानेसर गुरुग्राम में मजदूरी करता है। रविवार की रात ढाई बजे सुभाष उसे बाइक से आईएसबीटी ले गया। वहां से गुरुग्राम के लिए बस में बैठा दिया। उसकी तलाश में एक टीम को मानेसर भेजा गया है। गजेंद्र वहां नहीं मिला। भागकर आगरा की तरफ ही आ गया है। उसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।

मां की गिरफ्तार, मिटाए साक्ष्य

पुलिस ने बताया कि सुभाष की मां एलमदेवी को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों बेटे जब वारदात कर रहे थे तो बबलू की चीख निकली थी। उससे उनकी मां की नींद खुल गई थी। उसने हत्या होते हुए अपनी आंखों से देखी। पहले अपने बेटों से कहा कि ये क्या कर दिया। बाद में साक्ष्य मिटाने में उनकी मदद की। जिस कमरे में हत्या की गई, वहां बबलू ने उल्टी और पेशाब कर दिया था। रात में ही हत्यारोपी की मां ने कमरे की सफाई कर दी। बस कुछ जानते हुए भी अनजान बनी हुई। सोमवार को विलाप करने वाली महिलाओं की भीड़ में वे भी शामिल थी। यह देख रही थी कि पुलिस क्या कर रही है। घरवाले पुलिस को क्या बता रहे हैं। सुभाष ने योजना के तहत शुरू में पुलिस को गुमराह कराने का प्रयास किया। यह अफवाह फैलाई की रामवीर की अपने भाइयों से नहीं बनती थी। पूरा परिवार इसलिए मारा गया है ताकि उनकी संपत्ति बाद में भाइयों को मिल जाए। पुलिस ने पहले इस नजरिए से भी जांच की थी, मगर दोपहर 12 बजे तक यह लाइन पूरी तरह बंद हो गई थी।

डायरी ने खोले राज, घेरे में आया सुभाष

क्रासर

-वकील को मिले थे महज पांच सौ रुपये, उम्मीद ज्यादा थी

-कागजात नहीं मिलते तो कुछ दिन उलझी हुई रहती पुलिस

आगरा। प्रमुख संवाददाता

बबलू के पिता रामवीर को पाई-पाई का हिसाब रखने की आदत थी। बबलू पिता की डायरी लिखता था। हत्यारोपी वारदात के बाद कैश और जेवरात तो बटोरकर ले गए मगर लिखापढ़ी के कुछ कागजात मौके पर ही छोड़ गए। एक डायरी भी उसमें शामिल थी। उस डायरी ने पुलिस को राह दिखाई। उसमें कई जगह सुभाष के नाम का जिक्र था। पुलिस उसके पीछे लग गई। पकड़ा गया तो सच कबूल कर लिया।

एसएसपी ने बताया कि रामवीर ने अपने बेटे की रेलवे में नौकरी के लिए पीएसी के एक रिटायर्ड सिपाही को 12 लाख रुपये दिए थे। एक रिटायर्ड फौजी ने भी अपने बेटे की नौकरी के लिए रकम दी थी। बबलू बीएससी पास था। आईटीआई भी कर रखी थी। 12 लाख रुपये देने के लिए रामवीर ने कर्जा भी लिया था। रामवीर ने नौकरी के लिए रकम देते समय सुभाष को भी गवाह बनाया था। सुभाष भी उसी एजेंट के जरिए अपनी रेलवे में नौकरी लगवाने के लिए प्रयासरत था। वर्तमान में उसके पास पैसे नहीं थे। वह परेशान चल रहा था। उस डायरी को पढ़ने के बाद पुलिस को लगा कि सुभाष ही इस परिवार का सबसे करीबी है। मोहल्ले में रह रहे रामवीर के दूसरे भाइयों ने भी इसकी पुष्टि की। रामवीर की कॉल डिटेल निकाली गई तो रविवार को पूरी रात वह जागा था। यह देखकर पुलिस को कुछ शक हुआ। उसके घर पहुंची तो वह घर पर भी नहीं मिला। उसकी मां प्रेमवती भी घबराई हुई थी। पुलिस का शक धीरे-धीरे यकीन में बदलता गया।

हत्यारोपियों का प्रोफाइल

सुभाष उम्र 28 साल। पढाई बीएससी, आईटीआई। सात भाई हैं। छह कमरों का मकान है। भाई गजेंद्र गुरुग्राम में मजदूरी करता है। रात को परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने कमरों में मौजूद थे। सो रहे थे। हत्या के दौरान मां एलनदेवी जाग गई थी।

वकील उम्र 25 साल। बेरोजगार है। पल्लेदारी करता है। पिता का देहांत हो चुका है। रहने का कोई ठिकाना नहीं। बड़ा भाई भी ज्यादा मतलब नहीं रखता। आवारा है।

रेलवे भर्ती गैंग पर भी कसेगा शिकंजा

एसएसपी ने बताया कि तिहरे हत्याकांड की जांच में रेलवे में भर्ती कराने के नाम पर ठगी करने वाले गैंग भी प्रकाश में आया है। इस गैंग पर शिकंजे के लिए एक टीम अलग से लगाई गई है। भर्ती गैंग का सरगना पीएसी का रिटायर्ड सिपाही बताया जा रहा है। गैंग का काम करने का अंदाज भी निराला है। बकायदा ट्रेनिंग के लिए भेजता है। नियुक्ति पत्र भी देता है। बाद में कोई न कोई दिक्कत बताकर वापस बुला देता है। कोई अपनी रकम का तगादा करे तो उससे बोलता है, किसी दूसरे को लेकर आओ। उससे जो रकम मिलेगी। उसमें से अपनी रकम वापस ले लेना। पीड़ित अपनी रकम निकालने के लिए किसी दूसरे को उसके जाल में फंसवा देते हैं। इस गैंग के बारे में और भी कई जानकारियां मिली हैं। एक रिटायर्ड फौजी ने अपने बेटे की नौकरी के लिए रकम दी थी। उसकी भी रकम डूब गई। अपनी रकम निकालने के लिए रिटायर्ड फौजी ने दूसरे परिचितों को आरोपित के जाल में फंसवा दिया। इस गैंग पर भी जल्द शिकंजा कसा जाएगा।

तिहरा हत्याकांड मिनट दर मिनट

30 अगस्त

रात ग्यारह बजे सुभाष बबलू के घर आया। उसके पिता रामवीर को बातचीत करने के लिए बुलाकर ले गया। अपने घर पर मार डाला।

साढ़े ग्यारह बजे बबलू को अपने घर बुलाया। उसे भी गला घोंटकर मार डाला।

12 बजे रात सुभाष, गजेंद्र व वकील तीनों पीछे के दरवाजे से बबलू के घर आए। उसकी मां को मारा। घर में एक घंटा रुके। जो मिला बटोरा।

रात एक बजे पहले बबलू के शव को कंधे पर टांगकर उसके घर तक लेकर आए।

रात सवा एक बजे पिता रामवीर के शव को इसी तरह लेकर आए।

रात डेढ़ बजे तीनों को रसोई में ले गए। पत्नी-पत्नी के शव एक दूसरे के ऊपर डाल दिए। आग लगा दी।

रात ढाई बजे सुभाष ने अपने भाई गजेंद्र को आईएसबीटी से बस में बैठाया।

31 अगस्त

सुबह छह बजे तिहरे हत्याकांड की जानकारी हुई।

रात ढाई बजे सुभाष और वकील मुठभेड़ में गिरफ्तार हुए। मां एलनदेवी को रात को ही घर से पकड़ा।

जैसी करनी वैसी भरनी, मार देती पुलिस

क्रासर

-पुलिस के खुलासे से संतुष्ट हैं रामवीर के खानदानी

-हत्यारोपी के परिजन बोले कहानी में हैं कई झोल

आगरा। प्रमुख संवाददाता

तिहरे हत्याकांड का इतनी जल्द खुलासा नहीं होता तो बवाल हो सकता था। पुलिस की तत्परता से रामवीर के परिजन संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि सुभाष ने जैसा किया, वैसा भरेगा। उसे पुलिस एनकाउंटर में मार देती तो अच्छा होता। पीड़ित और आरोपित दोनों के घर पास-पास हैं। पीड़ित परिवार के लोग आरोपित के घर पर धावा नहीं बोल दें, इस आशंका के चलते मौके पर अभी फोर्स तैनात रखा गया है।

वारदात में रामवीर का पूरा परिवार खत्म हो गया। बबलू इकलौता बेटा था। होनहार था। रिश्तेदार अपने बच्चों को बबलू की मेहनत का उदाहरण दिया करते थे। कहते थे कि उसे देखो। पढ़ाई भी करता है और दुकान भी चलाता है। परिजनों के पास अब उनकी सिर्फ यादें बची हैं। दादी किरनदेवी अभी भी गहरे सदमे हैं। कोई भी आता है तो फूट-फूटकर रोने लगती हैं। यही बोलती हैं कि उनके बहू बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था। रामवीर के भाइयों का कहना है कि पुलिस ने जैसा बोला था, वैसा ही करके दिखाया। सुभाष को उसे किए की सजा मिलेगी। बबलू उस पर अपने भाइयों से भी ज्यादा भरेासा करता था। उसने एक बार भी यह नहीं सोचा कि यह क्या कर रहा है। तीन लोगों को मार दिया। मीरा तो उसे बेटे की तरह मानती थी। बबलू जैसा ही प्यार करती थी। जब भी घर आता कुछ न कुछ खिलाकर ही वापस भेजती थी। कई बार ऐसा होता था जब सुभाष और बबलू दोनों साथ में ही खाना खाया करते थे। दोनों साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते थे।

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सात लाख रुपये का लालच में वारदात

रामवीर के भाइयों ने बताया कि सुभाष को सात लाख रुपये का लालच ले डूबा। पिछले दिनों रामवीर ने यह बोल दिया था कि उसके पास सात लाख रुपये हैं। उसे जमीन खरीदनी है। यह जानकारी सुभाष को भी हो गई थी। संभवत: उसने इन्हीं सात लाख रुपयों को लूटने के लिए तीन लोगों को मार डाला। तिहरे हत्याकांड के बाद भी उसे घर में इतनी रकम नहीं मिली।

बढ़ेगा अपराध, सोशल पुलिसिंग की है जरूरत

क्रासर

-लॉकडाउन के साइड इफेक्ट आ रहे हैं सामने, तीसरी बड़ी वारदात

-एसएसपी बोले जनता के साथ बैठकों का दौर करना पड़ेगा

-युवा मुसीबत में जल्दी हो जाते हैं गुमराह, यह राह सही नहीं है

आगरा। प्रमुख संवाददाता

सुभाष पर लॉकडाउन में कर्जा हो गया था। वकील को काम धंधा नहीं मिल रहा था। गजेंद्र की भी नौकरी चली गई थी। मजदूरी करने लगा था। तीनों को पैसों की जरूरत थी। सबसे ईजी टॉरगेट रामवीर नजर आया। उनके घर कितनी रकम होगी, यह किसी को नहीं पता था। सिर्फ अंदाजा था। एक नहीं तीन-तीन लोगों को मार डाला। पुलिस इसे कहीं न कहीं लॉकडाउन साइड इफेक्ट से जोड़कर देख रही है। ताजनगरी में यह पहली वारदात नहीं है। इससे पहले भी इसी वजह से कई घटनाएं हुई हैं।

सिकंदरा में रिटायर्ड शिक्षक के घर दिनदहाड़े डकैती भी इसी वजह से हुई थी। कैटरिंग का काम करने वाले बेरोजगार हो गए थे। वारदात करने पहुंच गए थे। शमसाबाद और फतेहाबाद में वाहन चोर हलवाई निकले थे। जयपुर से नौकरी जाने के बाद अपराध की राह पर चल निकले थे। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि पिछले डेढ़ माह में जो अपराध हुए हैं, उनमें ऐसे लोग पकड़े जा रहे हैं जो पेशेवर नहीं है। शातिर दिमाग है। नई उम्र के लड़के हैं। जरा सी मुसीबत में आपा खो बैठे। गलत राह पर चल निकले। ऐसे अपराध का ग्राफ बढ़ने की आशंका है। काम धंधा अभी भी पटरी पर नहीं लौटा है। ऐसे अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिसिंग में कुछ बदलाव की जरूरत है। सीएए का विरोध हुआ तो पुलिस ने गली-गली दस्तक दी थी। ऐसा ही इसमें भी करने की जरूरत लग रही है। मोहल्लों में कमेटियां बनाई जाएंगी। पुलिस अधिकारी मोहल्लों में जाया करेंगे। युवाओं के साथ बैठक किया करेंगे। उन्हें बताएंगे कि अपराध किस तरह युवाओं को सलाखों के पीछे ले जाता है।

टीम वर्क से आगरा पुलिस ने किया खुलासा

क्रासर

-एक साथ कई चुनौतियां आई थीं सामनें, सभी से निपटे

-कई थानों की पुलिस को दी गई थी अलग जिम्मेदारियां

आगरा। प्रमुख संवाददाता

नगला किशन लाल में तिहरा हत्याकांड किसी चुनौती से कम नहीं था। बवाल से लेकर प्रदर्शन तक की आशंका थी। आगरा पुलिस ने बड़ी सूझबूझ से न केवल पीड़ित का भरोसा जीता, बल्कि 24 घंटे से पहले वारदात का खुलासा कर दिया। पीड़ित परिवार को पुलिस से कोई शिकायत नहीं है। अधिकारी भी यही बोल रहे हैं कि मजबूत चार्जशीट तैयार की जाए।

एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने हरीपर्वत, छत्ता, सिकंदरा, न्यू आगरा, कमला नगर सहित कई थानों फोर्स मौक पर बुला लिया। भीड़ देखी तो पीएसी को भी बुला लिया। सभी पुलिसकर्मियों से एक ही बात कही कि किसी से अभद्रता नहीं करनी है। सिर्फ लोगों को यह लगे कि चारों तरफ पुलिस ही पुलिस है। पिछले एक साल में जो भी फाउंड्री नगर चौकी पर रहा है, उसे बुलाया गया। एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद, सीओ छत्ता विकास जायसवाल के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और एसओजी को लगाया गया। इंस्पेक्टर कमलेश सिंह, एसआई कुलदीप दीक्षित अपनी टीम के साथ सुरागरसी में जुट गए। एक टीम पीड़ित परिवार के साथ लगाई गई। पोस्टमार्टम हाउस पर सीओ कोतवाली चमन सिंह चावड़ा के नेतृत्व में टीम लगाई गई। पैनल से पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया गया। कोई न कोई सुराग मिल जाए, यह मानते हुए पोस्टमार्टम में कुछ घंटे का विलंब कराया गया। रात को शव आए तो उससे पहले चिताएं तैयार कराकर रखी गईं। ताकि अंतिम संस्कार के समय परिजनों को कोई परेशानी नहीं हो। कोई भीड़ को भड़काने का प्रयास नहीं करे। एसएसपी ने बताया कि वह स्वयं फाउंड्री नगर चौकी पर डेरा डालकर बैठ गए। पल-पल की रिपोर्ट सभी टीमों से लेते रहे। शाम छह बजे कुछ राहत की सांस आई। जब लगा कि घटना खुल जाएगी। सुभाष के नाम के रूप में एक लाइन पुलिस को मिली।

साक्ष्य बहुत कम, केस है कमजोर

पुलिस ने दो हत्यारोपियों को पकड़ा है। तिहरे हत्याकांड में इतने ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं, जितने डॉक्टर योगिता हत्याकांड में मिले थे। वहां वैज्ञानिक साक्ष्य बहुत थे। यहां वैज्ञानिक साक्ष्य के नाम पर अभी तक कुछ भी पुलिस के हाथ में नहीं है। कोर्ट में सजा दिलाने के लिए साक्ष्यों का अभाव है।

-हत्यारोपी सुभाष के घर से पुलिस ने रामवीर की डायरी और जेवरात बरामद किए हैं। सिर्फ डायरी ही एक अहम साक्ष्य है।

-जेवरात मीरा के थे। यह पहचान करने वाला कोई नहीं है।

-हत्यारोपियों के कपड़े। उसमें सिर्फ मिट्टी के तेल की दुर्गंध है।

-पुलिस ने दो स्वतंत्र गवाह खोजे हैं। जो यह बयान दे रहे हैं कि रामवीर और बबलू को सुभाष के घर जाते देखा था।

-आरोपियों का इकबालिया बयान कोर्ट में कोई मायने नहीं रखता। पुलिस जो कहानी बता रही है उसे साबित करने के लिए अभी और साक्ष्यों की जरूरत है।

-हत्यारोपी और पीड़ित परिवार पड़ोसी हैं। इसलिए सर्विलांस से कोई साक्ष्य नहीं मिला। कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है।

-पीड़ित के घर फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट भी नहीं मिले हैं। हत्यारोपी ने अपना कमरा धो दिया था। वहां बबलू और उसके पिता के बाल नहीं मिले।

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  • Web Title:Triple murder was committed for three lakhs revealed