ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेश आगरासंलेखना से शरीर त्यागने वाली शंकुतला जैन का डोला निकाला

संलेखना से शरीर त्यागने वाली शंकुतला जैन का डोला निकाला

सकल जैन समाज के राजकुमार जैन ने बताया कि मोती कटरा निवासी काशचंद जैन की पत्नी शंकुतला जैन ने समाधिमरण की अपनी इच्छा जाहिर...

संलेखना से शरीर त्यागने वाली शंकुतला जैन का डोला निकाला
हिन्दुस्तान टीम,आगराMon, 26 Feb 2024 11:15 PM
ऐप पर पढ़ें

सकल जैन समाज के राजकुमार जैन ने बताया कि मोती कटरा निवासी काशचंद जैन की पत्नी शंकुतला जैन ने समाधिमरण की अपनी इच्छा जाहिर की। उन्होंने संलेखना कर मृत्यु को महोत्सव में बदल दिया। नमोकार मंत्र और परमात्मा की जय-जयकार के साथ उनका डोला निकाला गया। अग्रवाल दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मोतीकटरा से शुरू हुआ डोला पूज्य पृथ्वीचंद समाधि स्थल पचकुइयां पर पहुंचा और मुखाग्नि दी गई। डोला यात्रा के दौरान आर्यिका का सानिध्य रहा।

उन्होंने बताया कि शंकुतला जैन ने संलेखना की इच्छा व्यक्त की तो उनके भाई पदम सेठी निवासी विदिशा ने आचार्य भगवंत विद्या सागर के संघस्थ ब्रह्मचारिणी हेमा दीदी व सुलोचना दीदी निवासी विदिशा से संपर्क किया। तुरंत ही आचार्य भगवंत के शिष्य परम प्रभावक शिष्य मुनि निर्वेग सागर महाराज के आशीर्वाद से दो प्रतिमा का संकल्प दिया। 17 फरवरी से संलेखना की साधना शुरू कर दी। राजकुमार जैन ने बताया 22 फरवरी को उन्होंने आचार्य भगवंत के शिष्य मुनिराज अजित सागर महाराज से सात प्रतिमा लेकर गृह त्याग कर दिया। अपनी साधना के साथ 21 दिन तक चारों प्रकार के आहार को त्याग दिया। तीन दिन के उपवास के साथ चारों प्रकार के आहार व जल का त्याग कर दिया। 26 को सामयिक काल में वर्तमान पर्याय को त्याग कर मृत्यु महोत्सव के साथ सद्गति को प्राप्त की। उनके साधना के संबोधन में आचार्य विराग सागर महाराज के शिष्य विकसंत सागर महाराज ससंघ का सानिध्य भी प्राप्त हुआ।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें