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26 जनवरी, 2021|12:45|IST

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यूपी बार्डर पर किसानों का सत्याग्रह खत्म, दिल्ली कूच की अनुमति

1 / 3दिल्ली कूच की अनुमति मिलने के बाद मेधा पाटकर व उनके साथी।

2 / 3दिल्ली कूच की अनुमति से पहले हाईवे पर धरना देते किसान।

3 / 3किसानों के आंदोलन के चलते लगा जाम।

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44 घंटे की लंबी जद्दोजहद के बाद आगरा उत्तर प्रदेश के बार्डर पर किसानों का सत्याग्रह खत्म हो गया। शुक्रवार शाम चार बजे पुलिस ने उन्हें दिल्ली कूच की अनुमति के लिए प्रदेश की सीमा में घुसने दिया। इससे सत्याग्रह पर बैठे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। ढोल-नगाढ़े बजने लगे। किसान एकता जिंदाबाद के नारे गूंजे। तनाव पूर्ण माहौल पलभर में खुशी में बदल गया। मध्यप्रदेश और राजस्थान के किसान वापस लौट गए। वहीं, मेधा पाटकर के संग महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक से आए किसान दिल्ली के लिए रवाना हो गए। 
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर कृषि बिल और 2020 इलेक्ट्रिसिटी बिल का विरोध जताने के लिए संविधान दिवस पर दिल्ली में आयोजित आंदोलन में भाग लेने के लिए जा रहीं थीं। उनके साथ कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान की अलग-अलग तहसीलों के गांव से आए करीब चार सौ से अधिक किसान थे। वाहनों की लंबी कतार थी। बुधवार शाम को उनके काफिले को सैंया बॉर्डर पर रोक लिया। उत्तर प्रदेश की सीमा में उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। उन्होंने सत्यागृह शुरू कर दिया। राजस्थान-उत्तर प्रदेश की सीमा पर पार्वती नदी के पुल पर सत्यागृह शुरू कर दिया। इससे नेशनल हाईवे-3 की हालात खराब हो गई। 44 घंटे किसानों का सत्यागृह चला। आगरा प्रशासन की कई दफा मेधा पाटकर से वार्तालाप भी हुआ। मगर, वे दिल्ली जाने पर अडिंग रहीं। सर्दी और पानी में भी किसान रोड से नहीं हटे। रात्रि का विश्राम और भोजन एक स्थान पर बैठकर किया। शुक्रवार की दोपहर चार बजे आगरा पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश की अनुमति दे दी। इससे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। ढोल-नगाढ़े बजे। किसान एकता के नारे गूंजे। मध्यप्रदेश और राजस्थान के किसान वापस लौट गए। वहीं, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात के किसान मेधा पाटकर के संग दिल्ली को रवाना हो गए। मेधा पाटकर ने इसे किसानों की जीत बताया। 

पीएम नरेंद्र मोदी का जलाया पुतला, की नारेबाजी 
सत्याग्रह कर रहे किसानों ने शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मुरैना के गांव बस्तौली निवासी किसान ग्याराम सिंह धाकड़ ने बताया कि केंद्र सरकार ने हाल ही में कृषि बिल पारित किया है। ये किसान विरोधी है। उन्होंने बताया कि उनके पास 15 बीघा जमीन है। उसमें वे गेहूं, बाजरा, सरसों, तिल आदि की खेती करते हैं। उनका कहना था कि ये बिल मंडी खत्म कर देगा। विदेशी कंपनियां खेती करेंगीं। आवश्यक वस्तु अधिनियम से कालाबजारी और महंगाई बढ़ेगी। वर्तमान में फसल से किसान की लागत नहीं निकल रही है। इस लिए वे बिल का विरोध कर रहे हैं और पुतला फूंक रहे हैं। 

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  • Web Title:Satyagraha of farmers on UP border ends allowed to go to Delhi