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आगरा कासगंज में बनेगा रामायण कालीन वन

हिन्दुस्तान टीम,आगराPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 06:21 PM
 कासगंज में बनेगा रामायण कालीन वन

सोरों के मानव निर्मित घने वनों में अब रामायण कालीन वनों की भी स्थापना की जाएगी। प्रदेश की योगी सरकार ने जिन चार जनपदों को रामायण कालीन वन लगाने के लिए चुना है उनमें अयोध्या, चित्रकूट, प्रयागराज के साथ ही कासगंज भी शामिल है। वन विभाग अब रामायण कालीन 88 प्रजातियों के पौधे सोरों के गंगा व भागीरथ वन में लगाने की तैयारी में जुटा है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब अलीगढ़ दौरे पर आए तो उन्होंने गंगा व भागीरथ वनों की जानकारी मांगी और कासगंज में कुछ नया करने की बात कही। वन विभाग ने इस दौरान रामायण कालीन वनों को लगाने के लिए उन जनपदों को चुना जिनका भगवान राम से किसी भी प्रकार से संबंध रहा है। अयोध्या, प्रयागराज व चित्रकूट से भगवान राम से जुड़े हैं। वहीं मुख्यमंत्री के विशेष प्रयास से कासगंज को भी इसमें शामिल किया गया है। प्रदेश सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इन जिलों का चयन किया है। वन विभाग अब रामायण कालीन वनों के पौधों को रोपने की तैयारी में जुटा है। सोरों के गंगावन, भागीरथवन इन दोनों वनों के बीच गंगा किनारे बन रहे ग्रीन कॉरीडोर में रामायण कालीन पौधों का रोपण किया जाएगा। जिस जगह पौधे रोपे जाएंगे उस जगह रामायण कालीन वनों का नाम दिया जाएगा।

रामायण कालीन यह पौधे किए जाएंगे रोपित

वन विभाग के डीएफओ दिवाकर वशिष्ठ ने कहा कि रामायण कालीन जो पौधे रोपित किए जाएंगे। उनमें बेल, खैर, पॅलाश, जामुन, अनार, कचनार, अशोक, बहेड़ा, पीपल, बरगद, कल्पवृक्ष, अर्जुन, शीशम, करौंदा, बांस, अंकोल, भिलावा, खस, चिलबिल, केबड़ा, कटहल, अमलतास, कुटुज, बिजौरा, कुंद, शाल, कदंब, चीड़ व खजूर आदि 88 प्रजातियों के पोधे शामिल किए गए हैं।

वर्जन-भगवान राम को प्रकृति से बहुत प्रेम था। वन गमन के समय जब वह चित्रकूट पहुंचे तो भगवान राम व माता सीता ने जिस स्थान पर अपनी कुटिया स्थापित की उस कुटिया के चारों ओर फलदार, रसदार, औषधीय व अन्य प्रजातियों के पौधे रोपित किए। उन्हें पोषित भी किया। इसका जिक्र रामचरित मानस में भी मिलता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दिलीप चौधरी, सोरों

वर्जन- प्रदेश सरकार ने रामायण कालीन वनों की स्थापना के लिए जिन चार जनपदों का चयन किया है। उनमें अयोध्या, चित्रकूट, प्रयागराज के साथ कासगंज को भी शामिल किया गया है। त्रेता युग की 88 प्रजातियों का पौधों का रोपण रामायण कालीन वनों के बनाने में किया जाएगा। रामायण कालीन वनों को गंगा, भागीरथ व उनके बीच गंगा किनारे बनरहे ग्रीन कॉरीडोर में किया जाएगा। वन विभाग पौधों की सूची और पौधे उपल्ब्ध कराएगा।

दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ कासगंज

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