सात उपाय करिए, पशुओं को बीमारियों से घेर सकती है बरसात
Agra News - बरसात के मौसम में पशु पालन से जुड़े वैज्ञानिकों ने दुधारू पशुओं की सेहत के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी है। गर्मी से राहत के साथ-साथ कई रोगों का खतरा होता है। पशुपालकों को सही टीकाकरण, पानी की सफाई, और परजीवी नियंत्रण जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

दिनों से बरसात का अलर्ट और बीच-बीच में बरसात पड़ने से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं पशुओं को कई रोगों से खतरा भी पैदा करती है। ऐसे में पशु पालन से जुड़े वैज्ञानिकों ने पशुओं और विशेषकर दुधारू पशुओं को लेकर बेहद सावधानी बरतने की महत्वपूर्ण जानकारियां पशु पालकों को दी हैं। जिससे पशुओं में बरसात के समय होने वाली बीमारियों से बचाए रखा जा सकेगा। इसके लिए ग्रामीणों को कई तरह के तत्कालिक कदम उठाने पशु पालन के लिए हित में होंगे। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ सुशील के मुताबिक बरसात गर्मी से राहत तो लाती है, लेकिन साथ ही पानी से जुड़ी कई तरह की परेशानियां भी लाता है, जैसे कि जीवाणु संक्रमण, वायरल संक्रमण और प्रबंधन संबंधी समस्याएं। जिस तरह हम बरसात के दौरान अपना ख्याल रखते हैं, उसी तरह दुधारू पशुओं का ख्याल रखना भी उतना ही ज़रूरी है। तापमान अत्यधिक गर्मी से नमी वाले मौसम में बदल जाता है। उन्होने बताया कि जल प्रदूषण, बाह्य परजीवी संक्रमण, अंतःपरजीवी संक्रमण जीवाणु संक्रमण और अन्य समस्याओं से बचने के लिए कुछ उपाय अवश्य किए जाने चाहिए。
ये हैं पशुओं की सेहत के लिए विशेष बातें
0- बरसात के मौसम में दुधारू पशुओं में लिवर फ्लूक, फेफड़े का कृमि, टेपवर्म और राउंडवर्म जैसे कृमि संक्रमण एक बड़ी समस्या है। मानसून से पहले और बाद अपने पशुओं को एक्सिफ्लूक डीएस प्लस जैसी संपूर्ण कृमिनाशक दवा से उपचारित करना महत्वपूर्ण है ।
0- बरसाती दिनों से से पहले पशुओं को हेमरेजिक सेप्टिसीमिया और फुट एंड माउथ डिजीज जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगाया जाना चाहिए।
0-बरसात के दिन में टिक्स और मक्खियों का मौसम होता है क्योंकि ये नम मौसम में तेजी से बढ़ते हैं। टिक्स जानवरों का खून चूसते हैं और एनीमिया पैदा करते हैं। बाह्य परजीवी संक्रमण होने पर टिकनाश और जुसाफा जैसे बाह्य परजीवीनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है।
0-बरसात के मौसम में गायों के लिए पर्याप्त मात्रा में ताजा पानी उपलब्ध कराएं। बरसाती दिनों के दौरान पानी में रेत या मिट्टी मिल जाती है, गायों के लिए पानी को लगातार छानते रहें ताकि वे गंदा पानी न पी लें।
0-बरसात के मौसम में जानवरों को चरने के लिए न छोड़ें क्योंकि बरसात के मौसम में उगने वाली घास में पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो दूध की मात्रा को प्रभावित कर सकती है।
0-चारे की कमी से बचने के लिए, पशुओं के लिए सूखी घास और साइलेज जैसा चारा तैयार करें। बरसात के मौसम में पशुओं को खिलाने से पहले हरे चारे को सुखा लें। पशु आहार को सूखी और स्वच्छ जगह पर रखें। चारे में अधिक नमी होने से फफूंद लग सकती है।
0- जीवाणु संक्रमण : बरसात के मौसम में मैस्टाइटिस (स्तनपान रोग) के मामले बढ़ने लगते हैं क्योंकि इस दौरान दुधारू पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे बचने के लिए बचे हुए चारे, गोबर और मूत्र को नियमित रूप से साफ करें।
0-घावों या कटने-फटने की स्थिति में गंभीर संक्रमण और आगे की जटिलताओं से बचने के लिए उपयुक्त मरहम से पट्टी बांधनी चाहिए।
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