बोले कासगंज: महिलाओं की आत्मनिर्भरता की उड़ान

Feb 12, 2026 10:11 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, आगरा
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Agra News - 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, जिसमें महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया। सरोजिनी नायडू की जयंती पर, महिलाओं ने शिक्षा में प्रगति और सुरक्षा की मांग की। ग्रामीण क्षेत्रों में छात्राओं के लिए छात्रवृत्तियों और सुरक्षित परिवहन की आवश्यकता पर बल दिया गया।

बोले कासगंज: महिलाओं की आत्मनिर्भरता की उड़ान

13 फरवरी को देश में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय महिला दिवस इस वर्ष भी महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। यह दिवस देश की महान कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने महिलाओं को समाज और राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान समय में उनकी सोच प्रदर्शित हो रही है। आज के दौर में आधुनिक भारत में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं, फिर भी स्थानीय स्तर पर जागरूकता, अवसर और सुरक्षा के क्षेत्र में अभी और प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के बोले कासगंज के तहत आयोजित संवाद में महिलाओं ने कहा कि, शिक्षा के क्षेत्र में बेटियां निरंतर आगे बढ़ रही हैं। जिले में इंटरमीडिएट और स्नातक परीक्षाओं में छात्राओं का परिणाम लगातार बेहतर हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी छात्राओं को 18 वर्ष की आयु के बाद विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा के लिए शहरों की ओर आने का अवसर मिल रहा है। अभिभावकों की सोच में भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। पहले जहां बेटियों की पढ़ाई अक्सर प्राथमिक स्तर तक सीमित रह जाती थी, वहीं अब परिवार उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के साथ सुरक्षा और सुविधाओं का समुचित प्रबंध भी आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने वाली छात्राओं के लिए सुरक्षित छात्रावास, परिवहन सुविधा और डिजिटल शिक्षा संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाई जानी चाहिए। यदि स्थानीय स्तर पर पुस्तकालय, कोचिंग सेंटर और कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएं तो बेटियों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच मिल सकता है। सुरक्षा के प्रति भी सजग महिलाएं: महिलाओं की प्रमुख मांगों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना भी शामिल है। इसके तहत सार्वजनिक स्थलों, बाजारों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे और महिला हेल्प डेस्क की स्थापना आवश्यक मानी जा रही है। इधर त्वरित पुलिस सहायता और कानूनी जागरूकता शिविरों से महिलाओं में भरोसा बढ़ा है। इधर सामाजिक संगठनों का भी दायित्व है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए महिला अधिकारों और कानूनों की जानकारी घर-घर तक पहुंचाएं। स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की भी आवश्यकता जताई जा रही है। सरकारी योजनाओं और स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो, साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू करें। पंचायतों में चुनी गई महिला प्रतिनिधियों को नेतृत्व प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाया जा सकता है, ताकि वे विकास योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू कर सकें। महिलाओं का कहना है कि, राष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का भी दिन है। समाज को यह समझना होगा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास से जुड़ा विषय है। जब बेटियां शिक्षित होंगी, सुरक्षित होंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी परिवार, समाज और देश सशक्त होगा। ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी छात्राओं के लिए जिला मुख्यालय पर सुरक्षित छात्रावास की व्यवस्था हो। कई बालिकाएं दूरी और सुरक्षा कारणों से पढ़ाई छोड़ देती हैं। यदि सरकार छात्रावास, लाइब्रेरी और कोचिंग सहायता उपलब्ध कराएं तो गांव की बेटियां भी डॉक्टर, इंजीनियर व प्रशासनिक अधिकारी बन सकती हैं। - चंद्र प्रभा महिलाओं की पहली मांग है कि गांव से लेकर शहर तक बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाए। इंटर और स्नातक स्तर तक छात्राओं के लिए विशेष छात्रवृत्ति तथा सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था हो। स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल और डिजिटल शिक्षा संसाधन उपलब्ध हों। - अनीता महिलाओं की प्रमुख मांग है कि सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। सीसीटीवी कैमरे, महिला हेल्प डेस्क और त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो। सुरक्षित वातावरण मिलने पर ही महिलाएं निडर होकर शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ पाएंगी। - ममता सोलंकी स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए सिलाई, कंप्यूटर, डिजिटल मार्केटिंग, खाद्य प्रसंस्करण व हस्तशिल्प जैसे कौशल विकास केंद्र खोले जाएं। प्रशिक्षण के साथ प्रमाणपत्र और रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था भी हो। इससे महिलाएं स्वरोजगार शुरू कर सकेंगी और परिवार की आय बढ़ेगी। - गविता पांडेय स्थानीय निकायों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी योजनाओं में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। रोजगार में आरक्षण और समान वेतन की व्यवस्था सख्ती से लागू हो। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। - मीनाक्षी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिलाओं के लिए विशेष जांच और परामर्श की सुविधा बढ़ाई जाए। गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और वरिष्ठ महिलाओं के लिए नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित हों। पोषण, एनीमिया और मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। - अनीता शर्मा महिलाओं और किशोरियों के लिए डिजिटल साक्षरता अभियान चलाया जाए। ऑनलाइन सेवाओं, बैंकिंग, यूपीआई और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए। डिजिटल ज्ञान से महिलाएं ठगी से बचेंगी और आत्मविश्वास के साथ आधुनिक भारत का हिस्सा बनेंगी। - रमा यादव महिला स्वयं सहायता समूहों को आसान ऋण, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाए। स्थानीय उत्पादों को सरकारी मेलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए। इससे ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगी और परिवार की आय में योगदान देंगी। मिथलेश स्कूल और कॉलेज स्तर पर बालिकाओं के लिए खेल सुविधाएं और एनसीसी प्रशिक्षण बढ़ाया जाए। इससे वे शारीरिक रूप से मजबूत होंगी और सेना, पुलिस व अन्य सेवाओं में अवसर प्राप्त कर सकेंगी। आज महिलाएं थल, जल और वायु सेना में सेवा दे रही हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर तैयारी की सुविधाएं जरूरी हैं। - सोमवती शर्मा ग्रामीण क्षेत्रों से शहर तक छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और नियमित परिवहन की व्यवस्था हो। विशेष बस सेवा या महिला सीट आरक्षण लागू हो। सुरक्षित यात्रा से ही महिलाएं निर्बाध रूप से शिक्षा और रोजगार तक पहुंच पाएंगी। - सरिता सिंह महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देने को नियमित कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित हों। घरेलू हिंसा, संपत्ति अधिकार और कार्यस्थल सुरक्षा कानूनों की जानकारी दी जाए। जागरूक महिला अन्याय के खिलाफ खड़ी हो सकती है। व समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। - शालिनी माहेश्वरी स्थानीय स्तर पर महिला उद्यमियों के लिए विशेष स्टार्टअप सहायता योजना लागू हो। कम ब्याज पर ऋण, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जाए। इससे महिलाएं छोटे उद्योग, कृषि आधारित व्यवसाय या सेवा क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकेंगी। - गीता सक्सैना समाज में बाल विवाह अभी कई बार सुनने को मिल जाता है। इस कुरीति के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाए। बेटियों की शिक्षा और करियर को प्राथमिकता देने का संदेश दिया जाए। यदि बाल विवाह रुकेगा तो बालिकाएं उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होंगी। - उषा ग्राम पंचायतों में चुनी गई महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किए जाने की जरूरत है। उन्हें नेतृत्व व प्रशासनिक प्रशिक्षण दिया जाए। इससे वे प्रभावी निर्णय ले सकेंगी और विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू कर पाएंगी। मजबूत नेतृत्व से गांव का सर्वांगीण विकास संभव है। - वीनू वार्ष्णेय

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