
'एक स्टेशन एक उत्पाद' योजना पटरी से उतरी, कासगंज जंक्शन पर सामान्य केले-पेठा की बिक्री
संक्षेप: Agra News - भारतीय रेल की 'एक स्टेशन एक उत्पाद' योजना कासगंज रेलवे जंक्शन पर अपने उद्देश्य से भटक गई है। यहां सामान्य केले और पेठा बेचे जा रहे हैं, जबकि योजना का लक्ष्य स्थानीय पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देना है। यात्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्थानीय कारीगरों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
भारतीय रेल द्वारा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ का उद्देश्य हर स्टेशन पर वहां का विशिष्ट पारंपरिक उत्पाद यात्रियों तक पहुंचाना है। मगर कासगंज रेलवे जंक्शन पर यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटकती नज़र आ रही है। स्टेशन परिसर में स्थापित ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ स्टॉल पर इन दिनों केले और पेठा बेचे जा रहे हैं।

जबकि योजना के अनुसार यहां जिले की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प या स्थानीय रूप से प्रसिद्ध उत्पादों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कासगंज जिला सोन पापड़ी, जरी-जरदोजी उत्पादन के लिए जाना जाता है, साथ ही यहां के कारीगर मिट्टी, कांच व लकड़ी के खिलौने और ग्रामीण हस्तशिल्प भी बनाते हैं। ऐसे में इन स्थानीय उत्पादों की जगह सामान्य पेठा और केला बिकना योजना के खिलाफ है।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि रेलवे ने इस योजना को बढ़िया सोच के साथ शुरू किया था, लेकिन अब यह बस एक आम दुकान जैसा बन गया है। इससे न तो स्थानीय उत्पादों का प्रचार हो रहा है और न ही कारीगरों को लाभ मिल रहा है। रेलवे परामर्श समिति के पूर्व सदस्य अखिलेश अग्रवाल ने कहा है कि रेलवे अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस योजना के उद्देश्य को पुनः लागू करते हुए कासगंज के पारंपरिक उत्पादों को प्रमुखता दें, ताकि ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ स्थानीय पहचान का प्रतीक बन सके।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




